उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। पढ़ाई और बेहतर भविष्य का सपना लेकर कोचिंग पहुंचे युवा कुछ ही मिनटों में आग की लपटों में घिर गए। इस दर्दनाक हादसे के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त एक्शन लेते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि बिल्डिंग को अनुमति देने वाले 16 अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे अलीगंज स्थित बहुमंजिला इमारत में कथित तौर पर एसी ब्लास्ट के बाद आग लग गई।
आग इतनी तेजी से फैली कि दूसरी मंजिल पर मौजूद छात्र बाहर नहीं निकल सके। हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें पांच महिलाएं और दस पुरुष शामिल हैं। अधिकांश मृतक 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के छात्र हैं। फायर ब्रिगेड की 19 गाड़ियों, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने करीब सात घंटे तक राहत एवं बचाव अभियान चलाया। कई जगह दीवारें तोड़कर फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। देर रात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल जाना। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया।
जांच में सामने आया कि जिस इमारत में आग लगी, वह अवैध निर्माण की श्रेणी में थी। इसे वर्ष 2016 में ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद आदेश निरस्त कर दिया गया। अब एलडीए ने बिल्डिंग मालिक को 15 दिन का नोटिस जारी कर फिर से ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस ने बिल्डिंग की जमीन के मालिक वीरेंद्र शुक्ला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रशासन का कहना है कि जांच में जिन-जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
यूपी सरकार ने गठित की एसआईटी, सात दिन में मांगी रिपोर्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसआईटी को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। एसआईटी हादसे के कारणों, प्रशासनिक लापरवाही, भवन की स्वीकृति प्रक्रिया, अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच करेगी। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ अग्निकांड का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) तक पहुंच गया है। नोएडा निवासी पूर्व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजीव कुमार गुप्ता ने आयोग में शिकायत दर्ज कर देशभर के कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की जांच कराने और छात्रों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि इससे पहले 27 जुलाई 2024 को दिल्ली के राजेंद्र नगर स्थित कोचिंग संस्थान में जलभराव से तीन छात्रों की मौत हुई थी, जबकि 26 मई 2019 को अहमदाबाद के एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से 22 छात्रों की जान चली गई थी।
इसके बावजूद सुरक्षा मानकों के पालन में गंभीर लापरवाही लगातार बनी हुई है। लखनऊ की इस त्रासदी ने एक बार फिर कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था और अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत को सामने ला दिया है। अब पूरे देश की नजर एसआईटी की रिपोर्ट और सरकार की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

















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