कैबिनेट विस्तार से पहले दिल्ली में जुटे हिमाचल के नेता, मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चाओं ने पकड़ा जोर

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले हलचल चरम पर पहुंच गई है। राज्य में लंबे समय से लंबित कैबिनेट विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में पार्टी हाईकमान से लगातार मुलाकातों ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकती है। इसके साथ ही कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव और एक मंत्री को कैबिनेट से बाहर किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में हिमाचल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। डिप्टी मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के बाद स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल का दिल्ली पहुंचकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात करना राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

इन बैठकों ने यह संकेत दिया है कि पार्टी नेतृत्व हिमाचल में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बदलाव को लेकर गंभीर मंथन कर रहा है। खासतौर पर धनीराम शांडिल को लेकर यह चर्चा तेज है कि उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि यदि ऐसा होता है तो उनके बेटे को किसी बोर्ड या निगम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश की जा सकती है। इसी बीच कांग्रेस ने 16 और 17 जुलाई को धर्मशाला में पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (पीएसी) की बैठक बुला ली है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इसी बैठक में कैबिनेट विस्तार, संभावित फेरबदल और मंत्रियों के विभागों में बदलाव को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व विधानसभा के मानसून सत्र से पहले सरकार और संगठन को लेकर स्पष्ट रणनीति तैयार करना चाहता है ताकि विपक्ष को किसी भी मुद्दे पर हमला करने का मौका न मिले। 

संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री समेत कुल 12 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित 11 सदस्यीय मंत्रिमंडल कार्यरत है और एक मंत्री पद अभी भी खाली है। लंबे समय से इस खाली पद को भरने की चर्चा चल रही है। राजनीतिक हलकों में कुल्लू सदर से विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि वर्तमान मंत्रिमंडल में कुल्लू जिले का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी सार्वजनिक मंचों से संकेत दे चुके हैं कि सुंदर सिंह ठाकुर को जल्द मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। ऐसे में उनका मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक चर्चाएं केवल एक मंत्री बनाने तक सीमित नहीं हैं। राज्य में दो नए मंत्रियों को शामिल किए जाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। लेकिन यह तभी संभव होगा, जब मौजूदा मंत्रिमंडल से किसी मंत्री को हटाया जाए। यदि ऐसा होता है तो कई विधायकों की राजनीतिक किस्मत चमक सकती है।

मंत्री पद की दौड़ में कई दावेदार, राजनीतिक संतुलन साधने की चुनौती

यदि मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है और किसी मंत्री को बाहर का रास्ता दिखाया जाता है, तो नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। इस दौड़ में तीन नाम सबसे प्रमुख बताए जा रहे हैं। इनमें ज्वालाजी से विधायक संजय रत्न, पालमपुर से विधायक आशीष बुटेल और अर्की से विधायक संजय अवस्थी शामिल हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन तीनों नेताओं में से किसी एक को मंत्री बनने का अवसर मिल सकता है, लेकिन यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि कैबिनेट में कोई स्थान खाली होता है या नहीं। कुछ समय पहले तक संजय रत्न को सुंदर सिंह ठाकुर के बाद सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। दो बार विधायक चुने जा चुके संजय रत्न संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। लेकिन हाल में हुए नगर निगम चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस को राज्य के चार नगर निगमों में निराशाजनक प्रदर्शन का सामना करना पड़ा, जबकि पालमपुर नगर निगम में पार्टी ने जीत दर्ज की। इस जीत का बड़ा श्रेय स्थानीय विधायक आशीष बुटेल को दिया जा रहा है। यही कारण है कि अब उनकी दावेदारी पहले की तुलना में अधिक मजबूत मानी जा रही है।

डिप्टी मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के दौरान आशीष बुटेल के पक्ष में अपनी राय रखी है। यदि पार्टी प्रदर्शन और राजनीतिक संदेश को प्राथमिकता देती है तो बुटेल का नाम कैबिनेट विस्तार में प्रमुखता से सामने आ सकता है।वहीं अर्की से विधायक संजय अवस्थी भी संभावित दावेदारों की सूची में शामिल हैं। उन्हें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का करीबी माना जाता है और संगठन में भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्रीय संतुलन की है। वर्तमान मंत्रिमंडल में शिमला संसदीय क्षेत्र से पहले ही पांच मंत्री शामिल हैं। ऐसे में उसी क्षेत्र से एक और मंत्री बनाए जाने की संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है। पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए ही अंतिम फैसला लेना चाहेगा।

दूसरी ओर स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल को लेकर चल रही चर्चाओं ने भी राजनीतिक हलकों का तापमान बढ़ा दिया है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक किसी भी मंत्री को हटाने या फेरबदल की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन लगातार हो रही दिल्ली बैठकों और नेताओं की सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पर्दे के पीछे व्यापक राजनीतिक मंथन जारी है। अब सभी की नजर 16 और 17 जुलाई को धर्मशाला में होने वाली कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि इसी बैठक के बाद हिमाचल प्रदेश में कैबिनेट विस्तार, संभावित फेरबदल और नए मंत्रियों के नामों को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। यदि पार्टी हाईकमान की सहमति मिलती है तो विधानसभा के मानसून सत्र से पहले ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।

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