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ईरान में हालात गंभीर, भारतीय नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी, तेहरान से तुरंत निकलें

पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े सैन्य संकट की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान और इजरायल के बीच लगातार बढ़ते टकराव, मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे क्षेत्र को तनाव के ऐसे दौर में पहुंचा दिया है, जहां किसी भी समय हालात और विस्फोटक हो सकते हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत ने भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ईरान को लेकर नई और हाई-प्रायोरिटी ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास, तेहरान ने साफ शब्दों में कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिक फिलहाल ईरान की यात्रा से बचें और जो लोग पहले से वहां मौजूद हैं, वे उपलब्ध साधनों के जरिए जल्द से जल्द देश छोड़ने की व्यवस्था करें। पिछले कुछ दिनों में पश्चिम एशिया में जिस तेजी से घटनाक्रम बदले हैं, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। 

बीते 24 घंटों के दौरान क्षेत्र के कई हिस्सों में सैन्य गतिविधियों में अचानक तेजी देखी गई। विभिन्न रणनीतिक ठिकानों पर हमलों, हवाई अभियानों और भारी हथियारों के इस्तेमाल की खबरों ने संकेत दिया है कि संघर्ष अब सीमित दायरे से आगे बढ़ सकता है। इसी कारण भारत सहित कई देश अपने नागरिकों को सतर्क रहने और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। भारतीय दूतावास ने अपने ताजा बयान में कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति लगातार बदल रही है और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। दूतावास ने यह भी कहा कि जो लोग किसी जरूरी कारण से ईरान में रह रहे हैं, वे स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें और अपने संपर्क विवरण भारतीय मिशन के साथ अपडेट रखें। इस बीच ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। 

दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले किए हैं, जिससे पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया है। यह टकराव ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच जारी युद्ध को 100 दिन पूरे हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि संघर्ष के इस नए चरण ने पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है। स्थिति केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं है। लाल सागर क्षेत्र में भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान समर्थित हूती समूह ने लाल सागर से गुजरने वाले इजरायली जहाजों को रोकने की घोषणा की है। लाल सागर विश्व व्यापार का एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है, जहां से हर वर्ष अरबों डॉलर का व्यापारिक माल गुजरता है। ऐसे में यदि इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। हाल के दिनों में सैन्य कार्रवाइयों का दायरा भी बढ़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के एक महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल संयंत्र को निशाना बनाया गया है, जबकि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उसने इजरायल के दो सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं। इन घटनाओं ने दोनों देशों के बीच चल रही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लड़ाई को और तीखा बना दिया है।

कूटनीतिक प्रयासों पर मंडराया संकट

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने उन कूटनीतिक प्रयासों को भी झटका दिया है जो पिछले कुछ समय से संघर्ष को रोकने के लिए किए जा रहे थे। जानकारी के अनुसार, अमेरिका की ओर से लगातार दोनों पक्षों को संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की जा रही थी। हालांकि ताजा हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने इन प्रयासों की राह कठिन बना दी है। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी हिस्सों में हवाई हमले किए। इसके बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई हुई और दोनों देशों के बीच फिर से सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं। 

यदि यह सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है तथा क्षेत्र के अन्य देश भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत पर भी अब अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। पिछले कुछ सप्ताहों से यह उम्मीद जताई जा रही थी कि मध्यस्थ देशों और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के प्रयासों से किसी अस्थायी समझौते का रास्ता निकल सकता है। लेकिन हाल के हमलों ने इन संभावनाओं को कमजोर कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक राजनीति पर भी दिखाई दे रहा है। ऊर्जा बाजार से लेकर समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा तक कई मोर्चों पर चिंता बढ़ गई है। पश्चिम एशिया दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है और यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों पर पड़ सकता है। 

यदि ईरान और इजरायल के बीच सैन्य टकराव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। ऐसे समय में भारत की ओर से जारी ट्रैवल एडवाइजरी को एहतियाती और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत के हजारों नागरिक व्यापार, शिक्षा, रोजगार और अन्य कारणों से पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों में रहते हैं। इसलिए सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा एवं निकासी उपायों की भी तैयारी कर रही है। फिलहाल पश्चिम एशिया में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। लगातार हो रहे हमले, जवाबी सैन्य कार्रवाई और शांति प्रयासों पर बढ़ता संकट यह संकेत दे रहा है कि क्षेत्र अभी भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में दुनिया की निगाहें आने वाले दिनों पर टिकी हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि हालात बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं या फिर क्षेत्र एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।

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