भारत सरकार देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक के सहारे और अधिक मजबूत, पारदर्शी तथा आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। 18 जून को नई दिल्ली के भारत मंडपम में देश की अनाज भंडारण व्यवस्था को नई पहचान देने वाले ‘स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम’ का शुभारंभ किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल के जरिए सरकारी गोदामों को डिजिटल तकनीकों से जोड़ा जाएगा, जिससे अनाज के रखरखाव, निगरानी और वितरण की पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुरक्षित बन सकेगी। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि यह पहल देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य प्रबंधन तंत्र में बड़े बदलाव की शुरुआत साबित होगी।
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशाल स्तर पर अनाज का भंडारण किया जाता है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) और विभिन्न राज्य एजेंसियों के माध्यम से लाखों टन गेहूं, चावल और अन्य खाद्यान्न सुरक्षित रखे जाते हैं। हालांकि लंबे समय से गोदामों में रखे अनाज की निगरानी और प्रबंधन पारंपरिक तरीकों पर आधारित रहा है, जिसके कारण कई बार अनाज के खराब होने, नमी बढ़ने, कीटों के हमले और अन्य तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सरकार का नया स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम इन समस्याओं का आधुनिक समाधान लेकर आया है। इस प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), ऑटोमेशन और रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से देशभर के गोदामों की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सकेगी। नई व्यवस्था के तहत गोदामों में अत्याधुनिक सेंसर लगाए जाएंगे, जो तापमान, नमी, कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य महत्वपूर्ण मानकों की लगातार निगरानी करेंगे। यदि किसी गोदाम में नमी का स्तर बढ़ता है या अनाज को नुकसान पहुंचने की आशंका बनती है तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचना मिल जाएगी।
इससे समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे और लाखों टन अनाज को खराब होने से बचाया जा सकेगा। भंडारण के दौरान होने वाली अनाज की बर्बादी को कम करना देश की खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। हर वर्ष बड़ी मात्रा में अनाज विभिन्न कारणों से प्रभावित होता है, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ता है। स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम इस चुनौती को काफी हद तक कम करने में मददगार साबित हो सकता है। नई तकनीक सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव लाएगी। गोदामों के मुख्य प्रवेश द्वार और वजन मापने वाले कांटों को पूरी तरह स्वचालित किया जाएगा। वाहनों के नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे, फेस रिकग्निशन तकनीक और डिजिटल प्रवेश नियंत्रण व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे गोदामों में होने वाली अनियमितताओं और चोरी की संभावनाओं को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ता खाद्य भंडारण तंत्र
स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका केंद्रीकृत डिजिटल डैशबोर्ड होगा। इस डैशबोर्ड के माध्यम से अधिकारी देशभर के विभिन्न गोदामों की स्थिति एक ही मंच पर देख सकेंगे। किस गोदाम में कितना अनाज रखा गया है, उसकी गुणवत्ता कैसी है, तापमान और नमी का स्तर क्या है तथा कहां तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। इन सभी जानकारियों तक कुछ ही सेकंड में पहुंचा जा सकेगा। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही अनाज की आवाजाही और भंडारण से जुड़े आंकड़ों में पारदर्शिता बढ़ेगी। डिजिटल रिकॉर्ड होने से जवाबदेही भी मजबूत होगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की पहचान आसानी से की जा सकेगी।कार्यक्रम के दौरान ‘डिपोट दर्पण’ रैंकिंग के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले एफसीआई और सीडब्ल्यूसी के गोदामों को सम्मानित भी किया जाएगा।
यह रैंकिंग प्रणाली गोदामों की साफ-सफाई, रखरखाव, सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं और कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करती है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले गोदामों को सम्मानित करने का उद्देश्य पूरे देश में गुणवत्ता आधारित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है, जिससे भंडारण व्यवस्था में निरंतर सुधार हो सके। सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित यह पहल केवल गोदामों के आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध देश के करोड़ों राशन कार्ड धारकों से भी है। जब अनाज सुरक्षित रहेगा, उसकी गुणवत्ता बेहतर होगी और आपूर्ति श्रृंखला अधिक प्रभावी बनेगी, तब सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से लाभार्थियों तक समय पर और बेहतर गुणवत्ता वाला खाद्यान्न पहुंच सकेगा।
स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम को सरकार की डिजिटल इंडिया, पीएम गतिशक्ति और आत्मनिर्भर भारत जैसी प्रमुख पहलों से भी जोड़ा जा रहा है। यह परियोजना आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक दक्षता के समन्वय का उदाहरण बनेगी। आने वाले वर्षों में यदि यह मॉडल सफल साबित होता है तो देश की खाद्य प्रबंधन व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षित भंडारण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम न केवल अनाज की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि भारत को एक अधिक सक्षम, पारदर्शी और तकनीक-संचालित खाद्य सुरक्षा तंत्र की ओर ले जाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

















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