एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेगा नया संपर्क मार्ग, नोएडा से ग्रेटर नोएडा पहुंचना होगा आसान, नई लिंक रोड से 16 किमी दूरी होगी कम

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। दोनों शहरों के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित नए संपर्क मार्ग का निर्माण अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। हिंडन नदी पर बन रहे पुल का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और जुलाई महीने में इस मार्ग को वाहनों के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है। इस नई लिंक रोड के शुरू होने से नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और ग्रेटर नोएडा के एलजी चौक, परी चौक, सूरजपुर तथा आसपास के प्रमुख क्षेत्रों के बीच आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगा।

वर्तमान में दिल्ली, नोएडा एक्सप्रेसवे अथवा सेक्टर-146-147 क्षेत्र से ग्रेटर नोएडा की ओर जाने वाले लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। कई स्थानों पर पहुंचने के लिए करीब 16 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ती है। नई लिंक रोड शुरू होने के बाद यह दूरी काफी कम हो जाएगी और यात्रियों को सीधे संपर्क मार्ग का लाभ मिलेगा। जानकारी के अनुसार, सेक्टर-146 और 147 क्षेत्र को ग्रेटर नोएडा के एलजी चौक से जोड़ने के लिए बनाई जा रही लिंक रोड सीधे एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ने जा रही है। 

इस मार्ग से आने वाले वाहनों को पहले 45 मीटर चौड़ी सड़क पार करनी होगी। इसके बाद वाहन सेक्टर-146 में निर्माणाधीन अंडरपास के जरिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे तक पहुंच सकेंगे। यातायात को सुचारु और सुरक्षित बनाए रखने के लिए 45 मीटर रोड पर ट्रैफिक सिग्नल लगाने की भी योजना पर विचार किया जा रहा है। इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हिंडन नदी पर बनाया गया पुल है। पुल का निर्माण उत्तर प्रदेश स्टेट ब्रिज कॉरपोरेशन द्वारा किया जा रहा है। पुल की संरचना लगभग पूरी हो चुकी है और अब उस पर बिटुमिन तथा मैस्टिक की अंतिम परत बिछाने का कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही दोनों ओर संपर्क मार्गों का निर्माण नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अपने-अपने क्षेत्रों में कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी कार्य निर्धारित समय पर पूरे हुए तो जुलाई में इस मार्ग को आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। 

इस परियोजना से करीब दो लाख लोगों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। विशेष रूप से नोएडा के सेक्टर-151, 153, 154, 155, 156, 157, 159, 160 और 162 सहित कई आवासीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। वहीं ग्रेटर नोएडा के गामा-1, गामा-2, बीटा-1, बीटा-2, डेल्टा, सूरजपुर, साइट-बी, साइट-सी, उद्योग विहार, पुलिस लाइन, ईकोटेक-दो और ईकोटेक-तीन जैसे क्षेत्रों तक पहुंचना भी आसान हो जाएगा। इसके अलावा कलेक्ट्रेट, एलजी चौक, परी चौक और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों तथा उद्योगों से जुड़े लोगों का यात्रा समय भी कम होगा। इससे न केवल यातायात का दबाव घटेगा बल्कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

अंडरपास से बदलेगी कनेक्टिविटी की तस्वीर, लाखों लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

नई लिंक रोड को एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए सेक्टर-145, 146, 155 और 159 के बीच एक्सप्रेसवे के 16.900 किलोमीटर चैनेज पर एक आधुनिक अंडरपास बनाया जा रहा है। लगभग 800 मीटर लंबे इस अंडरपास पर करीब 99.74 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। परियोजना पूरी होने के बाद यह क्षेत्र के नौ गांवों समेत कई सेक्टरों के लिए महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी कॉरिडोर साबित होगा। यातायात व्यवस्था के अनुसार, दिल्ली की ओर जाने वाले वाहन लिंक रोड से आते हुए 45 मीटर रोड पार करेंगे और अंडरपास के माध्यम से सीधे एक्सप्रेसवे पर पहुंच जाएंगे। 

वहीं ग्रेटर नोएडा, आगरा और लखनऊ की ओर जाने वाले वाहन सर्विस रोड के जरिए एक्सप्रेसवे का उपयोग कर सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार अंडरपास निर्माण का लगभग 10 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। एक दिशा की सड़क तैयार हो गई है जबकि दूसरी दिशा में निर्माण कार्य तेजी से जारी है। इस अंडरपास के निर्माण में आधुनिक डायाफ्राम वॉल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक के तहत पहले जमीन के भीतर दोनों ओर मजबूत दीवारें बनाई जाती हैं। इसके बाद ऊपर छत का निर्माण किया जाता है और फिर अंदर की मिट्टी निकालकर सड़क विकसित की जाती है। यह तकनीक संरचना को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाती है। 

हालांकि निर्माण कार्य के दौरान कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हो सकता है, लेकिन परियोजना पूरी होने के बाद इसका लाभ वर्षों तक क्षेत्र के निवासियों और उद्योगों को मिलेगा। यह संपर्क मार्ग नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही दोनों शहरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने से रियल एस्टेट, औद्योगिक विकास और निवेश गतिविधियों को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा। जुलाई में इस परियोजना के शुरू होने के साथ ही लाखों यात्रियों को तेज, सुगम और कम दूरी वाला नया मार्ग मिल जाएगा, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था।

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