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भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी को घेरा, अराजकता और अव्यवस्था की राजनीति करने का लगाया आरोप

देश की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को निशाने पर लिया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया से लेकर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव तक ने राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को राजनीतिक रूप से घेरने के बजाय देश में अराजकता, अस्थिरता और अव्यवस्था का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा ने विपक्ष की गतिविधियों को सत्ता परिवर्तन की ऐसी राजनीति से जोड़कर देखा है, जिसे वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार को अस्थिर करने की कोशिश बता रही है। मंगलवार को भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का मौजूदा राजनीतिक रवैया केवल सरकार का विरोध करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे देश में अस्थिरता पैदा करने की रणनीति भी दिखाई दे रही है। 

भाटिया ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध करना और अपनी बात रखना हर राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की आड़ में अराजकता फैलाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने विपक्ष की ओर से कथित तौर पर सत्ता परिवर्तन की बात उठाए जाने पर भी सवाल खड़े किए। भाटिया के मुताबिक, सत्ता परिवर्तन का रास्ता चुनाव और संवैधानिक प्रक्रिया से होकर गुजरता है, न कि सड़कों पर ऐसे आंदोलन खड़े करके जिनसे देश की व्यवस्था प्रभावित हो। उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक विरोध को इस स्तर तक ले जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं और देश की स्थिरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कुछ कथित घटनाक्रम और विदेशी संगठनों की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ बाहरी संस्थाएं भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को प्रभावित करने और उन्हें व्यापक राजनीतिक स्वरूप देने में भूमिका निभा रही हैं। भाटिया ने कुछ संगठनों और प्रदर्शनकारियों के कथित संपर्कों का हवाला देते हुए कांग्रेस से जवाब मांगा। हालांकि, इन आरोपों को लेकर स्वतंत्र रूप से किसी निर्णायक निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है। 

भाजपा ने इस पूरे विवाद को केवल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मतभेद का मामला नहीं बताया, बल्कि इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और देश की राजनीतिक स्थिरता से जोड़ने की कोशिश की है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष को सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए, जिनसे आम लोगों, कारोबार और प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़े। इससे पहले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा भी राहुल गांधी पर इसी तरह के आरोप लगा चुके हैं। एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की रैली से पहले नड्डा ने कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा था कि भारत कोई ऐसा देश नहीं है, जहां आगजनी, दंगे और सत्ता परिवर्तन की कोशिशों को मनमाने तरीके से अंजाम दिया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की राजनीति झूठ और अफवाह फैलाने, सड़कों पर अव्यवस्था पैदा करने, देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों पर आधारित है। 

नड्डा ने विपक्ष की कथित राजनीतिक रणनीति को चार चरणों में बांटते हुए आरोप लगाया था कि पहले लोगों के बीच भ्रम और गलत सूचनाएं फैलाई जाती हैं, फिर सड़कों पर विरोध प्रदर्शनों के जरिए अव्यवस्था पैदा की जाती है। इसके बाद आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करने और अंत में विदेशी ताकतों के कथित सहयोग से चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने विपक्ष की रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को भी इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया था। नड्डा ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर दिल्ली में अशांति फैलाने, कारोबार प्रभावित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, देश की सरकार संविधान और जनता के जनादेश से चलती है, न कि किसी राजनीतिक दल की इच्छा से। 

मोहन यादव ने भी राहुल गांधी को घेरा, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का लगाया आरोप

भाजपा की ओर से राहुल गांधी पर हमलों का सिलसिला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी 30 अक्टूबर को इंदौर में आयोजित भाजपा की लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ रैली में कांग्रेस नेता पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी चुनाव आयोग, न्यायपालिका और सेना जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर देश में अस्थिरता और अराजकता का वातावरण बनाने का प्रयास कर रहे हैं। मोहन यादव ने कहा था कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने में संवैधानिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में इन संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को भ्रमित करने का आरोप भी लगाया था। रैली में मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया सहित भाजपा के कई नेता मौजूद थे। इस दौरान अन्य नेताओं ने भी कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने तथा विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से अस्थिरता पैदा करने के आरोप लगाए थे। 

दरअसल, राहुल गांधी और विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की रैली भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित की गई थी। विपक्ष का कहना है कि चुनावी व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाना और संवैधानिक संस्थाओं से जवाब मांगना लोकतंत्र में उसका अधिकार है। वहीं भाजपा इसे राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश के रूप में पेश कर रही है। भाजपा नेताओं ने विरोध प्रदर्शनों के पीछे कथित विदेशी संपर्कों, संगठनों की फंडिंग और कुछ प्रदर्शनकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। गौरव भाटिया ने तीन नवंबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कथित स्टिंग से जुड़े दावों का उल्लेख करते हुए कुछ लोगों के कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से संपर्क होने की बात कही। उन्होंने राहुल गांधी से इन मुद्दों पर जवाब देने की मांग की। 

हालांकि, इन आरोपों और कथित संपर्कों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। राजनीतिक जानकारों के लिए यह पूरा घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आने वाले समय में चुनावी प्रक्रिया, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है। भाजपा जहां राहुल गांधी के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को अराजकता और अस्थिरता की राजनीति बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाबदेह बनाने की कोशिश के रूप में देखता है। फिलहाल भाजपा नेताओं के लगातार हमलों से साफ है कि राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ पार्टी ने राजनीतिक मोर्चे पर अपना आक्रामक रुख जारी रखा है।

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