दिल्ली सरकार ने राजधानी को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में सोमवार को हुई दिल्ली कैबिनेट की बैठक में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2.0 को मंजूरी दे दी गई। इस नई नीति के जरिए सरकार अगले चार वर्षों में करीब 15,000 करोड़ रुपये का निवेश कर दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को तेज गति से बढ़ाने की योजना पर काम करेगी। सरकार का उद्देश्य केवल इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि राजधानी में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता और कार्बन उत्सर्जन को प्रभावी ढंग से कम करना भी है।
प्रस्तावित नीति को 1 जुलाई से लागू करने की तैयारी की गई है। इसके साथ ही दिल्ली देश के उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल होने जा रही है, जहां इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का मानना है कि परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव के बिना प्रदूषण पर स्थायी नियंत्रण संभव नहीं है। इसी सोच के साथ नई EV पॉलिसी तैयार की गई है, जिसमें निजी वाहन मालिकों से लेकर व्यावसायिक परिवहन संचालकों तक सभी वर्गों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित करने के लिए टैक्स में छूट, सब्सिडी, स्क्रैपिंग इंसेंटिव और अन्य वित्तीय प्रोत्साहन शामिल किए गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि यह नीति न केवल पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के नए अवसरों को भी बढ़ावा देगी।
दिल्ली सरकार ने नई नीति के तहत वर्ष 2027 तक दिल्ली में पंजीकृत होने वाले कुल नए वाहनों में 95 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की सुनिश्चित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसके लिए परिवहन क्षेत्र में व्यापक बदलाव किए जाएंगे ताकि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी आधारित वाहनों की जगह धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहन ले सकें। सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के साथ-साथ चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया जाएगा, जिससे लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में किसी प्रकार की व्यावहारिक कठिनाई का सामना न करना पड़े। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में भी इलेक्ट्रिक बसों और अन्य स्वच्छ वाहनों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
नई ईवी पॉलिसी 2.0 में सब्सिडी, टैक्स छूट और स्क्रैपिंग इंसेंटिव का बड़ा पैकेज
नई ईवी पॉलिसी 2.0 के तहत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों के लिए कई आकर्षक वित्तीय लाभों की घोषणा की है। सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलेगा जो 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली नई इलेक्ट्रिक कार खरीदेंगे। ऐसे खरीदारों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। यानी वाहन खरीदने पर इस मद में किसी प्रकार का अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने चरणबद्ध सब्सिडी योजना बनाई है। पहले वर्ष इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने पर 30 हजार रुपये, दूसरे वर्ष 20 हजार रुपये और तीसरे वर्ष 10 हजार रुपये की सब्सिडी मिलेगी।
इसी प्रकार इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर खरीदने वालों को पहले वर्ष 50 हजार रुपये, दूसरे वर्ष 40 हजार रुपये और तीसरे वर्ष 30 हजार रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे ऑटो चालकों और छोटे व्यवसायियों को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। व्यावसायिक परिवहन क्षेत्र को भी इस नीति में विशेष प्राथमिकता दी गई है। N1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों की खरीद पर सरकार एक लाख रुपये तक का इंसेंटिव देगी, जिससे माल परिवहन क्षेत्र में भी स्वच्छ ऊर्जा आधारित वाहनों का उपयोग बढ़ सके। इसके अलावा पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को सड़कों से हटाने के उद्देश्य से स्क्रैपिंग इंसेंटिव की भी व्यवस्था की गई है। जिन लोगों के पास BS-IV या उससे पुराने मानक वाली चार पहिया गाड़ियां हैं और वे उन्हें स्क्रैप कर नई इलेक्ट्रिक कार खरीदते हैं, उन्हें सरकार की ओर से एक लाख रुपये तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी सब्सिडी और इंसेंटिव का लाभ लेने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी।
इसके लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाएगा, जहां वाहन खरीदार आसानी से आवेदन कर सकेंगे और पात्रता के अनुसार मिलने वाले लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनेगी। नई ईवी पॉलिसी के माध्यम से दिल्ली सरकार केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि राजधानी में एक मजबूत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में भी काम करेगी। इसमें चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार, बैटरी स्वैपिंग सुविधाओं को बढ़ावा, निजी निवेश को प्रोत्साहन और संबंधित उद्योगों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से आने वाले वर्षों में दिल्ली की हवा पहले की तुलना में अधिक स्वच्छ होगी, ईंधन पर होने वाला खर्च कम होगा और राजधानी पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था की दिशा में देश के लिए एक नया मॉडल बनकर उभरेगी।

















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