उत्तराखंड में पिछले दस दिनों से निहंगों और स्थानीय प्रशासन के बीच जारी तनाव आखिरकार बातचीत के जरिए शांत हो गया। चंडीगढ़, पंजाब और पांवटा साहिब से देहरादून पहुंचे निहंग देर रात प्रशासन के साथ हुई वार्ता के बाद वापस लौट गए। देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल के साथ कई घंटे चली बातचीत के बाद समाधान निकला। प्रशासन के अनुसार निहंग पांवटा साहिब लौट चुके हैं और देहरादून-हिमाचल सीमा पर हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। पांवटा साहिब में मौजूद करीब 150 निहंगों से भी प्रशासन ने संवाद किया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर निहंगों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
तनाव गुरुवार देर रात उस समय बढ़ गया जब आठ निहंग कुल्हाल बॉर्डर पर पहुंचे और उत्तराखंड में प्रवेश करने का प्रयास करने लगे।
सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई। इसके बाद निहंगों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और देहरादून की सीमा में प्रवेश कर गए। पुलिस और आईटीबीपी के जवानों की मौजूदगी में वे तलवारें लहराते हुए देहरादून-पांवटा हाईवे की ओर बढ़े। इस दौरान पुलिस द्वारा रास्ता रोकने के लिए लगाए गए दो डंपरों में भी तोड़फोड़ की गई। बाद में रात करीब एक बजे 10 से 15 निहंग देहरादून के रेसकोर्स गुरुद्वारे पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें रोक लिया। रात करीब ढाई बजे तक चली वार्ता के बाद वे वापस लौटने पर सहमत हो गए। दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई थी। हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे कुछ निहंगों और एक स्थानीय व्यापारी के बेटे के बीच होटल के बाहर बाइक खड़ी करने को लेकर विवाद हो गया। देखते ही देखते कहासुनी मारपीट में बदल गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निहंगों ने तलवार से हमला किया, जबकि कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों पक्षों में मारपीट हुई।
घटना के बाद निहंग मौके से भाग निकले, लेकिन गौचर के पास स्थानीय लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार निहंगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं हमले में घायल युवक को गंभीर हालत में देहरादून रेफर किया गया, जिसके सिर और शरीर पर धारदार हथियार के गहरे घाव पाए गए। चार निहंगों की गिरफ्तारी के विरोध में 20 जून को कुछ निहंग रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे पहुंच गए और वहां डेरा डाल दिया। आरोप है कि उन्होंने गुरुद्वारे के सेवादार से मारपीट की, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और छत पर चढ़कर ईंट-पत्थर फेंके। गुरुद्वारा प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान निहंगों ने अनुशासनहीनता की और परिसर को नुकसान पहुंचाया। करीब तीन दिन तक चले इस गतिरोध के बाद निहंग सिखों के प्रतिनिधिमंडल ने हस्तक्षेप किया और बातचीत के जरिए उन्हें गुरुद्वारे से वापस पंजाब लौटने के लिए राजी कर लिया।
बॉर्डर पर फिर बढ़ा तनाव, लेकिन बातचीत से निकला समाधान
नगरासू से लौटने के बाद भी मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर 25 जून को उत्तराखंड कूच का ऐलान किए जाने के बाद राज्यभर में पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया। देर रात करीब 300 निहंग हथियारों और वाहनों के साथ हिमाचल-उत्तराखंड सीमा स्थित कुल्हाल बॉर्डर पर पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें राज्य में प्रवेश से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने पर अड़ गए। कुछ निहंगों ने पारंपरिक शस्त्रों के साथ बैरिकेड हटाने की कोशिश की, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शन कर रहे निहंगों का कहना था कि जब तक गिरफ्तार चारों साथियों की रिहाई नहीं होती, वे वापस नहीं लौटेंगे। उनका आरोप था कि पुलिस ने मामले में एकतरफा कार्रवाई की है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे विवाद को टकराव नहीं बल्कि बातचीत के जरिए सुलझाना चाहते हैं। उनका दावा था कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानत की कार्रवाई जल्द आगे बढ़ेगी।
तनाव बढ़ने के बीच प्रशासन ने संयम बनाए रखा और आधी रात को देहरादून के रेसकोर्स गुरुद्वारे में निहंग प्रतिनिधियों के साथ वार्ता शुरू की। कई घंटे चली बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और निहंग वापस लौटने को तैयार हो गए। जिलाधिकारी आशीष चौहान ने बताया कि फिलहाल सभी प्रदर्शनकारी लौट चुके हैं और सीमा पर स्थिति पूरी तरह सामान्य है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कर्णप्रयाग की घटना से लेकर ताजा घटनाक्रम तक पूरे मामले को संवेदनशीलता और संतुलन के साथ संभाला है। सरकार की प्राथमिकता चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हेमकुंड साहिब यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति और अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए किसी भी स्थिति में यात्रा और आम जनजीवन प्रभावित न हो, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने और यात्रा मार्गों पर आवश्यक व्यवस्थाएं बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं, लेकिन भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

















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