नई दिल्ली में बुधवार को कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की इस बैठक में पार्टी देश के मौजूदा राजनीतिक हालात पर मंथन करने के साथ-साथ केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति तैयार कर सकती है। बैठक में छात्रों से जुड़े मुद्दे, राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के आरोप, महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावित परिसीमन और आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियां प्रमुख चर्चा के विषय हो सकते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक बुधवार दोपहर तीन बजे नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में होगी। बैठक में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, महासचिव जयराम रमेश, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बैठक को पार्टी की आगे की रणनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
कांग्रेस की कोशिश है कि केंद्र सरकार से जुड़े ऐसे मुद्दों को राजनीतिक रूप से प्रमुखता दी जाए, जिनका सीधा असर युवाओं, छात्रों और आम लोगों पर पड़ता है। छात्रों से जुड़े विभिन्न सवालों के साथ-साथ राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपों को लेकर भी पार्टी सरकार पर निशाना साधने की रणनीति पर विचार कर सकती है। कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार को घेरने के लिए आगे की राजनीतिक और जन आंदोलन संबंधी रणनीति तय कर सकती है। बैठक में देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दलों के बीच समन्वय, संसद में उठाए जाने वाले मुद्दों और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर भी नेताओं के बीच विचार-विमर्श हो सकता है। कांग्रेस ऐसे समय में अपनी रणनीति मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जब अगले वर्ष की शुरुआत में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। इन राज्यों में पार्टी की चुनावी तैयारियों की समीक्षा भी बैठक के एजेंडे में शामिल हो सकती है। कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों के अलावा उत्तराखंड में भी संगठन को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा। बैठक में राज्यों की राजनीतिक स्थिति, संगठन की तैयारियों और चुनावी मुद्दों पर चर्चा के साथ नेताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।
कांग्रेस कार्य समिति की बैठक ऐसे समय हो रही है, जब महिला आरक्षण को लागू करने के लिए संभावित परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से विपक्षी दलों से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने से संबंधित परिसीमन विधेयक का समर्थन करने की अपील भी चर्चा में है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार आने वाले समय में इस विषय पर संविधान संशोधन विधेयक ला सकती है। हालांकि, मानसून सत्र में सरकार इस संबंध में प्रस्तावित विधेयक पेश नहीं कर सकी। अब कांग्रेस की कार्य समिति में इस मुद्दे पर पार्टी का रुख तय करने और सरकार की संभावित पहल का राजनीतिक जवाब तैयार करने पर चर्चा हो सकती है।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर कांग्रेस का रुख क्या होगा?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश पहले ही संकेत दे चुके हैं कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन से जुड़ी संभावित पहल पर पार्टी कार्य समिति की बैठक में विचार करेगी। उन्होंने पिछले सप्ताह कहा था कि 19 अगस्त को होने वाली सीडब्ल्यूसी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। महिला आरक्षण का मुद्दा कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इस वर्ष अप्रैल में हुई कार्य समिति की बैठक के बाद पार्टी ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण कानून के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया था। कांग्रेस ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए इसके गंभीर परिणाम होने की आशंका जताई थी। पार्टी का तर्क रहा है कि परिसीमन की प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है, इसका असर राज्यों के प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है। ऐसे में कांग्रेस सरकार की किसी भी संभावित पहल को केवल महिला आरक्षण के नजरिए से नहीं, बल्कि व्यापक संवैधानिक और राजनीतिक प्रभावों के संदर्भ में देखने की तैयारी कर रही है।
कार्य समिति की बैठक में इस बात पर भी विचार हो सकता है कि कांग्रेस महिला आरक्षण के समर्थन के अपने मूल रुख को बनाए रखते हुए परिसीमन के प्रस्तावित स्वरूप का किस तरह विरोध करे। पार्टी इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर किस तरीके से उठाएगी, इसकी रणनीति भी तैयार की जा सकती है। इसके अलावा छात्रों से जुड़े मुद्दे भी कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण एजेंडे का हिस्सा हो सकते हैं। युवाओं और विद्यार्थियों से जुड़े सवालों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर चर्चा की संभावना है। कांग्रेस आने वाले समय में इन मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ अपना अभियान और तेज कर सकती है।राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपों को लेकर भी पार्टी की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। कांग्रेस इस मामले को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला तेज करने की कोशिश कर सकती है। हालांकि मंदिर से जुड़े किसी भी आरोप के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर पार्टी की रणनीति और शब्दावली बैठक में तय होना महत्वपूर्ण होगा।
कुल मिलाकर, कांग्रेस कार्य समिति की यह बैठक केवल तत्काल राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहने वाली है। इसमें आने वाले महीनों के लिए पार्टी की व्यापक राजनीतिक दिशा तय करने पर भी मंथन हो सकता है। एक ओर कांग्रेस केंद्र सरकार को छात्रों, महिला आरक्षण और अन्य मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर आगामी विधानसभा चुनावों के लिए संगठन को मजबूत करने की चुनौती भी उसके सामने है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में संभावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व राज्यों की तैयारियों का जायजा ले सकता है। ऐसे में सीडब्ल्यूसी की बैठक से निकलने वाले फैसले कांग्रेस के आगामी राजनीतिक अभियान की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

















Leave a Reply