बाजार में ईवी की बढ़ी मांग : पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से बदली लोगों की पसंद, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद में आई तेजी

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ आम लोगों की जेब पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण भारत में भी पेट्रोल और डीजल महंगा हुआ है। बीते कुछ सप्ताह में ईंधन की कीमतों में हुई वृद्धि ने वाहन खरीदारों की सोच बदलनी शुरू कर दी है। अब लोग केवल वाहन खरीदने की कीमत नहीं, बल्कि उसके संचालन पर आने वाले खर्च का भी गंभीरता से आकलन कर रहे हैं। यही वजह है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। बढ़ते ईंधन खर्च से बचने के लिए बड़ी संख्या में ग्राहक इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं। 

वाहन डीलरों का भी मानना है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के लिए सबसे बड़ा प्रेरक कारक बनकर उभरी हैं। वाहन डीलरों के संगठन फाडा के ताजा आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। मई महीने में देश में बिकने वाले कुल वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 11 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। इससे पहले पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों की औसत हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत रही थी। यानी कुछ ही समय में ईवी की लोकप्रियता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

15 मई के बाद से ईंधन की कीमतों में करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंताओं के कारण वैश्विक बाजार में तेल महंगा हुआ है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईंधन महंगा होने से लोगों का झुकाव तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ा है। उन्होंने कहा कि मई महीने में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत के पार पहुंच गई, जो बाजार में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत है।

दिलचस्प बात यह है कि केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही नहीं, बल्कि कुल वाहन बाजार में भी मजबूती देखने को मिली है। पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी चिंताओं के बावजूद मई में कुल वाहन बिक्री पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 10 प्रतिशत बढ़कर 25.3 लाख इकाई तक पहुंच गई। इससे साफ है कि उपभोक्ताओं का भरोसा बाजार में बना हुआ है और वे अब अधिक किफायती विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।

दोपहिया से कारों तक बढ़ा ईवी का दबदबा, ग्रामीण बाजार भी बना बड़ी ताकत

मई के आंकड़ों पर नजर डालें तो लगभग हर श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ी है। दोपहिया वाहन वर्ग में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी एक वर्ष पहले के 6.11 प्रतिशत से बढ़कर 9.25 प्रतिशत हो गई। बढ़ती पेट्रोल कीमतों के बीच दैनिक उपयोग करने वाले ग्राहकों ने बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरसाइकिलों को प्राथमिकता दी है। तिपहिया वाहन श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा और भी मजबूत हुआ है। मई 2025 में जहां इस वर्ग में ईवी की हिस्सेदारी 61.46 प्रतिशत थी, वहीं मई 2026 में यह बढ़कर 64.45 प्रतिशत तक पहुंच गई। शहरों में ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों की बढ़ती मांग इसका प्रमुख कारण मानी जा रही है। यात्री वाहन यानी कारों के क्षेत्र में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 4.51 प्रतिशत से बढ़कर 6.63 प्रतिशत हो गई है। वहीं वाणिज्यिक वाहनों में यह आंकड़ा 1.37 प्रतिशत से बढ़कर 2.86 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह संकेत देता है कि अब परिवहन और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े लोग भी ईंधन खर्च कम करने के लिए इलेक्ट्रिक विकल्पों को अपनाने लगे हैं। 

मई महीने में यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री 23 प्रतिशत बढ़कर 4.02 लाख से अधिक इकाई रही। खास बात यह रही कि ग्रामीण क्षेत्रों में मांग अधिक मजबूत दिखाई दी। जहां शहरी बाजार में 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बिक्री 30 प्रतिशत तक बढ़ गई। वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों की लोकप्रियता भी लगातार बढ़ रही है। मई में सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की संयुक्त हिस्सेदारी बढ़कर 38 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसमें सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 7 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। वाहन निर्माताओं को भी इस बढ़ती मांग का लाभ मिला है। मई में मारुति सुजुकी की बिक्री 33 प्रतिशत बढ़कर 1.64 लाख से अधिक वाहन रही। 

टाटा मोटर्स की बिक्री 39 प्रतिशत बढ़कर 55 हजार से ज्यादा इकाई और महिंद्रा एंड महिंद्रा की बिक्री 10 प्रतिशत बढ़कर 51 हजार से अधिक वाहन दर्ज की गई। दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री भी 8 प्रतिशत बढ़कर 18.4 लाख इकाई तक पहुंच गई। वहीं वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में 5 प्रतिशत और ट्रैक्टर बिक्री में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रहती है तो आने वाले महीनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और तेज हो सकती है। बढ़ती ईंधन लागत, कम संचालन खर्च और बेहतर तकनीक के कारण अब इलेक्ट्रिक वाहन केवल एक विकल्प नहीं बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

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