केंद्र सरकार ने देश की सर्वोच्च न्यायिक व्यवस्था में अपने कानूनी नेतृत्व को बरकरार रखते हुए भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को एक बार फिर तीन वर्ष के लिए नियुक्त करने का निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति की मंजूरी के बाद तुषार मेहता का नया कार्यकाल एक जुलाई 2026 से शुरू होगा। इस फैसले को सरकार की कानूनी रणनीति में निरंतरता और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बीते कई वर्षों में उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न संवैधानिक पीठों के समक्ष केंद्र सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से रखा है और कई ऐतिहासिक मामलों में सरकार की ओर से मजबूत दलीलें प्रस्तुत की हैं।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से 20 जून को जारी आदेश के अनुसार तुषार मेहता अगले तीन वर्षों अथवा अगले आदेश तक देश के दूसरे सर्वोच्च विधि अधिकारी के रूप में सेवाएं देते रहेंगे। न्यायपालिका और सरकार के बीच संवैधानिक मामलों में समन्वय स्थापित करने में उनकी भूमिका को देखते हुए इस पुनर्नियुक्ति को बेहद अहम माना जा रहा है। मूल रूप से गुजरात से संबंध रखने वाले तुषार मेहता ने वर्ष 2014 में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में केंद्र सरकार की कानूनी टीम में प्रवेश किया था।
अपनी कुशल पैरवी और संवैधानिक मामलों की गहरी समझ के कारण अक्टूबर 2018 में उन्हें सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया। तब से लेकर अब तक उन्होंने राष्ट्रीय महत्व के अनेक मामलों में सरकार का पक्ष रखा और न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिकता, कर व्यवस्था, चुनाव सुधार, डिजिटल नियमन, आर्थिक नीतियों तथा केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों से जुड़े विवादों सहित कई महत्वपूर्ण मामलों में सरकार की ओर से पैरवी की है। सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठों में उनकी नियमित उपस्थिति और कानूनी तर्कों की स्पष्टता ने उन्हें देश के प्रमुख विधि विशेषज्ञों में शामिल किया है। लगातार मिल रहे इस विश्वास के बाद तुषार मेहता हाल के वर्षों में इस पद पर सबसे लंबे समय तक सेवाएं देने वाले अधिकारियों में शामिल हो गए हैं।
पांच अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को भी मिला सेवा विस्तार, मजबूत रहेगी सरकार की कानूनी टीम
केंद्र सरकार ने केवल तुषार मेहता का ही कार्यकाल नहीं बढ़ाया है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय में सरकार का पक्ष रखने वाले पांच अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को भी तीन वर्ष का नया कार्यकाल प्रदान किया है। इनमें विक्रमजीत बनर्जी और के.एम. नटराज का नया कार्यकाल एक जुलाई 2026 से प्रभावी होगा, जबकि सूर्यप्रकाश वी. राजू, एन. वेंकटरमन और ऐश्वर्या भाटी का सेवा विस्तार 30 जून 2026 से लागू होगा।
इन सभी वरिष्ठ विधि अधिकारियों ने पिछले वर्षों में आपराधिक न्याय व्यवस्था, संवैधानिक कानून, आर्थिक विनियमन, प्रशासनिक सुधार और शासन व्यवस्था से जुड़े अनेक जटिल मामलों में केंद्र सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी की है। सरकार का मानना है कि अनुभवी कानूनी अधिकारियों की यह टीम आने वाले समय में भी महत्वपूर्ण संवैधानिक और नीतिगत मामलों में देश का पक्ष मजबूती से रखेगी। शीर्ष विधि अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति से न्यायालयों में सरकार की कानूनी रणनीति में निरंतरता बनी रहेगी और लंबित महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के दौरान पहले से तैयार कानूनी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में आसानी होगी।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब सर्वोच्च न्यायालय में कई महत्वपूर्ण संवैधानिक, आर्थिक और प्रशासनिक मामलों पर सुनवाई चल रही है। तुषार मेहता की दोबारा नियुक्ति सरकार के उस भरोसे को भी दर्शाती है, जो उन्होंने अपनी विधिक क्षमता, संवैधानिक समझ और प्रभावशाली पैरवी के माध्यम से अर्जित किया है। आने वाले तीन वर्षों में भी उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे देश के सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार का पक्ष मजबूती से रखते हुए महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

















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