अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद अब मंदिर परिसर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को और बेहतर ढंग से संचालित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के लिए अपने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के नाम का ऐलान कर दिया है। ट्रस्ट ने एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का सीईओ नियुक्त करने का निर्णय लिया है। बुधवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में चयन प्रक्रिया के तहत तैयार किए गए पैनल पर विचार करने के बाद उनके नाम को अंतिम मंजूरी दी गई। राम मंदिर के सीईओ के चयन के लिए इस बार बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। जानकारी के मुताबिक, इस पद के लिए कुल 5,585 लोगों ने आवेदन किया था। इतने बड़े स्तर पर मिले आवेदनों के बाद योग्य उम्मीदवार के चयन के लिए बहुस्तरीय प्रक्रिया अपनाई गई। उम्मीदवारों के आवेदनों और उनकी योग्यता का मूल्यांकन दिल्ली-एनसीआर, पुणे और ओडिशा के संबलपुर में विशेषज्ञों की अलग-अलग टीमों ने किया। इस पूरी प्रक्रिया के बाद योग्य उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार किया गया।
मंगलवार को सर्च कमेटी के सचिव समीर पांड्या ने चयनित उम्मीदवारों का पैनल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपा। इसके अगले दिन यानी बुधवार को ट्रस्ट की बैठक में इस पैनल पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। चर्चा के बाद एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम सहमति बनी और उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त करने का फैसला किया गया। सीईओ की नियुक्ति को राम मंदिर से जुड़ी बढ़ती व्यवस्थाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आने वाले समय में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना को देखते हुए मंदिर से जुड़ी प्रशासनिक, प्रबंधन और समन्वय की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना बड़ी चुनौती है। ऐसे में सीईओ का पद इन व्यवस्थाओं को अधिक पेशेवर और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद कई नामों को लेकर चर्चा थी।
अंतिम चरण में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और एनकाउंटर विशेषज्ञ के तौर पर चर्चित राजेश पांडेय के नाम की भी काफी चर्चा थी। माना जा रहा था कि उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना जा सकता है। हालांकि, ट्रस्ट की बैठक के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया और एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम की घोषणा की गई। इससे साफ हो गया कि सर्च कमेटी द्वारा तैयार पैनल में से अंतिम चयन ट्रस्ट ने अपने स्तर पर विचार करने के बाद किया। सीईओ की नियुक्ति के लिए गठित सर्च कमेटी ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। समिति के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली ने चयन प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की जानकारी देते हुए कहा कि उम्मीदवारों के चयन में योग्यता को प्रमुख आधार बनाया गया। उनका कहना था कि पैनल में शामिल सदस्यों का चयन मेरिट की उत्कृष्टता के आधार पर किया गया है।
सीईओ के चयन की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखा गया
सर्च कमेटी के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली ने कहा कि सीईओ के चयन की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखा गया। उनके मुताबिक, चयन समिति में शामिल सभी सदस्य दूरदर्शी, भरोसेमंद और समर्पित हैं तथा उनमें जिम्मेदारी निभाने और काम करने की पूरी इच्छा है। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों को राम मंदिर और रामलला की सेवा में योगदान देने का अवसर मिला, जिसके लिए वे रामलला और राम मंदिर ट्रस्ट के आभारी हैं। राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से सीईओ के चयन के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का दायरा इस बात से समझा जा सकता है कि हजारों आवेदनों के बीच से योग्य उम्मीदवारों की पहचान की गई। आवेदन मिलने के बाद उम्मीदवारों के अनुभव, क्षमता और योग्यता का विभिन्न स्तरों पर मूल्यांकन किया गया। इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर विशेषज्ञों की टीमों ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इस तरह अंतिम पैनल तैयार होने से पहले उम्मीदवारों को कई स्तरों की जांच और मूल्यांकन से गुजरना पड़ा।
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का चयन ऐसे समय हुआ है जब अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ी गतिविधियां लगातार विस्तार ले रही हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, प्रशासनिक समन्वय, सुविधाओं के प्रबंधन और भविष्य की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता भी बढ़ रही है। सीईओ की जिम्मेदारी इन तमाम व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की होगी।
राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या धार्मिक आस्था के साथ-साथ बड़े तीर्थ केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हुई है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं का लगातार आगमन हो रहा है। मंदिर परिसर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं का विस्तार भी इसी के अनुरूप किया जा रहा है। ऐसे में ट्रस्ट के स्तर पर एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति को प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। सीईओ के पद के लिए 5,585 आवेदन आना भी इस जिम्मेदारी की अहमियत को दर्शाता है। इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों में से योग्य व्यक्ति का चयन आसान प्रक्रिया नहीं थी। यही वजह है कि ट्रस्ट ने चयन के लिए विशेषज्ञों की मदद ली और उम्मीदवारों का बहुस्तरीय मूल्यांकन कराया। दिल्ली-एनसीआर, पुणे और संबलपुर में हुई प्रक्रिया के बाद तैयार पैनल को सर्च कमेटी ने ट्रस्ट के सामने रखा।
अब एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के सामने राम मंदिर से जुड़ी विशाल और लगातार बढ़ती व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से संभालने की चुनौती होगी। सैन्य क्षेत्र में उच्च जिम्मेदारियां निभाने का अनुभव रखने वाले अधिकारी के रूप में उनकी प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व कौशल को इस जिम्मेदारी में उपयोगी माना जा रहा है। हालांकि, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती धार्मिक आस्था से जुड़े इस विशाल संस्थान के प्रबंधन को आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों के साथ संतुलित करने की होगी। राम मंदिर ट्रस्ट का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मंदिर अब केवल निर्माण की परियोजना नहीं रह गया है, बल्कि एक ऐसे बड़े धार्मिक संस्थान के रूप में विकसित हो रहा है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके साथ ही अयोध्या में पर्यटन और तीर्थाटन से जुड़ी गतिविधियों का भी विस्तार हुआ है। ऐसे में मंदिर की व्यवस्थाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।
पहले सीईओ की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को एक नया स्वरूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब इस पद पर नियुक्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की भूमिका पर सबकी नजर रहेगी। आने वाले समय में उनके नेतृत्व में राम मंदिर की व्यवस्थाओं को किस तरह संचालित किया जाता है और श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा। कुल मिलाकर, हजारों आवेदनों के बीच लंबी चयन प्रक्रिया के बाद हुई यह नियुक्ति राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक विस्तार और पेशेवर प्रबंधन की दिशा में एक अहम पड़ाव है।


















Leave a Reply