हिमाचल प्रदेश में खेल और शिक्षा को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए शिक्षा विभाग ने जुब्बल स्थित स्पोर्ट्स हॉस्टल को प्रदेश के पहले स्पोर्ट्स स्कूल के रूप में विकसित कर दिया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शुक्रवार को इस महत्वाकांक्षी संस्थान का उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश की प्रतिभाशाली छात्राओं को ऐसी व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जहां उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ उच्चस्तरीय खेल प्रशिक्षण भी एक ही परिसर में मिल सके। पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल के नाम पर संचालित इस संस्थान में अब छात्राओं को आधुनिक खेल सुविधाओं, अनुभवी प्रशिक्षकों और बेहतर शैक्षणिक माहौल का लाभ मिलेगा। अब तक यहां केवल स्पोर्ट्स हॉस्टल संचालित किया जा रहा था, लेकिन सुविधाओं की कमी और सीमित दायरे के कारण खिलाड़ियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। नए स्वरूप में इसे पूर्ण स्पोर्ट्स स्कूल के रूप में विकसित किया गया है, जिससे प्रदेश की उभरती खेल प्रतिभाओं को नया मंच मिलेगा।
स्पोर्ट्स स्कूल में कक्षा छह से बारहवीं तक की कुल 180 छात्राओं को प्रवेश दिया जाएगा। इनमें से 130 छात्राएं आवासीय व्यवस्था के तहत हॉस्टल में रहेंगी, जबकि जुब्बल और आसपास के क्षेत्रों की 50 छात्राएं डे-स्कॉलर के रूप में शिक्षा प्राप्त करेंगी। प्रदेशभर से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के चयन के लिए पहले ही ट्रायल आयोजित किए जा चुके हैं और चयनित छात्राओं को अब व्यवस्थित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह संस्थान केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां खेलों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए विशेषज्ञों की निगरानी में नियमित प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। स्कूल में वॉलीबॉल, कबड्डी, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, ताइक्वांडो, जूडो, टेबल टेनिस और शतरंज सहित आठ खेलों की विशेष प्रशिक्षण व्यवस्था की गई है। इन खेलों के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि छात्राएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार हो सकें।
राज्य सरकार का मानना है कि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में अनेक ऐसी प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्हें उचित अवसर और संसाधन नहीं मिल पाते। स्पोर्ट्स स्कूल की स्थापना से ऐसी छात्राओं को न केवल बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रदेश से बाहर भी नहीं जाना पड़ेगा। इससे खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ राज्य का प्रदर्शन भी बेहतर होने की उम्मीद है।
बेटियों को एक ही छत के नीचे मिलेगी पढ़ाई और प्रशिक्षण
हिमाचल प्रदेश स्कूल स्पोर्ट्स एसोसिएशन के महासचिव संतोष चौहान के अनुसार, इस स्पोर्ट्स स्कूल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि छात्राओं को शिक्षा और खेल प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग संस्थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्हें पढ़ाई, अभ्यास और प्रतियोगिताओं की तैयारी की सभी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। इससे उनका समय बचेगा और वे खेल पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगी। उनका मानना है कि यह मॉडल भविष्य में प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।
स्पोर्ट्स स्कूल में चयनित छात्राओं को पूरी तरह निःशुल्क सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। बोर्डिंग और लॉजिंग की व्यवस्था सरकार की ओर से की जाएगी। प्रत्येक खिलाड़ी के भोजन पर प्रतिदिन 240 रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि पिछले वर्ष तक यह राशि 120 रुपये प्रतिदिन थी। इसके अलावा छात्राओं को खेल किट, जूते और आवश्यक खेल उपकरण भी मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की प्रतिभाशाली बेटियों को भी समान अवसर प्रदान करना है, ताकि संसाधनों की कमी उनकी प्रगति में बाधा न बन सके।
हिमाचल प्रदेश का प्रदर्शन हाल के वर्षों में स्कूल खेल प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर हुआ है। पिछले वर्ष राज्य के खिलाड़ियों ने स्कूल गेम्स में रिकॉर्ड 48 पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया था। वहीं बीते एक वर्ष के दौरान 22 विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि जुब्बल स्पोर्ट्स स्कूल जैसे संस्थानों की स्थापना से प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को और अधिक अवसर मिलेंगे तथा आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल का प्रदर्शन और मजबूत होगा। सरकार को उम्मीद है कि यह संस्थान भविष्य के कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

















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