मेसी का अर्जेंटीना से भावुक विदाई का एलान, नीली-सफेद जर्सी में अब नहीं दिखेगा फुटबॉल का महानायक

कभी जिस नीली-सफेद जर्सी को पहनकर लियोन मेसी ने अर्जेंटीना के करोड़ों लोगों के सपनों को अपने कंधों पर उठाया था, अब उसी जर्सी में उनका सफर खत्म होने जा रहा है। मैदान पर गेंद के साथ उनका जादू, गोल के बाद दोनों हाथ उठाकर देशवासियों की ओर देखना और हर बड़े मुकाबले में अर्जेंटीना के लिए आखिरी दम तक लड़ना अब यादों का हिस्सा बनने वाला है। मेसी ने सोमवार को इंटरनेट मीडिया मंच इंस्टाग्राम के जरिए अपनी राष्ट्रीय टीम से अलग होने का संकेत देते हुए प्रशंसकों को भावुक कर दिया। मेसी ने अगस्त 2005 में हंगरी के खिलाफ मित्रतापूर्ण मुकाबले से अर्जेंटीना की सीनियर पुरुष फुटबॉल टीम के लिए पदार्पण किया था। इसके बाद करीब 21 वर्षों तक वह अर्जेंटीना के आक्रमण की सबसे बड़ी ताकत बने रहे। इस लंबे सफर में उन्होंने न सिर्फ अपनी टीम को कई ऐतिहासिक जीत दिलाईं, बल्कि ऐसे दौर भी देखे जब लगातार हार के बाद उनकी आलोचना हुई और उन पर राष्ट्रीय टीम के लिए क्लब जैसा प्रदर्शन नहीं कर पाने के सवाल उठे। मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत जितनी शानदार उम्मीदों के साथ हुई थी, उसका रास्ता उतना ही उतार-चढ़ाव भरा रहा। अर्जेंटीना जैसी फुटबॉल की जुनूनी धरती पर उनसे हमेशा असाधारण प्रदर्शन की उम्मीद की जाती रही। हर टूर्नामेंट में उनसे वही करिश्मा दोहराने की अपेक्षा की जाती थी, जो वह क्लब फुटबॉल में करते आए थे।

मेसी ने अर्जेंटीना के लिए कई बड़े टूर्नामेंट खेले, लेकिन लंबे समय तक एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी उनके करियर से दूर रही। विश्व कप और कोपा अमेरिका के फाइनल में पहुंचने के बावजूद टीम को बार-बार निराशा हाथ लगी। इन हारों का सबसे गहरा असर मेसी पर पड़ा। साल 2014 में अर्जेंटीना फीफा विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा था। टीम ने खिताब जीतने की पूरी कोशिश की, लेकिन फाइनल में जर्मनी के हाथों हार गई। इसके बाद 2015 और 2016 के कोपा अमेरिका में भी अर्जेंटीना फाइनल तक पहुंचा, लेकिन दोनों बार खिताब से चूक गया। लगातार तीन बड़े फाइनल हारने के बाद मेसी के लिए यह निराशा बेहद भारी साबित हुई। 2016 में कोपा अमेरिका फाइनल में चिली के खिलाफ पेनाल्टी शूटआउट में हार के बाद मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास की घोषणा कर दी थी। उस समय उनकी आंखों में निराशा साफ दिखाई दे रही थी। वह मुकाबला केवल एक और फाइनल की हार नहीं थी, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में जमा हुई निराशा का परिणाम था। मेसी के इस फैसले ने पूरे अर्जेंटीना को झकझोर दिया। देशभर में उनके समर्थन में अभियान शुरू हो गया। 

प्रशंसकों ने उनसे अपना फैसला बदलने की अपील की। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने भी मेसी से राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना जारी रखने का आग्रह किया। टीम के नए मुख्य प्रशिक्षक ने भी उन्हें मनाने की कोशिश की। देशवासियों की भावनाओं और लगातार आग्रह के बीच मेसी ने करीब 44 दिन बाद अपना फैसला बदल दिया। उन्होंने अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम में लौटने की घोषणा की। यह वापसी सिर्फ एक खिलाड़ी की वापसी नहीं थी, बल्कि उन लाखों प्रशंसकों के लिए राहत थी, जो मेसी को अर्जेंटीना की फुटबॉल पहचान का अहम हिस्सा मानते थे। वापसी के बाद मेसी ने एक बार फिर राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी संभाली। धीरे-धीरे अर्जेंटीना की टीम ने खुद को मजबूत किया और वह दौर आया, जब मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का सबसे बड़ा सपना पूरा हुआ। मेसी के नेतृत्व में अर्जेंटीना ने 2021 में कोपा अमेरिका का खिताब जीता। ब्राजील में खेले गए फाइनल में अर्जेंटीना ने ब्राजील को हराकर लंबे समय से चले आ रहे ट्रॉफी के इंतजार को खत्म किया। मेसी के लिए यह उपलब्धि बेहद खास थी, क्योंकि यह अर्जेंटीना की सीनियर टीम के साथ उनकी पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी थी।

2022 में कतर में खेले गए फीफा विश्व कप ने मेसी के करियर को दिया ऐतिहासिक मोड़ 

इसके बाद 2022 में कतर में खेले गए फीफा विश्व कप ने मेसी के करियर को एक ऐतिहासिक मोड़ दिया। अर्जेंटीना ने विश्व कप जीता और मेसी का वह सपना भी पूरा हुआ, जिसे लेकर उनके करियर के शुरुआती वर्षों से ही चर्चा होती रही थी। फाइनल में फ्रांस के खिलाफ अर्जेंटीना की जीत के बाद मेसी विश्व कप ट्रॉफी को अपने हाथों में लेकर खड़े थे। यह तस्वीर फुटबॉल इतिहास की सबसे यादगार तस्वीरों में शामिल हो गई। इसके बाद भी मेसी का अर्जेंटीना से रिश्ता खत्म नहीं हुआ। टीम के साथ उनका सफर जारी रहा और वह राष्ट्रीय टीम की अगुआई करते रहे। मैदान पर उनकी भूमिका भले ही समय के साथ बदलती गई हो, लेकिन टीम के भीतर उनका प्रभाव लगातार बना रहा। अब जब मेसी ने राष्ट्रीय टीम से अलग होने की बात कही है, तो अर्जेंटीना के फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह एक युग के समाप्त होने जैसा है। वह खिलाड़ी जिसने लगभग दो दशक तक देश की उम्मीदों का भार उठाया, जिसने हार के सबसे मुश्किल दौर में आलोचनाएं झेलीं और फिर उसी टीम को विश्व चैंपियन बनाया, अब नीली-सफेद जर्सी में अपने अंतिम अध्याय की ओर बढ़ रहा है।

मेसी का अंतरराष्ट्रीय करियर केवल गोल, रिकॉर्ड और ट्रॉफियों की कहानी नहीं है। यह असफलता के बाद वापसी, आलोचनाओं के बीच टिके रहने और अपने सबसे बड़े सपने को पूरा करने की कहानी भी है। एक समय ऐसा था जब लगातार तीन बड़े फाइनल हारने के बाद उन्होंने खुद को राष्ट्रीय टीम से अलग कर लिया था। लेकिन प्रशंसकों के प्यार ने उन्हें वापस मैदान पर ला दिया। आज जब वही मेसी विदाई की ओर बढ़ रहे हैं, तो उनके प्रशंसकों के लिए सबसे भावुक बात यह है कि अर्जेंटीना की जर्सी में उनका आखिरी दौर अब सामने है। आने वाले समय में जब भी अर्जेंटीना की नीली-सफेद जर्सी का जिक्र होगा, उसके साथ मेसी का नाम अपने आप जुड़ जाएगा।

अर्जेंटीना के लिए मेसी सिर्फ एक महान फुटबॉलर नहीं रहे। वह उस पीढ़ी की उम्मीद रहे, जिसने उन्हें हारते देखा, टूटते देखा, वापस लौटते देखा और अंततः विश्व कप उठाते देखा। इसलिए उनकी विदाई किसी सामान्य खिलाड़ी की विदाई नहीं होगी। यह उस युग का अंत होगा, जिसमें एक छोटे कद के जादूगर ने अर्जेंटीना के करोड़ों दिलों में अपने लिए ऐसी जगह बनाई, जिसे शायद आने वाली पीढ़ियां भी आसानी से नहीं भर पाएंगी।

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