सप्ताह की शुरुआत के साथ ही देश के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतें एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई हैं। 29 जून 2026 को जारी ताजा भावों में दोनों कीमती धातुओं में नरमी देखने को मिली है। पिछले कुछ महीनों में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब सोने और चांदी के दाम दबाव में नजर आ रहे हैं, जिससे बाजार का माहौल बदला हुआ दिखाई दे रहा है। एक ओर जहां निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि मौजूदा गिरावट अस्थायी है या आगे भी जारी रह सकती है, वहीं दूसरी ओर शादी-विवाह और आभूषण खरीदने की तैयारी कर रहे ग्राहकों के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता और निवेशकों की मुनाफावसूली जैसे कई कारकों ने सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बनाया है।
हालांकि, यह गिरावट इतनी बड़ी नहीं मानी जा रही कि लंबी अवधि के निवेशकों का भरोसा पूरी तरह डगमगा जाए। बल्कि कई जानकार इसे चरणबद्ध खरीदारी का अवसर भी मान रहे हैं। ऐसे समय में जब दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, सर्राफा बाजार की हर हलचल निवेशकों और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के अधिकांश प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोना लगभग 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखाई दे रहा है। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव करीब 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। दूसरी ओर 18 कैरेट सोना इससे कम कीमत पर उपलब्ध है, जिससे ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों को कुछ राहत मिल सकती है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आभूषण खरीदने वाले अधिकांश उपभोक्ता 22 कैरेट और 18 कैरेट गोल्ड को प्राथमिकता देते हैं, इसलिए इन श्रेणियों में आई नरमी का सीधा लाभ ग्राहकों को मिल सकता है। सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली है। कई प्रमुख शहरों में चांदी का भाव 2.20 लाख से 2.25 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बीच कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी अपने हालिया उच्च स्तर से नीचे फिसली है, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। औद्योगिक मांग और निवेश दोनों में आई सुस्ती के कारण चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
ग्लोबल संकेतों से तय हो रही अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा
सोने की कीमतों में आई हालिया गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती को माना जा रहा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है। इससे वैश्विक मांग कमजोर पड़ती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है। इसके अलावा अमेरिका समेत कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी निवेशकों का रुख बदल दिया है। जब ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना होती है तो निवेशक सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों की बजाय ऐसे निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जहां बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना हो। यही कारण है कि हाल के दिनों में सोने में निवेश का प्रवाह कुछ धीमा पड़ा है। दूसरी ओर, मुनाफावसूली भी कीमतों में गिरावट का एक प्रमुख कारण बनी है।
पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी ने रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल की थी। ऐसे में कई निवेशकों ने ऊंचे भाव पर खरीदारी करने के बाद अब मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया है। जब बड़ी मात्रा में बिकवाली होती है तो बाजार में आपूर्ति बढ़ जाती है और कीमतों पर दबाव आ जाता है। मौजूदा गिरावट को केवल नकारात्मक संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यदि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, भू-राजनीतिक तनाव गहराता है या महंगाई फिर तेज होती है, तो सोने की मांग दोबारा मजबूत हो सकती है। यही वजह है कि लंबी अवधि के निवेशकों को जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचने की सलाह दी जा रही है। आभूषण कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में नरमी आने से खुदरा बाजार में ग्राहकों की रुचि बढ़ सकती है। कई लोग जो ऊंची कीमतों के कारण खरीदारी टाल रहे थे, अब बाजार का रुख कर सकते हैं। हालांकि, वे भी ग्राहकों को एकमुश्त बड़ी खरीदारी करने के बजाय जरूरत और बजट के अनुसार चरणबद्ध खरीदारी की सलाह दे रहे हैं।
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक निवेशकों की धारणा पर निर्भर करेगी। यदि इन मोर्चों पर सकारात्मक बदलाव आते हैं तो कीमती धातुओं में फिर तेजी लौट सकती है, जबकि विपरीत परिस्थितियों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए सबसे अहम सलाह यही है कि बाजार की हर छोटी-बड़ी हलचल पर भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं। यदि निवेश का उद्देश्य लंबी अवधि में संपत्ति का संरक्षण और संतुलित रिटर्न प्राप्त करना है, तो गिरावट के दौरान धीरे-धीरे निवेश करना अपेक्षाकृत बेहतर रणनीति मानी जा सकती है। वहीं, केवल अल्पकालिक मुनाफे के उद्देश्य से निवेश करने वालों को बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है। कुल मिलाकर, सप्ताह की शुरुआत में सोना और चांदी दोनों दबाव में जरूर नजर आए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बाजार का सामान्य उतार-चढ़ाव है। आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत तय करेंगे कि कीमती धातुओं की चमक फिर लौटेगी या कीमतों में नरमी का दौर कुछ और समय तक जारी रहेगा।

















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