‘वंदे मातरम्’ पर सियासी जंग, अमित शाह के आरोपों पर कांग्रेस ने इतिहास का हवाला देकर किया पलटवार

‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी जुबानी जंग में बदल गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने का आरोप लगाते हुए माफी की मांग की है। इसके जवाब में कांग्रेस ने शाह पर पलटवार करते हुए कहा कि माफी की मांग के जरिए देश के वास्तविक मुद्दों और सरकार की कथित नाकामियों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के इतिहास, विचारधारा और राष्ट्रवाद की समझ पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इससे राष्ट्रीय गीत से जुड़ा पुराना ऐतिहासिक विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। अमित शाह ने रविवार को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम्’ के गायन को बीच में रुकवाने का इशारा किया। शाह ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हजारों देशवासियों ने ‘वंदे मातरम्’ गाने के लिए अंग्रेजों की लाठियां खाईं, गोलियां झेलीं और जेल गए। ऐसे में राष्ट्रीय गीत का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अमित शाह ने कांग्रेस और सोनिया गांधी से इस कथित घटना को लेकर देश की जनता से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने यहां तक कहा कि कांग्रेस को ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय से भी माफी मांगनी चाहिए। शाह के इस बयान के बाद कांग्रेस ने मोर्चा संभालते हुए भाजपा और गृह मंत्री पर पलटवार शुरू कर दिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अमित शाह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से माफी की मांग वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है। रमेश ने आरोप लगाया कि अमित शाह और उनके ‘साहब’ की बड़ी नाकामियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ‘वंदे मातरम्’ को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

जयराम रमेश ने अपने बयान में अमित शाह पर डॉ. भीमराव आंबेडकर का अपमान करने का आरोप भी लगाया। इसके साथ ही उन्होंने उस विचारधारा पर निशाना साधा, जिससे भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जुड़े हुए हैं। रमेश ने दावा किया कि इसी विचारधारा से जुड़े संगठन ने जनवरी 2002 तक अपने मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया था। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया और इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री की भूमिका पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी अमित शाह के बयान का जवाब दिया। 

उन्होंने कहा कि जिस ‘वंदे मातरम्’ को लेकर आज कांग्रेस से सवाल पूछे जा रहे हैं, उसी गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में संघर्ष और देशभक्ति की भावना को मजबूत किया था। खेड़ा ने कहा कि जब ‘वंदे मातरम्’ का नारा लगाने वालों पर अंग्रेजी शासन की ओर से लाठियां बरसाई जाती थीं, तब कांग्रेस ने इसी गीत को आजादी की लड़ाई के साथ जोड़ा था। पवन खेड़ा ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतिहास को अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करने के बजाय पूरे संदर्भ को सामने रखा जाना चाहिए।

कांग्रेस ने जयराम रमेश के राज्यसभा भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया

विवाद के बीच कांग्रेस नेताओं ने जयराम रमेश के 10 दिसंबर 2025 के राज्यसभा भाषण का वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया। यह भाषण ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई चर्चा के दौरान दिया गया था। इस भाषण में रमेश ने भाजपा पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया था। रमेश ने उस समय ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सुभाष चंद्र बोस, रवींद्रनाथ टैगोर, राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल समेत कई प्रमुख नेताओं के बीच हुई चर्चाओं और पत्राचार का उल्लेख किया था। उन्होंने बताया था कि 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर प्रस्ताव पारित किया था। रमेश के अनुसार, रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद गीत के पहले दो छंदों को अपनाया गया, जिन्हें बाद में राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया।

कांग्रेस का तर्क है कि ‘वंदे मातरम्’ को लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भी व्यापक चर्चा हुई थी। गीत की भाषा, भाव और उसके कुछ संदर्भों को लेकर उस समय के नेताओं ने विचार-विमर्श किया था। कांग्रेस के अनुसार, इसी प्रक्रिया के बाद इसके शुरुआती दो छंदों को स्वीकार किया गया। वहीं भाजपा इस पूरे मामले को राष्ट्रगौरव और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से जोड़ रही है। अमित शाह का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ उन हजारों लोगों के संघर्ष का प्रतीक है, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाते हुए अपना जीवन तक दांव पर लगा दिया था। इसलिए इससे जुड़े किसी भी कथित अपमान को सामान्य घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

अब इस विवाद का दायरा केवल कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों दल इस मुद्दे के जरिए अपने-अपने ऐतिहासिक और राजनीतिक तर्क जनता के सामने रख रहे हैं। भाजपा कांग्रेस से माफी की मांग पर अड़ी है, जबकि कांग्रेस भाजपा पर इतिहास को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगा रही है। ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों से जुड़ा गीत है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक विवाद ने इसके इतिहास और सार्वजनिक इस्तेमाल को फिर से बहस में ला दिया है। आने वाले दिनों में दोनों दल इस मुद्दे को और धार दे सकते हैं। फिलहाल अमित शाह की माफी की मांग के बाद कांग्रेस के पलटवार ने साफ कर दिया है कि ‘वंदे मातरम्’ का यह विवाद जल्द थमने वाला नहीं है।

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