भारतीय सैन्य परंपराओं, अनुशासन और गौरव का प्रतीक इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) शनिवार को एक बार फिर ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी बना। 158वीं पासिंग आउट परेड के सफल आयोजन के बाद जब युवा कैडेट्स ने चेटवुड भवन के सामने स्थित ऐतिहासिक ‘अंतिम पग’ पार किया, तो उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय पूरा हुआ और वे भारतीय सेना के कमीशंड अधिकारी बन गए। वर्षों की कठिन सैन्य ट्रेनिंग, अनुशासन, समर्पण और त्याग के बाद मिले इस सम्मान ने पूरे आईएमए परिसर को गर्व, उत्साह और भावनाओं से भर दिया। परिवारों की आंखों में खुशी के आंसू थे तो युवा अधिकारियों के चेहरे पर देशसेवा का संकल्प साफ दिखाई दे रहा था।
इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने युवा अधिकारियों को राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता का प्रहरी बताते हुए उन्हें कर्तव्य, नेतृत्व और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया। देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) में 158वीं पासिंग आउट परेड (पीओपी) के बाद पिपिंग सेरेमनी का आयोजन किया गया। इस विशेष समारोह में परिजनों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने नव-नियुक्त अधिकारियों के कंधों पर स्टार लगाकर उन्हें भारतीय सेना में कमीशंड अधिकारी बनने की औपचारिक शुभकामनाएं दीं। इस दौरान पूरे परिसर में उत्साह और गर्व का माहौल देखने को मिला। इस बार कुल 515 कैडेट्स ने सफलतापूर्वक अपना सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुए। इनमें 481 भारतीय कैडेट्स और 34 मित्र देशों के विदेशी कैडेट्स शामिल रहे। विभिन्न देशों से आए विदेशी कैडेट्स की मौजूदगी ने एक बार फिर आईएमए की वैश्विक प्रतिष्ठा को रेखांकित किया।
158वीं पासिंग आउट परेड कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुई। आईएमए के 94 वर्षों के इतिहास में पहली बार 9 महिला कैडेट्स ने भी पासिंग आउट परेड में भाग लिया। एक वर्ष के कठोर सैन्य प्रशिक्षण के बाद इन महिला कैडेट्स ने पुरुष कैडेट्स के साथ कदम से कदम मिलाते हुए ‘अंतिम पग’ पार किया और भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली। यह उपलब्धि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक मानी जा रही है। परेड के बाद नव-नियुक्त अधिकारियों की खुशी देखते ही बन रही थी। वर्षों की मेहनत और संघर्ष के बाद अधिकारी बनने का सपना पूरा होने पर युवा अफसरों ने अपने साथियों के साथ जश्न मनाया। कई अधिकारी अपने मित्रों को कंधों पर उठाते और हवा में उछालते नजर आए।
आईएमए परिसर में भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्यों की भरमार रही, जहां परिवारजन अपने बेटों और बेटियों को वर्दी में देखकर गर्व महसूस कर रहे थे। समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उनके साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह भी उपस्थित रहे। समीक्षा अधिकारी के रूप में राष्ट्रपति ने परेड का निरीक्षण किया, कैडेट्स की सलामी ली और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को स्वॉर्ड ऑफ ऑनर सहित विभिन्न पदकों से सम्मानित किया।
‘अंतिम पग’ के साथ कैडेट से अधिकारी बनने का गौरवपूर्ण क्षण
पासिंग आउट परेड के बाद सभी कैडेट्स ने चेटवुड भवन के सामने स्थित ऐतिहासिक ‘अंतिम पग’ को पार किया। सैन्य परंपरा के अनुसार यह वह रेखा है, जिसे पार करते ही कैडेट का प्रशिक्षण जीवन समाप्त हो जाता है और वह भारतीय सेना का कमीशंड अधिकारी बन जाता है। इस गौरवपूर्ण अवसर को और यादगार बनाने के लिए हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई, जिससे पूरा वातावरण देशभक्ति और उत्साह से भर उठा। अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि नव-नियुक्त अधिकारी केवल सेना का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के संरक्षक हैं। उनके कंधों पर 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास, सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राष्ट्र सेवा को हमेशा अपना सर्वोच्च धर्म और कर्तव्य मानें तथा हर परिस्थिति में देशहित को प्राथमिकता दें। राष्ट्रपति ने आईएमए के इतिहास में पहली बार 9 महिला कैडेट्स के पास आउट होने को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल भारतीय सेना के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
यह उपलब्धि महिला-नेतृत्व वाले विकास और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में और अधिक युवा महिलाएं सेना में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में दिखाई देंगी। राष्ट्रपति ने बदलते वैश्विक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक और नई सैन्य चुनौतियों के दौर में भारतीय सेना को हर समय तैयार रहना होगा। उन्होंने अधिकारियों को नई तकनीकों को अपनाने, निरंतर सीखने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एक सफल सैन्य अधिकारी केवल युद्ध कौशल से नहीं, बल्कि अपने नेतृत्व, नैतिक मूल्यों और निर्णय क्षमता से पहचाना जाता है। कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेना, अपने अधीनस्थ सैनिकों का मनोबल बनाए रखना और ईमानदारी के साथ नेतृत्व करना एक अधिकारी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
राष्ट्रपति ने जवानों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी के सामने सबसे बड़ी परीक्षा अपने सैनिकों का विश्वास जीतना होता है। जब अधिकारी अपने आचरण, व्यवहार और नेतृत्व से सैनिकों का भरोसा अर्जित कर लेता है, तब उसकी यूनिट अधिक मजबूत, अनुशासित और प्रभावी बनती है। उन्होंने युवा अधिकारियों से अपने सैनिकों के कल्याण, मार्गदर्शन और मनोबल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। 158वीं पासिंग आउट परेड के साथ आईएमए ने एक बार फिर देश को ऐसे युवा अधिकारी सौंपे हैं, जो राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने और भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। देहरादून की धरती से निकले ये 515 युवा अधिकारी अब देश की सेवा के नए अध्याय की शुरुआत करेंगे और भारतीय सेना की शौर्य गाथा में अपना योगदान देंगे।

















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