देश की राजधानी नई दिल्ली में अब किसी भी मुद्दे को लेकर धरना, रैली या विरोध प्रदर्शन आयोजित करना पहले की तरह आसान नहीं होगा। दिल्ली पुलिस ने राजधानी में प्रदर्शन और सभाओं को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं। खास तौर पर जंतर-मंतर पर धरना या प्रदर्शन करने वाले आयोजकों को कार्यक्रम से पहले पुलिस की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि तय नियमों का पालन किए बिना किसी भी प्रदर्शन या सभा की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने राजधानी में धरना-प्रदर्शन के लिए लागू नियमों को स्पष्ट करते हुए आयोजकों के लिए अनुमति की प्रक्रिया और प्रदर्शन स्थल से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर समेत राजधानी में निर्धारित स्थानों पर किसी भी तरह की सभा, रैली, धरना या विरोध प्रदर्शन करने से पहले सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना जरूरी होगा। पुलिस का कहना है कि यह व्यवस्था सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और यातायात को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है। इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और दिल्ली पुलिस के संबंधित स्थायी आदेशों का भी हवाला दिया गया है। नए नियमों के तहत यदि कोई संगठन, राजनीतिक दल, सामाजिक संस्था या व्यक्ति जंतर-मंतर पर धरना या प्रदर्शन करना चाहता है तो उसे प्रस्तावित कार्यक्रम से कम से कम 10 दिन पहले नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त के समक्ष आवेदन करना होगा। आवेदन में कार्यक्रम से संबंधित आवश्यक जानकारी देनी होगी। पुलिस की ओर से अनुमति मिलने के बाद ही निर्धारित स्थान पर प्रदर्शन किया जा सकेगा।
इसका मतलब साफ है कि अब आयोजक अचानक किसी मुद्दे पर बड़ी संख्या में लोगों को जुटाकर जंतर-मंतर या किसी दूसरे निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर कार्यक्रम नहीं कर सकेंगे। पहले से अनुमति लेना जरूरी होगा और पुलिस कार्यक्रम की प्रकृति, संभावित भीड़ तथा सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए फैसला करेगी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की संख्या के आधार पर अलग-अलग स्थान भी निर्धारित किए हैं। इसका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और बड़े आयोजनों के दौरान राजधानी की सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाना है। पुलिस ने छोटे, मध्यम और बड़े स्तर के प्रदर्शनों के लिए अलग-अलग स्थान तय किए हैं।
एक हजार तक लोगों की मौजूदगी वाले प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर को निर्धारित किया गया है। यानी छोटे स्तर के धरना-प्रदर्शन यहां किए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए भी आयोजकों को पहले से पुलिस की अनुमति हासिल करनी होगी। अनुमति के बिना जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की छूट नहीं होगी। वहीं, यदि किसी प्रदर्शन में एक हजार से लेकर 50 हजार तक लोगों के शामिल होने की संभावना है तो ऐसे आयोजनों के लिए रामलीला मैदान निर्धारित किया गया है। इसका मकसद जंतर-मंतर जैसे सीमित क्षेत्र में बड़ी भीड़ जमा होने से पैदा होने वाली सुरक्षा और यातायात संबंधी परेशानियों को रोकना है।इसी तरह यदि किसी प्रदर्शन या रैली में 50 हजार से ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है तो उसके लिए बुराड़ी स्थित निर्धारित मैदान का इस्तेमाल करना होगा। इस तरह दिल्ली पुलिस ने संभावित भीड़ के आकार के आधार पर प्रदर्शन स्थलों का विभाजन किया है।
दिल्ली के सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक
दिल्ली पुलिस ने राजधानी के कुछ बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील इलाकों में किसी भी तरह के धरने, प्रदर्शन या सभा पर पूरी तरह रोक बरकरार रखी है। इनमें सेंट्रल विस्टा से जुड़े प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इंडिया गेट, सी-हेक्सागोन, मानसिंह रोड, जनपथ और कर्तव्य पथ समेत इनसे जुड़े लॉन में किसी भी तरह का प्रदर्शन या धरना आयोजित नहीं किया जा सकेगा। पुलिस के अनुसार इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यातायात और आम लोगों की आवाजाही पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि इन स्थानों को प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित रखा गया है। आयोजकों को कार्यक्रम की योजना बनाते समय इन प्रतिबंधित क्षेत्रों से दूर रहना होगा। दिल्ली पुलिस ने यह भी साफ किया है कि निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है। यानी बिना अनुमति प्रदर्शन आयोजित करना या प्रतिबंधित क्षेत्र में भीड़ जुटाना आयोजकों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।
दरअसल, राजधानी दिल्ली में अक्सर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समूहों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जाते हैं। कई बार इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, जिससे आसपास के इलाकों में यातायात बाधित होता है और सुरक्षा एजेंसियों के सामने भी चुनौती पैदा होती है। ऐसे में पुलिस ने प्रदर्शन की जगह और भीड़ की सीमा को लेकर व्यवस्था को स्पष्ट किया है। जंतर-मंतर लंबे समय से देश में राजनीतिक और सामाजिक विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। अलग-अलग राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से यहां धरने और प्रदर्शन किए जाते रहे हैं। लेकिन अब यहां प्रदर्शन करने के लिए भी पहले से अनुमति लेना जरूरी होगा। प्रस्तावित कार्यक्रम से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन करने की शर्त के कारण आयोजकों को अपनी रणनीति और कार्यक्रम की योजना पहले से तैयार करनी होगी।
वर्तमान राजनीतिक माहौल में दिल्ली पुलिस के ये निर्देश खास महत्व रखते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों के प्रस्तावित प्रदर्शन के बीच इन नियमों की चर्चा और बढ़ गई है। पुलिस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि किसी भी संगठन या व्यक्ति को प्रदर्शन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
यानी अब दिल्ली में विरोध की आवाज उठाने के लिए सिर्फ मुद्दा और भीड़ जुटाना पर्याप्त नहीं होगा। आयोजकों को पहले अनुमति लेनी होगी, प्रदर्शन के लिए सही स्थान चुनना होगा और संभावित भीड़ के मुताबिक निर्धारित मैदान का इस्तेमाल करना होगा। साथ ही प्रतिबंधित इलाकों में किसी भी तरह का जमावड़ा नहीं किया जा सकेगा। नियम तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।


















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