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वोटर लिस्ट से नाम कटने पर घबराएं नहीं, एसआईआर के बाद भी मिलेगा नाम जुड़वाने का मौका : चुनाव आयोग 

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से नाम कटने के बाद परेशान लोगों के लिए चुनाव आयोग ने बड़ी राहत दी है। यदि किसी मतदाता का नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है, तो वह अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकता है। चुनाव आयोग ने तीन नवंबर 2026 को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पहले से मतदाता के रूप में पंजीकृत रहे ऐसे लोगों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 भरने की सुविधा मिलेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि पुराने मतदाताओं को फॉर्म-6 भरने के कारण झूठी घोषणा के मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा, बशर्ते वे निर्धारित शर्तों के अनुसार सही जानकारी देकर आवेदन करें। दरअसल, एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची से बाहर होने का मामला सामने आया है। इसके पीछे मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो पाना, गणना प्रपत्र जमा नहीं होना, पते में बदलाव, दस्तावेजों की कमी और अन्य प्रशासनिक कारण हो सकते हैं। ऐसे में उन लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि जिनका नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन अब प्रारूप सूची में नहीं है, वे अपना नाम वापस जुड़वाने के लिए किस प्रक्रिया का सहारा लें।

इस दौरान फॉर्म-6 को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। सामान्य तौर पर फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए किया जाता है। ऐसे में पुराने मतदाताओं को आशंका थी कि यदि वे इस फॉर्म के माध्यम से दोबारा पंजीकरण का आवेदन करते हैं तो इसे पहली बार मतदाता बनने की घोषणा माना जा सकता है। इससे उनके खिलाफ गलत जानकारी देने या झूठी घोषणा करने के आरोप में कार्रवाई होने का डर था। चुनाव आयोग ने इस आशंका को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि पात्र पुराने मतदाता भी इस प्रक्रिया के माध्यम से अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपनी पात्रता और जरूरी जानकारियों का सही विवरण देना होगा।

चुनाव आयोग के इस स्पष्टीकरण से उन मतदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनका नाम एसआईआर के दौरान तैयार की गई प्रारूप मतदाता सूची में नहीं है। खासतौर पर ऐसे लोग, जो वर्षों से मतदान करते आ रहे हैं, लेकिन किसी कारणवश इस बार सूची में अपना नाम नहीं देख पा रहे हैं, वे अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकेंगे। हालांकि, केवल आवेदन कर देने से नाम अपने आप मतदाता सूची में शामिल नहीं होगा। इसके लिए निर्वाचन अधिकारियों की ओर से निर्धारित जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

मतदाता अपना आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए भारत निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा मोबाइल फोन में वोटर हेल्पलाइन ऐप के माध्यम से भी आवेदन करने की सुविधा उपलब्ध है। आवेदन करते समय नाम, जन्मतिथि, पता और अन्य जरूरी जानकारियां सावधानी से भरनी होंगी। किसी भी प्रकार की गलत जानकारी देने से आवेदन के सत्यापन में परेशानी हो सकती है।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से भर सकेंगे फॉर्म-6, आवेदन के बाद होगा सत्यापन

ऑनलाइन आवेदन करने के लिए सबसे पहले भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल पर जाना होगा। वहां मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण कर लॉगिन करना होगा। इसके बाद नए मतदाता पंजीकरण से संबंधित फॉर्म-6 का विकल्प चुनना होगा। फॉर्म खुलने के बाद उसमें मांगी गई सभी जानकारियां निर्धारित स्थान पर भरनी होंगी। इसमें आवेदक का पूरा नाम, जन्मतिथि, वर्तमान निवास का पता और अन्य जरूरी विवरण शामिल होंगे। आवेदन के दौरान पहचान और निवास से संबंधित जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध कराने होंगे। पहचान के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड, पैन कार्ड अथवा अन्य स्वीकार्य दस्तावेज दिए जा सकते हैं। इसी तरह पते के प्रमाण के लिए बिजली का बिल, किरायानामा अथवा निर्वाचन आयोग की ओर से स्वीकार किए जाने वाले अन्य दस्तावेज लगाए जा सकते हैं। दस्तावेज अपलोड करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उनमें दर्ज नाम और अन्य जानकारियां आवेदन में भरे गए विवरण से मेल खाती हों।

यदि किसी मतदाता के पास वर्ष 2003 की मतदाता सूची का रिकॉर्ड या पुराना संदर्भ उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित जानकारी के संबंध में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। जहां लागू हो, वहां संबंधित कॉलम में उपलब्ध विकल्प के अनुसार जानकारी दर्ज की जा सकती है। फॉर्म पूरा भरने के बाद एक बार सभी विवरणों की जांच कर उसे जमा करना होगा। आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने पर एक पावती रसीद और संदर्भ संख्या मिलेगी। इस संख्या को सुरक्षित रखना जरूरी है, क्योंकि इसी के माध्यम से आगे आवेदन की स्थिति देखी जा सकेगी। जो मतदाता इंटरनेट या मोबाइल के माध्यम से आवेदन नहीं करना चाहते, उनके लिए ऑफलाइन व्यवस्था भी उपलब्ध है। ऐसे लोग अपने क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ), सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के कार्यालय से फॉर्म-6 प्राप्त कर सकते हैं। फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियां भरने के बाद जरूरी दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न करनी होंगी। इसके बाद आवेदन संबंधित अधिकारी के कार्यालय में जमा किया जा सकता है। मतदाता अपना आवेदन क्षेत्र के बीएलओ को भी सौंप सकते हैं अथवा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार डाक से भेज सकते हैं।

हालांकि, एक बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि यदि किसी मतदाता ने ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म-6 भरकर जमा कर दिया है, तो उसी आवेदन के लिए दोबारा ऑफलाइन फॉर्म जमा करने की जरूरत नहीं है। इससे आवेदन की प्रक्रिया में अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है। किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए चुनाव आयोग की मतदाता हेल्पलाइन 1950 पर संपर्क किया जा सकता है। फॉर्म-6 जमा होने के बाद निर्वाचन विभाग की ओर से आवेदन में दी गई जानकारियों और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बूथ लेवल अधिकारी आवेदक के घर पहुंचकर उसके निवास और अन्य जानकारियों की भौतिक जांच भी कर सकते हैं। इस दौरान आवेदक से अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। इसलिए आवेदन करते समय सही मोबाइल नंबर और वर्तमान निवास का पूरा पता देना जरूरी है।

मतदाता अपने आवेदन की स्थिति मतदाता सेवा पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन ऐप पर संदर्भ संख्या के माध्यम से देख सकते हैं। सत्यापन पूरा होने और आवेदन स्वीकार किए जाने के बाद पात्र मतदाता का नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।

चुनाव आयोग के इस स्पष्टीकरण का सबसे अहम पहलू यह है कि एसआईआर के दौरान प्रारूप सूची से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति हमेशा के लिए मतदान के अधिकार से वंचित हो गया है। पात्र मतदाता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। ऐसे में जिन लोगों के नाम प्रारूप सूची में नहीं हैं, उन्हें घबराने के बजाय समयसीमा के भीतर आवेदन करना चाहिए और अपने दस्तावेजों के साथ आवेदन की स्थिति पर भी नजर रखनी चाहिए।

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