अगर आप शहर में रहते हैं और आज भी अपने घर के सपने को पूरा करने के लिए किराये के मकान पर निर्भर हैं, तो प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। केंद्र सरकार ने शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए इस योजना को लागू किया है। योजना का उद्देश्य केवल नया घर बनाना ही नहीं, बल्कि पात्र परिवारों को घर खरीदने और जरूरतमंद वर्गों के लिए किफायती किराये के मकान उपलब्ध कराने में भी मदद करना है। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत सरकार ने अगले कुछ वर्षों में शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवारों को आवास सुविधा देने का लक्ष्य रखा है। योजना के लिए कुल 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान किया गया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 2.30 लाख करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य करीब एक करोड़ शहरी परिवारों को आवास सुविधा से जोड़ना है।
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें अलग-अलग जरूरत वाले परिवारों के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं। यानी अगर आपके पास जमीन है लेकिन घर बनाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है, तो आपको निर्माण के लिए सहायता मिल सकती है। वहीं, अगर आपके पास अपनी जमीन नहीं है, तो किफायती आवास परियोजनाओं के जरिए घर उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके अलावा शहरों में रहने वाले प्रवासी कामगारों, औद्योगिक श्रमिकों, कामकाजी महिलाओं और अन्य जरूरतमंद लोगों के लिए किफायती किराये के आवास की व्यवस्था भी योजना का हिस्सा है। योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ब्याज सब्सिडी से जुड़ा है। पात्र परिवारों को घर खरीदने या बनाने के लिए लिए गए आवास ऋण पर ब्याज में राहत दी जाती है। इसके तहत 8 लाख रुपये तक के ऋण पर 4 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी का प्रावधान है। इससे पात्र लाभार्थी को अधिकतम 1.80 लाख रुपये तक का लाभ मिल सकता है। इससे ऐसे परिवारों पर आवास ऋण की मासिक किस्त का बोझ कुछ कम हो सकता है, जो सीमित आय के कारण लंबे समय से अपना घर खरीदने का सपना पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 को चार प्रमुख हिस्सों के जरिए लागू किया जा रहा है। इनमें लाभार्थी आधारित निर्माण, साझेदारी में किफायती आवास, किफायती किराये के आवास और ब्याज सब्सिडी योजना शामिल हैं। इन चारों माध्यमों का उद्देश्य अलग-अलग वर्गों की आवास संबंधी जरूरतों को पूरा करना है। जिन परिवारों के पास अपनी जमीन पहले से मौजूद है, लेकिन पक्का मकान बनाने के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन नहीं हैं, उनके लिए लाभार्थी आधारित निर्माण का विकल्प महत्वपूर्ण है। ऐसे पात्र परिवारों को नया पक्का घर बनाने के लिए सरकारी सहायता दी जा सकती है। केंद्रीय सहायता के तहत 1.50 लाख रुपये तक की मदद का प्रावधान है। हालांकि, वास्तविक सहायता और निर्माण में लाभार्थी का हिस्सा संबंधित नियमों और स्वीकृत परियोजना के अनुसार निर्धारित होता है।
जिन लोगों के पास अपनी जमीन नहीं है, उनके लिए भी योजना में प्रावधान किया गया है। सरकार सार्वजनिक या निजी एजेंसियों के साथ मिलकर किफायती आवास तैयार कर सकती है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पात्र परिवारों के लिए केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसका उद्देश्य ऐसे परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, जो जमीन और आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अपना घर नहीं बना पा रहे हैं। शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी रहते हैं जो रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों में पहुंचते हैं। इनमें प्रवासी श्रमिक, औद्योगिक कामगार, कामकाजी महिलाएं और शहरी गरीब शामिल हैं। इनके लिए किफायती किराये के आवास तैयार करने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को सुरक्षित और अपेक्षाकृत सस्ता आवास उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें महंगे किराये के मकानों पर अपनी आय का बड़ा हिस्सा खर्च न करना पड़े।
किन परिवारों को मिलेगा योजना का लाभ, जानिए आय और मकान से जुड़े जरूरी नियम
PMAY-U 2.0 में लाभार्थियों को उनकी वार्षिक पारिवारिक आय के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस में ऐसे परिवार आते हैं जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपये तक है। वहीं, 3 लाख रुपये से अधिक और 6 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवार निम्न आय वर्ग में आते हैं। 6 लाख रुपये से अधिक और 9 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवार मध्यम आय वर्ग की श्रेणी में शामिल किए जाते हैं। हालांकि, केवल आय सीमा पूरी कर लेना योजना का लाभ पाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए आवेदक को योजना में निर्धारित अन्य पात्रता शर्तों को भी पूरा करना होता है। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम पर देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। परिवार की परिभाषा में पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे शामिल होते हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि परिवार के किसी सदस्य के नाम पर देश के किसी हिस्से में पहले से पक्का मकान दर्ज न हो।
योजना का उद्देश्य उन परिवारों को आवास उपलब्ध कराना है जो वास्तव में अपने पक्के घर से वंचित हैं। इसलिए आवेदन के दौरान आय, परिवार और संपत्ति से संबंधित जानकारी की जांच की जा सकती है। लाभार्थी को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं और योजना के नियमों के अनुसार पात्रता का सत्यापन किया जा सकता है। योजना में ब्याज सब्सिडी का प्रावधान उन परिवारों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकता है जो आवास ऋण लेकर घर खरीदना या बनाना चाहते हैं। 8 लाख रुपये तक के पात्र ऋण पर 4 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी का प्रावधान है और इससे अधिकतम 1.80 लाख रुपये तक का लाभ मिल सकता है। हालांकि, ब्याज सब्सिडी के लिए भी योजना में निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी है और हर आवेदक को स्वतः यह लाभ नहीं मिलता।
PMAY-U 2.0 के तहत मिलने वाली सहायता का स्वरूप इस बात पर निर्भर करता है कि लाभार्थी किस घटक के तहत पात्र है। किसी के पास जमीन है तो उसके लिए निर्माण आधारित सहायता उपयोगी हो सकती है, जबकि जमीन नहीं होने वाले पात्र परिवार किफायती आवास परियोजना का लाभ उठा सकते हैं। इसी तरह आवास ऋण लेने वाले पात्र परिवार ब्याज सब्सिडी के लिए पात्र हो सकते हैं।
ऐसे में अगर आप शहर में किराये के मकान में रह रहे हैं और आपका या आपके परिवार के किसी सदस्य के नाम पर कहीं भी पक्का मकान नहीं है, तो PMAY-U 2.0 के तहत अपनी पात्रता जरूर जांचनी चाहिए। आवेदन करने से पहले आय सीमा, परिवार की स्थिति, जमीन या मकान की स्थिति और ऋण से जुड़े नियमों को ध्यान से समझना जरूरी है। योजना का लाभ मिलने पर सरकार की सहायता आपके अपने पक्के घर के सपने को पूरा करने में महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बन सकती है।


















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