केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी पेंशन योजनाओं के नाम बदलने के साथ इनके संचालन और सहायता राशि में भी बदलाव किए हैं। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत संचालित वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांगजन पेंशन योजनाओं को अब प्रधानमंत्री के नाम से जाना जाएगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का नाम भी बदल दिया गया है। सरकार ने इस कार्यक्रम को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने के वास्ते कुल ₹53,428 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है। इन बदलावों में सबसे अहम पहलू दिव्यांगजन पेंशन योजना के पात्रता संबंधी नियमों और सहायता राशि से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिव्यांगजन पेंशन के लिए न्यूनतम दिव्यांगता की निर्धारित सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत की गई है। इसके अलावा, पेंशन की पात्रता को जन्म से जोड़ने का प्रावधान भी बताया गया है, जबकि पहले इसके लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष थी। हालांकि, इस प्रावधान के व्यावहारिक क्रियान्वयन और पात्रता की शर्तों को समझने के लिए संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों को देखना जरूरी होगा।
पेंशन सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। इसके तहत 0 से 79 वर्ष आयु वर्ग के पात्र लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता ₹300 से बढ़ाकर ₹375 और 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लाभार्थियों के लिए ₹500 से बढ़ाकर ₹625 किए जाने की बात कही गई है। इन बदलावों का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आने वाले लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बताई गई राशि केंद्र सरकार की सहायता से संबंधित है या इसमें राज्य सरकार का योगदान भी शामिल है, इसकी पुष्टि आधिकारिक दिशा-निर्देशों से की जानी चाहिए। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम लंबे समय से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा के प्रमुख माध्यमों में शामिल रहा है।
इसके तहत वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांगजन पेंशन के साथ जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था की जाती है। योजनाओं के नाम बदलने और अगले पांच वर्षों के लिए बजट मंजूर होने से इनके भविष्य के संचालन को लेकर नई व्यवस्था सामने आई है। सरकार के अनुसार, इस फैसले से देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को फायदा मिलने की संभावना है। कार्यक्रम को जारी रखने के लिए स्वीकृत बजट में विभिन्न योजनाओं के संचालन और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान शामिल है। केंद्र सरकार ने दिव्यांगजन पेंशन में किए गए बदलावों को लागू करने के लिए पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता राशि से संबंधित दिशा-निर्देश तीन महीने के भीतर जारी करने की बात कही है।
योजना के नाम बदलने के फैसले के साथ यह समझना भी जरूरी है कि सभी पेंशन योजनाओं की पात्रता और लाभ एक जैसे नहीं हैं। वृद्धावस्था और विधवा पेंशन योजनाओं के साथ राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना को मौजूदा स्वरूप में जारी रखने की मंजूरी दी गई है। यानी इन योजनाओं के नाम बदलने का फैसला हुआ है, लेकिन इनके तहत मिलने वाले लाभों में दिव्यांगजन पेंशन की तरह बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।
दिव्यांगजन पेंशन के नियम बदले, पात्रता की सीमा 80 से घटाकर 40 प्रतिशत
दिव्यांगजन पेंशन योजना में किए गए बदलावों का उद्देश्य अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। पहले इस योजना के तहत पात्रता के लिए 80 प्रतिशत दिव्यांगता का मानदंड निर्धारित था, जिसे अब घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे निर्धारित मानदंड पूरा करने वाले ऐसे दिव्यांगजन भी पेंशन के दायरे में आ सकेंगे, जो पहले अधिक दिव्यांगता प्रतिशत की शर्त के कारण पात्र नहीं बन पाते थे। हालांकि, लाभ लेने के लिए अन्य निर्धारित शर्तों और जरूरी दस्तावेजों को पूरा करना भी आवश्यक होगा। एक और बड़ा बदलाव न्यूनतम आयु से संबंधित है। अब दिव्यांगजन पेंशन के लिए न्यूनतम आयु की शर्त जन्म से लागू होगी। पहले योजना के तहत न्यूनतम आयु 18 वर्ष थी। नए प्रावधान से पात्रता की अन्य शर्तें पूरी करने वाले जन्म से दिव्यांग बच्चों को भी योजना के दायरे में लाने का रास्ता खुलेगा। इससे उन परिवारों को सहायता मिल सकती है, जिन्हें दिव्यांग बच्चे की देखभाल, उपचार और दैनिक जरूरतों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। हालांकि, वास्तविक लाभ संबंधित दिशा-निर्देश जारी होने और उनके लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। नए प्रावधान के अनुसार, शून्य से 79 वर्ष तक की आयु के पात्र दिव्यांगजन को प्रतिमाह ₹375 दिए जाएंगे। पहले यह राशि ₹300 थी। वहीं, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र लाभार्थियों के लिए सहायता राशि ₹500 से बढ़ाकर ₹625 प्रतिमाह कर दी गई है। इस तरह दोनों आयु वर्गों में 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह बदलाव दिव्यांगजन के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी जरूरतें केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं होतीं। कई लोगों को नियमित उपचार, सहायक उपकरण, आवागमन और दैनिक जीवन की गतिविधियों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में पेंशन की राशि में बढ़ोतरी और पात्रता के दायरे का विस्तार आर्थिक सहायता की पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, पेंशन की इस राशि को लेकर लाभार्थियों को यह ध्यान रखना होगा कि घोषित सहायता केंद्र की योजना के तहत निर्धारित राशि है। राज्यों की ओर से अलग से दी जाने वाली सहायता या अतिरिक्त लाभ के बारे में जानकारी संबंधित राज्य सरकार के नियमों से ही स्पष्ट होगी। इसलिए लाभार्थियों को अपने राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग से लागू व्यवस्था की जानकारी लेनी चाहिए।
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को की गई थी। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और परिवार के कमाने वाले प्रमुख सदस्य की मृत्यु से प्रभावित परिवारों को बुनियादी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के तहत परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर पात्र परिवार को एकमुश्त सहायता देने की व्यवस्था भी शामिल है।
केंद्र सरकार की नई मंजूरी के बाद अब इस कार्यक्रम का संचालन 2030-31 तक जारी रहेगा। नामों में बदलाव के साथ दिव्यांगजन पेंशन के नियमों और सहायता राशि में संशोधन इस फैसले के प्रमुख हिस्से हैं। अगले चरण में नए दिशा-निर्देश जारी होने के बाद पात्रता और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी व्यावहारिक स्थिति स्पष्ट होगी। ऐसे में पेंशन पाने वाले लोगों और नए आवेदन करने की तैयारी कर रहे परिवारों के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक सूचना पर नजर रखना जरूरी होगा।


















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