अफ्रीका की धरती पर एक बार फिर ऐसा वायरस लौट आया है, जिसने दुनिया को डर और दहशत की याद दिला दी है। इबोला वायरस के बढ़ते मामलों ने कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने की अपील की है। यह कोई सामान्य संक्रमण नहीं, बल्कि बेहद खतरनाक वायरल बीमारी है, जिसमें मृत्यु दर काफी अधिक मानी जाती है। संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और कई मामलों में आंतरिक रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्याएं होने लगती हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि मौजूदा समय में बंडीबुग्यो वायरस स्ट्रेन से फैल रहे इबोला के लिए न तो कोई पूरी तरह स्वीकृत टीका उपलब्ध है और न ही कोई विशेष इलाज। हालांकि भारत में अभी तक इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है, लेकिन केंद्र सरकार किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। कोरोना महामारी के दौरान देश ने जो भयावह हालात देखे थे, उसके बाद स्वास्थ्य तंत्र अब पहले से कहीं ज्यादा सतर्क दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि अफ्रीका में इबोला के बढ़ते मामलों के बीच भारत ने समय रहते अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को देश में इबोला को लेकर की जा रही तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), नागरिक उड्डयन मंत्रालय, आव्रजन विभाग और कई अन्य एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की निगरानी से लेकर संभावित संक्रमण से निपटने तक हर स्तर की तैयारियों की समीक्षा की गई। सरकार का कहना है कि फिलहाल भारत में चिंता की कोई स्थिति नहीं है। देश में इबोला का कोई संक्रमित मरीज नहीं मिला है और न ही किसी तरह का सामुदायिक संक्रमण सामने आया है। लेकिन एहतियात के तौर पर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है। विदेशों से आने वाले यात्रियों, खासकर अफ्रीकी देशों से आने वालों की स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कोरोना महामारी के दौरान भारत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव देखा था।
अस्पतालों में बेड की कमी, ऑक्सीजन संकट और लगातार बढ़ते मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। ऐसे में अब सरकार किसी भी संभावित खतरे को शुरुआत में ही नियंत्रित करने की रणनीति पर काम कर रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि घबराने की नहीं, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत जरूर है। सरकार की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जांच, क्वारंटाइन, संक्रमण रोकथाम, क्लीनिकल मैनेजमेंट और लैब टेस्टिंग को लेकर मानक संचालन प्रक्रियाएं यानी एसओपी साझा की गई हैं। राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध मामले की तुरंत पहचान कर उसका इलाज और आइसोलेशन सुनिश्चित किया जाए।
इबोला को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किए विशेष दिशा निर्देश
इबोला को लेकर केंद्र सरकार की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर काम कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि ट्रैकिंग, टेस्टिंग और निगरानी व्यवस्था में किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर तैयारी बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) इकाइयों और एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन को भी विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में यदि किसी को अस्पष्ट बुखार या संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसकी तुरंत जांच और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है।
एयरपोर्ट्स पर मेडिकल टीमों को अलर्ट पर रखा गया है और संदिग्ध मामलों के लिए अलग प्रोटोकॉल तैयार किए गए हैं। इबोला कोरोना की तरह तेजी से हवा में फैलने वाला वायरस नहीं है, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के शरीर के संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है। इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों और आम लोगों दोनों के लिए सावधानी बेहद जरूरी है। संक्रमित क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, किसी भी वायरल संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई, हाथ धोने की आदत और लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराना बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में प्रभावित देशों की यात्रा की है और उसे तेज बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करना चाहिए।
भारत में फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं और सरकार लगातार निगरानी बनाए हुए है। लेकिन दुनिया जिस तरह एक-दूसरे से जुड़ी हुई है, उसमें किसी भी वैश्विक बीमारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोरोना महामारी ने यह सिखाया कि समय रहते की गई तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव बनती है। अफ्रीका में फैल रहे इबोला ने दुनिया को फिर यह एहसास करा दिया है कि वायरस और महामारियां सीमाओं में कैद नहीं रहतीं। ऐसे में भारत का अलर्ट मोड पर आना सिर्फ सतर्कता नहीं, बल्कि भविष्य की किसी बड़ी चुनौती से पहले की तैयारी भी माना जा रहा है।

















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