राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक व्यापक अभियान शुरू किया है। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू के निर्देशों के बाद पुलिस आयुक्त द्वारा जारी नए सर्कुलर में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य पुलिस की जमीनी मौजूदगी बढ़ाना, जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित करना तथा यातायात और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का मौके पर समाधान सुनिश्चित करना है। नई व्यवस्था के तहत अब पुलिस अधिकारियों को कार्यालयों तक सीमित रहने के बजाय सड़कों पर अधिक समय बिताना होगा। दिल्ली पुलिस का मानना है कि यदि वरिष्ठ अधिकारी स्वयं क्षेत्र में मौजूद रहेंगे तो अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और जनसमस्याओं के समाधान में अधिक प्रभावशीलता आएगी।
इसी सोच के साथ जिला पुलिस और ट्रैफिक पुलिस को संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। सर्कुलर के अनुसार सप्ताहांत यानी शनिवार और रविवार के अलावा सप्ताह में दो अन्य दिनों में जिला पुलिस और ट्रैफिक पुलिस संयुक्त रूप से फुट पेट्रोलिंग करेंगी। इस दौरान अधिकारी बाजारों, आवासीय क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थानों का दौरा कर स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे तथा उनकी समस्याओं को सुनेंगे। पुलिस का प्रयास रहेगा कि शिकायतों और समस्याओं का अधिकतम समाधान मौके पर ही किया जा सके। दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए भी विशेष रणनीति तैयार की है। सप्ताह में चार दिन विशेष अभियान चलाकर सड़कों पर किए गए अवैध अतिक्रमण, अस्थायी रुकावटों और अवैध पार्किंग को हटाया जाएगा।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन स्थानों की पहचान करें जहां नियमित रूप से यातायात बाधित होता है और वहां स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करें। इसके लिए स्थानीय निकायों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ भी समन्वय स्थापित किया जाएगा। नई गाइडलाइंस का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वरिष्ठ अधिकारियों की अनिवार्य फील्ड ड्यूटी है। सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक का समय केवल मैदानी कार्यों के लिए निर्धारित रहेगा। इस अवधि में किसी भी प्रकार की कार्यालयी बैठक, आंतरिक सम्मेलन या प्रशासनिक गतिविधि नहीं की जाएगी। जिला पुलिस के डीसीपी, अतिरिक्त डीसीपी और एसीपी स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी क्षेत्र में मौजूद रहेंगे।
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं देखा जाएगा। अधिकारियों की उपस्थिति और गतिविधियों की नियमित निगरानी की जाएगी। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वरिष्ठ अधिकारी जनता के बीच रहकर वास्तविक समस्याओं को समझें और उनका समाधान करें। इससे पुलिस और नागरिकों के बीच विश्वास भी मजबूत होगा। पेट्रोलिंग के दौरान पुलिस विशेष रूप से छह प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करेगी। इनमें व्यापारियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए), मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशनों और आम नागरिकों से संवाद स्थापित करना प्रमुख होगा। इसके अलावा सड़कों से अस्थायी अतिक्रमण हटाना, ट्रैफिक बाधाओं की पहचान करना, अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई करना तथा संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों का निरीक्षण करना भी अभियान का हिस्सा रहेगा।
सख्त निगरानी और जवाबदेही पर रहेगा विशेष जोर
नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली पुलिस ने निगरानी और जवाबदेही की मजबूत प्रणाली भी तैयार की है। प्रत्येक फुट पेट्रोलिंग और विशेष अभियान का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसमें अभियान की तारीख, समय, शामिल अधिकारियों के नाम, हटाए गए अतिक्रमण, ट्रैफिक सुधार के लिए उठाए गए कदम तथा की गई कानूनी कार्रवाई का पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा। पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और दिल्ली पुलिस अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई को भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाएगा।
इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि अभियान केवल कागजों तक सीमित न रहे बल्कि वास्तविक परिणाम भी सामने आएं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी गतिविधियों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी अनिवार्य की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी कार्रवाई के दृश्य प्रमाण सुरक्षित रखें ताकि भविष्य में उनकी समीक्षा की जा सके। इससे कार्यप्रणाली की निष्पक्षता और प्रभावशीलता दोनों सुनिश्चित होंगी। इसके अलावा सभी जिला इकाइयों को प्रत्येक सोमवार अपनी साप्ताहिक अनुपालन रिपोर्ट विशेष पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) और विशेष पुलिस आयुक्त (यातायात) को भेजनी होगी। रिपोर्ट में सप्ताहभर की गतिविधियों, उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजना का उल्लेख करना अनिवार्य होगा।
वरिष्ठ स्तर पर इन रिपोर्टों की समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। यदि इस पहल को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो इससे दिल्ली में पुलिस की दृश्य उपस्थिति बढ़ेगी, अपराधियों में कानून का भय पैदा होगा और ट्रैफिक प्रबंधन में भी सुधार देखने को मिलेगा। साथ ही नागरिकों और पुलिस के बीच सीधा संवाद बढ़ने से स्थानीय समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा। दिल्ली पुलिस की यह नई रणनीति राजधानी में बेहतर सुरक्षा, सुगम यातायात और अधिक जवाबदेह पुलिस व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

















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