अगर आपका खाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), यूनियन बैंक या देश के किसी अन्य सरकारी बैंक में है और आपको बैंक शाखा जाकर कोई जरूरी काम निपटाना है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। देशभर के सरकारी और कुछ निजी बैंकों में आज यानी शुक्रवार से लगातार तीन दिन तक कामकाज प्रभावित रहेगा। बैंक कर्मचारियों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर एक दिन की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इसके बाद शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश के चलते बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। ऐसे में ग्राहकों को लगातार तीन दिन तक बैंक की शाखाओं में सामान्य सेवाएं नहीं मिल पाएंगी। बैंक कर्मचारियों की यह हड़ताल लंबे समय से अटकी पांच दिन कामकाज और दो दिन छुट्टी की मांग को लेकर हो रही है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस प्रस्ताव पर दो साल से अधिक समय पहले सहमति बन चुकी है, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाई है। इसी नाराजगी के चलते बैंक यूनियनों ने आंदोलन का रास्ता चुना है। यूनियनों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार और बैंक प्रबंधन ने उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया, तो आने वाले समय में बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है।
बैंक कर्मचारियों की एक दिन की हड़ताल शुक्रवार, 11 सितंबर को प्रस्तावित है। इसके बाद 12 सितंबर को महीने का दूसरा शनिवार है। बैंकिंग व्यवस्था के तहत महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक शाखाओं में अवकाश रहता है। इसके अगले दिन 13 सितंबर को रविवार है। इस तरह शुक्रवार की हड़ताल और शनिवार-रविवार की छुट्टी के कारण बैंक शाखाएं लगातार तीन दिन बंद रहेंगी। ग्राहकों को ध्यान रखना होगा कि बैंक शाखाओं में नकद जमा करने, नकद निकासी, चेक से जुड़े काम, खाता संबंधी आवेदन, ऋण संबंधी जानकारी और अन्य शाखा स्तर की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। जिन लोगों को बैंक में व्यक्तिगत रूप से जाकर काम कराना है, उन्हें इसके लिए अगले कार्यदिवस तक इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, सभी बैंक शाखाओं में सेवाओं का असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। हड़ताल में शामिल कर्मचारियों और बैंक की स्थानीय व्यवस्था के आधार पर सेवाओं में अंतर हो सकता है।
हड़ताल का असर देशभर के सरकारी बैंकों पर पड़ने की संभावना है। भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया समेत कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस आंदोलन के दायरे में आ सकते हैं। इसके अलावा कुछ निजी बैंकों के कर्मचारी भी हड़ताल का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, सभी निजी बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी, ऐसा जरूरी नहीं है। ग्राहकों को अपने बैंक की ओर से जारी सूचना के आधार पर ही शाखा खुलने या बंद रहने की स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। बैंक कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि उनकी मांग केवल छुट्टियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि बैंकिंग क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को भी अन्य कई क्षेत्रों की तरह सप्ताह में पांच दिन काम करने और दो दिन आराम करने की व्यवस्था मिले। उनका तर्क है कि इससे कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिलेगा और काम के दौरान उनकी कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है।
5-डे बैंकिंग पर दो साल से अटकी मंजूरी, अब आर-पार की तैयारी
बैंक यूनियनों की पांच दिन बैंकिंग की मांग कोई नई नहीं है। इस मुद्दे पर लंबे समय से चर्चा चल रही है। UFBU के मुताबिक, 8 मार्च 2024 को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के साथ 12वें द्विपक्षीय समझौते और नौवें संयुक्त नोट पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने पर सहमति बनी थी। इसके तहत बैंक कर्मचारियों को सोमवार से शुक्रवार तक काम करना होगा और शनिवार-रविवार को छुट्टी मिलेगी।
प्रस्ताव के अनुसार, सप्ताह में दो अतिरिक्त छुट्टियों के बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना कामकाज का समय 40 मिनट बढ़ाया जाएगा। यानी कर्मचारियों को प्रतिदिन पहले की तुलना में अधिक समय तक काम करना होगा, ताकि बैंकिंग सेवाओं के कुल कामकाजी घंटों में संतुलन बना रहे। बैंक यूनियनों का कहना है कि इस व्यवस्था से ग्राहकों को भी सप्ताह के पांच कार्यदिवसों में बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
UFBU का दावा है कि IBA ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर केंद्र सरकार के पास भेज दिया था। इसके बावजूद वित्त मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है। यूनियनों का कहना है कि समझौते के बाद इतना लंबा समय बीत जाने के बावजूद निर्णय न होना कर्मचारियों के साथ अन्याय है। इसी वजह से उन्होंने हड़ताल के जरिए सरकार और बैंक प्रबंधन पर दबाव बनाने का फैसला किया है। बैंक यूनियनों ने केवल एक दिन की हड़ताल का ऐलान नहीं किया है, बल्कि आगे की रणनीति भी स्पष्ट कर दी है। UFBU ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और बैंक प्रबंधन ने पांच दिन बैंकिंग की मांग पर जल्द फैसला नहीं लिया, तो 26 अक्टूबर से देशभर के बैंकों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा सकती है।
अनिश्चितकालीन हड़ताल का मतलब है कि बैंक कर्मचारी तब तक काम पर वापस नहीं लौटेंगे, जब तक उनकी मांगों पर समाधान नहीं निकलता। यदि ऐसा होता है, तो बैंक शाखाओं में सामान्य कामकाज लंबे समय तक प्रभावित हो सकता है। इससे नकद लेन-देन, चेक भुगतान, खाता संबंधी कार्य और अन्य शाखा सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका रहेगी। हालांकि, हड़ताल की वास्तविक अवधि और स्वरूप सरकार तथा बैंक यूनियनों के बीच होने वाली बातचीत और आगे के निर्णयों पर निर्भर करेगा।
लगातार तीन दिन बैंक शाखाएं बंद रहने पर ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
लगातार तीन दिन बैंक शाखाएं बंद रहने के कारण ग्राहकों को जरूरी काम पहले से निपटाने की सलाह दी गई है। यदि किसी ग्राहक को नकद राशि जमा करनी है, चेक जमा करना है, बैंक खाते में सुधार कराना है या किसी ऋण संबंधी काम के लिए शाखा जाना है, तो उसे बैंक खुलने के अगले कार्यदिवस तक इंतजार करना पड़ सकता है।हालांकि, बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह बंद नहीं रहेगी। हड़ताल के दौरान डिजिटल सेवाएं उपलब्ध रहने की संभावना है। ग्राहक यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम जैसी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे। इन माध्यमों से पैसे भेजने, खाते का बैलेंस देखने, बिल भुगतान करने और जरूरत के अनुसार नकद निकालने जैसे काम किए जा सकते हैं।
फिर भी ग्राहकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि हड़ताल के दौरान एटीएम में नकदी उपलब्धता, तकनीकी समस्या या किसी अन्य कारण से डिजिटल सेवाओं में भी परेशानी आ सकती है। इसलिए जरूरी भुगतान और नकद जरूरतों के लिए पहले से तैयारी करना बेहतर रहेगा।
बैंक यूनियनों की पांच दिन बैंकिंग की मांग पर अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर हैं। यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो बैंक कर्मचारियों के कामकाज और छुट्टियों की व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है। वहीं, यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो 26 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल बैंकिंग सेवाओं के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।


















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