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केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख में पहली बार होंगे पंचायत चुनाव, 21 नवंबर को डाले जाएंगे वोट

केंद्र शासित प्रदेश बनने के सात साल बाद लद्दाख में पहली बार पंचायत चुनाव होने जा रहे हैं। लंबे इंतजार के बाद गांवों की सरकार चुनने की प्रक्रिया शुरू होने से स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। लद्दाख के सभी पंचायत क्षेत्रों में 21 नवंबर 2026 को मतदान कराया जाएगा, जबकि पूरी चुनावी प्रक्रिया 30 नवंबर तक संपन्न कर ली जाएगी। चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इस चुनाव के जरिए ग्रामीण मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे और पंचायत स्तर पर स्थानीय शासन व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। लद्दाख के राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम घोषित कर दिया है। राज्य चुनाव आयुक्त सुधांशु पांडेय की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव की औपचारिक अधिसूचना 26 अक्टूबर को जारी होगी। इसके बाद नामांकन दाखिल करने, नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापस लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के तहत 21 नवंबर को मतदान होगा। चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया को 30 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यह पहला पंचायत चुनाव होगा। इससे पहले नवंबर 2018 में यहां पंचायत चुनाव कराए गए थे। 

उस समय लद्दाख तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था। ऐसे में इस बार होने वाला चुनाव केवल पंचायत प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र शासित प्रदेश के रूप में लद्दाख की स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही गांवों में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर उम्मीदवारों के चयन, चुनाव प्रचार और ग्रामीण मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों तथा स्वतंत्र उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ सकती है। पेयजल, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, रोजगार और ग्रामीण विकास जैसे विषय चुनाव में प्रमुखता से उठाए जा सकते हैं। हालांकि, उम्मीदवारों की स्थिति और चुनावी मुकाबले की वास्तविक तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। नामांकन से मतदान तक तय हुई चुनावी समयसीमा लद्दाख पंचायत चुनाव के कार्यक्रम के मुताबिक, 26 अक्टूबर 2026 को औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद इच्छुक उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 

नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 2 नवंबर निर्धारित की गई है। अगले दिन यानी 3 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इस दौरान उम्मीदवारों के दस्तावेजों और नामांकन की वैधता की पड़ताल की जाएगी। चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए 5 नवंबर तक का समय दिया गया है। इस अवधि के समाप्त होने के बाद चुनाव मैदान में बचे उम्मीदवारों की तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी। इसके बाद चुनाव प्रचार और मतदान की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सभी पंचायत क्षेत्रों में 21 नवंबर को मतदान कराया जाएगा, जबकि 30 नवंबर तक पूरी चुनावी प्रक्रिया संपन्न करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। चुनाव की घोषणा के साथ लागू आदर्श आचार संहिता के तहत चुनावी प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। इसका उद्देश्य चुनाव को निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना है। चुनाव से संबंधित गतिविधियों में शामिल प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों को आयोग के निर्देशों के अनुसार काम करना होगा। मतदान की तैयारियों, चुनाव सामग्री की व्यवस्था, मतदान केंद्रों के प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। यह चुनाव जम्मू-कश्मीर पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 7 के तहत कराया जा रहा है। 

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ये प्रावधान लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश पर भी लागू होते हैं। इनके तहत गांवों में सरपंचों और पंचों का चुनाव कराया जाएगा। पंचायत प्रतिनिधि ग्रामीण स्तर पर स्थानीय आवश्यकताओं को प्रशासन तक पहुंचाने और विकास संबंधी कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से गांवों की समस्याओं और मांगों को संस्थागत मंच मिलने की उम्मीद है। लद्दाख में पंचायत चुनाव का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यहां भौगोलिक परिस्थितियां और दूर-दराज में बसे गांव प्रशासन के सामने कई तरह की चुनौतियां पेश करते हैं। कठिन मौसम, लंबी दूरी और सीमित संपर्क सुविधाओं के कारण स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार करना अहम रहता है। पंचायतों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिकताओं को सामने लाने और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही बढ़ाने का अवसर मिलता है।

कारगिल की पहाड़ी परिषद भंग, प्रशासनिक बदलावों के बीच चुनाव पर नजर 

पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ लद्दाख में एक अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लद्दाख प्रशासन ने लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद, कारगिल को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। परिषद की अंतरिम शक्तियां कारगिल के उपायुक्त को सौंपे जाने की बात कही गई है। इस घटनाक्रम को क्षेत्र में जारी राजनीतिक गतिरोध और नए जिलों के गठन से जुड़े प्रशासनिक बदलावों के संदर्भ में देखा जा रहा है। लद्दाख में द्रास, जंस्कार और संकू जैसे नए जिलों के गठन से संबंधित बदलावों ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर चर्चा बढ़ाई है। ऐसे में परिषद को भंग करने और उसकी शक्तियां प्रशासनिक अधिकारी को सौंपने के फैसले का स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इस घटनाक्रम और पंचायत चुनाव की प्रक्रिया के बीच प्रशासनिक समन्वय किस तरह कायम किया जाएगा, यह आगे स्पष्ट होगा। लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद, कारगिल स्थानीय विकास और प्रशासनिक निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। 

इसलिए परिषद के भंग होने से संबंधित फैसले को क्षेत्र की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दूसरी ओर, पंचायत चुनाव के माध्यम से गांवों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की नई व्यवस्था सामने आएगी। दोनों घटनाक्रमों के बीच स्थानीय निकायों की भूमिका, अधिकारों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भी ध्यान रहेगा। वर्ष 2019 के बाद लद्दाख की राजनीतिक व्यवस्था में कई बदलाव हुए हैं। ऐसे में नवंबर में होने वाला पंचायत चुनाव ग्रामीण स्तर पर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। चुनाव आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मतदाता 21 नवंबर को अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। 

इसके बाद 30 नवंबर तक चुनावी प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य है। अब सभी की नजर चुनावी तैयारियों, उम्मीदवारों की भागीदारी और स्थानीय मुद्दों पर रहेगी। पंचायत चुनाव के नतीजे लद्दाख के गांवों में नेतृत्व की नई तस्वीर सामने लाएंगे। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि निर्वाचित प्रतिनिधि ग्रामीण विकास, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए किस तरह काम करते हैं।

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