देश की महत्वाकांक्षी उपलब्धि : लद्दाख के विकास को मिली नई रफ्तार, ज़ोजिला टनल में ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू, दोनों छोर हुए एक

देश की सबसे महत्वाकांक्षी और सामरिक दृष्टि से अहम परियोजनाओं में शामिल ज़ोजिला टनल ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदगी में सुरंग के भीतर आखिरी चट्टान की प्रतीकात्मक खुदाई की गई। इसके साथ ही सुरंग के दोनों छोर आपस में जुड़ गए और परियोजना ने अपना बहुप्रतीक्षित “ब्रेकथ्रू” हासिल कर लिया। हिमालय की कठिन पहाड़ियों के बीच बन रही यह सुरंग केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना नहीं, बल्कि लद्दाख और कारगिल के लोगों के दशकों पुराने सपने को साकार करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम मानी जा रही है। एशिया की सबसे लंबी दो-तरफा सड़क टनल के रूप में विकसित हो रही यह परियोजना पूरी होने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए विकास का नया अध्याय लिखेगी। 

इस मौके पर लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान ने कहा कि पिछले 60 से 70 वर्षों से जिस परियोजना का इंतजार किया जा रहा था, वह अब हकीकत में बदलती दिखाई दे रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस परियोजना को वास्तविक गति मिली। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी ने खुद इस परियोजना की लगातार निगरानी की और यही कारण है कि आज यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल हो सका है। ज़ोजिला टनल का महत्व केवल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से भी सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में हर मौसम में संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता को गंभीरता से महसूस किया गया था। 

सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण ज़ोजिला दर्रा कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे लद्दाख और कारगिल का सड़क संपर्क प्रभावित होता है। टनल बनने के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी और पूरे वर्ष आवागमन संभव हो सकेगा।ज़ोजिला टनल को भारत के बुनियादी ढांचे की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की चुनौतियों के बावजूद परियोजना का इस मुकाम तक पहुंचना भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता और आधुनिक तकनीक का बड़ा उदाहरण है। सुरंग के दोनों छोरों का जुड़ना इस बात का संकेत है कि अब यह महत्वाकांक्षी परियोजना अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में जब यह पूरी तरह शुरू होगी, तब लद्दाख, कारगिल और पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदलती नजर आएगी। यह सुरंग न केवल विकास का रास्ता खोलेगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों की मजबूती का भी नया प्रतीक बनेगी।

एशिया की सबसे लंबी दो-तरफा सड़क टनल का 80% काम पूरा, लद्दाख-कारगिल को मिलेगा सालभर संपर्क

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार टनल का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। ICT AIAPL की ओर से अथॉरिटी इंजीनियर यूसुफ़ ने बताया कि ब्रेकथ्रू परियोजना का एक बड़ा और महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन अभी कई तकनीकी कार्य पूरे किए जाने बाकी हैं। उन्होंने कहा कि शेष 20 प्रतिशत काम में वेंटिलेशन सिस्टम, फायर सेफ्टी, इलेक्ट्रिकल नेटवर्क, मॉनिटरिंग सिस्टम और अन्य सुरक्षा सुविधाओं की स्थापना शामिल है, जिन्हें पूरा होने में लगभग दो वर्ष का समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि टनल को आम जनता के लिए पूरी तरह खोलने में अभी करीब ढाई साल का समय लग सकता है। हालांकि किसी विशेष आपातकालीन स्थिति, खासकर सेना की जरूरत पड़ने पर सीमित रूप से इसका उपयोग किया जा सकता है। 

फिलहाल नियमित यातायात के लिए इसे खोलना संभव नहीं है। ज़ोजिला टनल के पूरा होने के बाद लद्दाख और कारगिल की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में सर्दियों के दौरान सड़क बंद होने से व्यापार, पर्यटन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होती है। सुरंग शुरू होने के बाद माल ढुलाई आसान होगी, परिवहन लागत कम होगी और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। पर्यटन उद्योग को भी इस परियोजना से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। लद्दाख देश और दुनिया के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र है, लेकिन मौसम की चुनौतियों के कारण पर्यटन गतिविधियां सीमित रहती हैं। 

हर मौसम में सड़क संपर्क उपलब्ध होने से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और होटल, ट्रैवल, परिवहन तथा स्थानीय व्यवसायों को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा छात्रों, मरीजों और बुजुर्गों के लिए भी यह परियोजना राहत लेकर आएगी। सर्दियों में सड़क बंद होने के कारण कई बार लोगों को अस्पतालों और शिक्षा संस्थानों तक पहुंचने में भारी परेशानी होती है। टनल बनने के बाद स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी और लोगों का जीवन पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक बन सकेगा।

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