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देशभर में दशहरे की धूम, पीएम मोदी और प्रियंका गांधी ने किया रावण दहन, पंचकूला में जला 221 फीट ऊंचा पुतला

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा देशभर में उत्साह, उल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। देश के अलग-अलग हिस्सों में रामलीलाओं के समापन के साथ रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। दिल्ली से लेकर पटना तक और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर हिमालयी राज्यों तक दशहरे की रौनक देखने को मिली। कहीं भगवान राम की विजय की झांकी ने लोगों को आकर्षित किया, तो कहीं विशालकाय पुतलों और आतिशबाजी ने उत्सव को खास बना दिया। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने दशहरा कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर प्रतीकात्मक तीर चलाया और रावण दहन किया। वहीं, हरियाणा के पंचकूला में 221 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन आकर्षण का केंद्र रहा। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आईपी एक्सटेंशन मैदान पहुंचे, जहां आयोजित रामलीला में उन्होंने भगवान राम की भूमिका निभाने वाले कलाकारों सहित रामलीला के अन्य पात्रों की आरती उतारी। इसके बाद उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाकर रावण दहन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। दशहरे के अवसर पर प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष बना दिया। रामलीला के माध्यम से भगवान राम के आदर्शों, सत्य की शक्ति और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया गया।

दूसरी ओर, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के मैदान में नवश्री धार्मिक लीला कमेटी की ओर से आयोजित दशहरा कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने भी प्रतीकात्मक तीर चलाकर रावण दहन किया। राजधानी में विभिन्न रामलीला समितियों की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कई स्थानों पर रंगारंग प्रस्तुतियों, धार्मिक झांकियों और आतिशबाजी के बीच दशहरे का उत्सव मनाया गया। दिल्ली में इस बार रावण के पुतले के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी जलाया गया, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। इस अनोखे पुतले के जरिए आयोजकों ने सामाजिक संदेश देने की कोशिश की।

हरियाणा के पंचकूला में दशहरा समारोह का मुख्य आकर्षण 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला रहा। इसे देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतलों में शामिल बताया गया। विशाल पुतले के दहन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। पुतले में आग लगते ही मैदान जयकारों और आतिशबाजी से गूंज उठा। आयोजन के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया गया। विशालकाय पुतले ने दशहरा समारोह को यादगार बना दिया।

बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में भी भव्य दशहरा समारोह आयोजित हुआ। यहां 90 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। इस दृश्य को देखने के लिए करीब ढाई लाख लोग गांधी मैदान पहुंचे। मैदान में लोगों की भारी भीड़ के बीच भगवान राम की जय-जयकार गूंजती रही। रावण दहन के साथ ही आसमान आतिशबाजी से रोशन हो उठा। पटना में दशहरा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोगों के सामूहिक उत्साह और सांस्कृतिक परंपरा का बड़ा प्रतीक भी बना।

उत्तर भारत से हिमालय तक दशहरे की रौनक, राजस्थान में मेले तो कुल्लू में देवताओं की भव्य शोभायात्रा

उत्तर प्रदेश में भी दशहरे के अवसर पर विभिन्न शहरों में रामलीला और रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पारंपरिक शोभायात्रा और धार्मिक आयोजन चर्चा में रहे। अलग-अलग स्थानों पर लोगों ने भगवान राम की विजय का उत्सव मनाया और बुराइयों को त्यागने का संकल्प लिया। उत्तर प्रदेश के कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी रामलीला मंचन के बाद रावण के पुतलों का दहन किया गया। बाजारों में त्योहार की रौनक रही और शाम होते ही आयोजन स्थलों पर भीड़ जुटने लगी। पंजाब में भी विजयादशमी के अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। लुधियाना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दशहरा कार्यक्रम में भाग लेकर रावण दहन किया। राज्य के विभिन्न शहरों में रामलीलाओं के समापन और पुतला दहन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों ने परिवार के साथ उत्सव में भाग लिया। पंजाब में दशहरे का उत्सव धार्मिक परंपराओं के साथ सामाजिक मेल-मिलाप का अवसर भी बना।

राजस्थान में दशहरे का रंग अलग ही दिखाई दिया। कोटा का दशहरा मेला अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जाना जाता है। यहां रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के दहन के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लोककलाएं और पारंपरिक आयोजन मेले की रौनक बढ़ाते हैं। इस बार भी विजयादशमी पर कोटा सहित प्रदेश के कई हिस्सों में दशहरा उत्सव मनाया गया। जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रावण दहन कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए समाज में व्याप्त बुराइयों, कुरीतियों और नशे के खिलाफ संकल्प लेने का संदेश दिया। राजस्थान में दशहरा धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति और मेलों की परंपरा से भी जुड़ा रहा।

उत्तराखंड में भी विजयादशमी के अवसर पर रामलीलाओं के समापन और रावण दहन के आयोजन हुए। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, हल्द्वानी और अन्य शहरों में दशहरे को लेकर लोगों में उत्साह रहा। मैदानों और खुले स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में परिवारों ने पहुंचकर रावण दहन देखा। पर्व के माध्यम से सत्य, मर्यादा, धर्म और सदाचार का संदेश दिया गया। पहाड़ी राज्य में दशहरा स्थानीय धार्मिक परंपराओं और सामुदायिक आयोजनों के साथ मनाया जाता है। हालांकि, उत्तराखंड के सभी जिलों में कार्यक्रमों के अलग-अलग स्वरूप और स्थानीय परंपराएं होने के कारण उत्सव की तस्वीर भी विविध रही।

हिमाचल प्रदेश में दशहरे का सबसे विशिष्ट रंग कुल्लू में दिखाई देता है। यहां देश के अन्य हिस्सों की तरह विजयादशमी पर उत्सव समाप्त नहीं होता, बल्कि इसी दिन से विश्व प्रसिद्ध कुल्लू दशहरा शुरू होता है। 

वर्ष 2026 में यह उत्सव 21 से 27 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ की अगुवाई में विभिन्न देवी-देवताओं की सजी हुई पालकियों और रथों के पहुंचने की परंपरा इस आयोजन को खास बनाती है। इस बार भी कुल्लू दशहरा में धार्मिक परंपरा, लोक संस्कृति और पर्यटन का संगम देखने को मिलेगा। हिमाचल के अन्य क्षेत्रों में भी दशहरा धार्मिक आस्था और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुरूप मनाया गया।

जम्मू-कश्मीर में भी दशहरे के अवसर पर धार्मिक स्थलों और रामलीला आयोजनों के आसपास उत्सव का माहौल रहा। जम्मू क्षेत्र में रामलीला और रावण दहन की परंपरा के जरिए लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। वहीं, लद्दाख में दशहरे का स्वरूप स्थानीय सांस्कृतिक विविधता और क्षेत्रीय धार्मिक परंपराओं के बीच अलग दिखाई देता है। दोनों क्षेत्रों में पर्व से जुड़ी गतिविधियां स्थानीय आयोजनों और समुदायों की भागीदारी के अनुसार होती हैं।

देशभर में दशहरे के इन अलग-अलग रंगों के बीच संदेश एक ही रहा। अहंकार, अन्याय और अधर्म का अंत निश्चित है। रावण के पुतले का दहन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद क्रोध, लालच, अहंकार और बुराइयों को समाप्त करने की प्रेरणा भी है। विशाल पुतलों, आतिशबाजी, रामलीलाओं और सांस्कृतिक आयोजनों के बीच विजयादशमी ने एक बार फिर भारतीय परंपराओं की व्यापकता और सामाजिक एकजुटता की झलक पेश की।

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