नाइट शिफ्ट कर्मचारियों को मिलेगा ज्यादा वेतन, इस राज्य की सरकार लाने जा रही है नया विधेयक 

दिन में काम करने वाले और रात भर जागकर अपनी जिम्मेदारियां निभाने वाले कर्मचारियों के बीच अब वेतन और काम के घंटों का अंतर बदल सकता है। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। सरकार आगामी विधानसभा सत्र में ‘एमपी कोड ऑन एम्पॉवरिंग वर्क स्पेसेस, 2026’ नाम से नया विधेयक पेश करने की तैयारी में है। यदि यह विधेयक विधानसभा से पारित हो जाता है, तो रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों को उनकी नियमित सैलरी से अधिक वेतन मिलेगा और उनके काम के घंटों की गणना भी अलग तरीके से की जाएगी। यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब आईटी, बीपीओ, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा, परिवहन, औद्योगिक इकाइयों और कई निजी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कर्मचारी रात की शिफ्ट में काम करते हैं। लंबे समय से इन कर्मचारियों की मांग रही है कि रात में काम करने की अतिरिक्त कठिनाइयों को देखते हुए उन्हें विशेष आर्थिक लाभ और बेहतर कार्य परिस्थितियां मिलनी चाहिए। अब राज्य सरकार का यह कदम उनकी इस मांग को पूरा करने की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, नाइट शिफ्ट के एक घंटे को दिन की शिफ्ट के डेढ़ घंटे (1.5 घंटे) के बराबर माना जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि वेतन और कार्य अवधि की गणना इसी नए फार्मूले के आधार पर की जाएगी। उदाहरण के तौर पर यदि कोई कर्मचारी रात में 8 घंटे काम करता है, तो उसकी गणना 12 घंटे के बराबर मानी जाएगी और उसी अनुपात में वेतन तथा अन्य लाभ निर्धारित किए जा सकेंगे। मोहन सरकार का मानना है कि रात में काम करना शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। 

सामान्य जैविक घड़ी के विपरीत काम करने से कर्मचारियों के स्वास्थ्य, नींद, पारिवारिक जीवन और सामाजिक संतुलन पर असर पड़ता है। इसलिए ऐसे कर्मचारियों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ देना उचित होगा। यही सोच इस प्रस्तावित कानून की सबसे बड़ी आधारशिला मानी जा रही है। इस विधेयक के लागू होने के बाद उद्योगों और निजी कंपनियों को भी अपने वेतन ढांचे और कार्य समय की व्यवस्था में बदलाव करना पड़ सकता है। खासतौर पर वे संस्थान, जहां चौबीसों घंटे काम होता है, उन्हें नए नियमों के अनुरूप कर्मचारियों की ड्यूटी और भुगतान की नई व्यवस्था बनानी होगी।

नाइट शिफ्ट कर्मचारियों को मिलेगा सम्मान और सुरक्षा, उद्योग जगत की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी

प्रस्तावित कानून केवल अतिरिक्त वेतन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य कार्यस्थलों को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और कर्मचारी हितैषी बनाना भी है। सरकार चाहती है कि आधुनिक कार्य संस्कृति के अनुरूप श्रमिकों के अधिकारों को और मजबूत किया जाए, ताकि उन्हें बेहतर सुविधाएं और उचित पारिश्रमिक मिल सके। रात की शिफ्ट में लगातार काम करने से कर्मचारियों में थकान, तनाव, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यदि उन्हें अतिरिक्त वेतन मिलता है तो यह न केवल उनके आर्थिक जीवन को बेहतर बनाएगा, बल्कि उनकी मेहनत का उचित सम्मान भी होगा। इस प्रस्ताव का सबसे अधिक लाभ आईटी कंपनियों, कॉल सेंटर, अस्पतालों, दवा उद्योग, होटल, सुरक्षा सेवाओं, मीडिया, परिवहन, बिजली उत्पादन, मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों और अन्य 24×7 सेवाएं देने वाले संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को मिल सकता है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कर्मचारी पूरी रात अपनी सेवाएं देते हैं, लेकिन अधिकांश जगह उन्हें सामान्य शिफ्ट के बराबर ही भुगतान मिलता है। 

यदि यह विधेयक विधानसभा से पारित होकर कानून का रूप लेता है, तो मध्य प्रदेश देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो सकता है जहां नाइट शिफ्ट कर्मचारियों के लिए वेतन निर्धारण का अलग और अधिक लाभकारी प्रावधान लागू होगा। इससे अन्य राज्यों पर भी इसी तरह के कर्मचारी हितैषी कानून बनाने का दबाव बढ़ सकता है।

उद्योग जगत के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण होगा। कंपनियों को कर्मचारियों की ड्यूटी रोस्टर, वेतन संरचना, ओवरटाइम और मानव संसाधन नीतियों में आवश्यक संशोधन करने होंगे। हालांकि इससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, लेकिन कर्मचारी संतुष्टि, उत्पादकता और कार्यस्थल पर स्थायित्व में भी सुधार होने की संभावना जताई जा रही है। 

सरकार का कहना है कि बदलते समय में श्रम कानूनों को भी आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना जरूरी है। नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों का योगदान अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन और बेहतर कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। अब सभी की निगाहें आगामी विधानसभा सत्र पर टिकी हैं, जहां ‘एमपी कोड ऑन एम्पॉवरिंग वर्क स्पेसेस, 2026’ विधेयक पेश किया जाएगा। यदि इसे सदन की मंजूरी मिल जाती है, तो मध्य प्रदेश में नाइट शिफ्ट में काम करने वाले हजारों नहीं बल्कि लाखों कर्मचारियों के वेतन, कार्य घंटे और श्रम अधिकारों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह कदम केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रात में काम करने वाले कर्मचारियों की मेहनत को नई पहचान और सम्मान देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।

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