नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर शनिवार को दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर विरोध की आवाजों का केंद्र बना रहा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने यहां पांच घंटे तक प्रदर्शन किया। पार्टी का कहना है कि नीट परीक्षा से जुड़े विवाद ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भरोसे को झटका पहुंचाया है, ऐसे में जिम्मेदारी तय किए बिना मामले को समाप्त नहीं माना जा सकता। प्रदर्शन को लेकर पहले से ही राजधानी में हलचल थी। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया जाएगा। इसी घोषणा के तहत जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए समर्थकों ने भाग लिया।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए थे। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, प्रमुख बस अड्डों और दिल्ली की सीमाओं पर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई थी। अधिकारियों के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया था। प्रदर्शन की खास बात यह रही कि अभिजीत दीपके अमेरिका से दिल्ली लौटने के तुरंत बाद सीधे जंतर-मंतर पहुंचे। उनके हाथ में भारतीय संविधान की प्रति और डॉ. भीमराव अंबेडकर की आत्मकथा थी। उन्होंने इसे आंदोलन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल शर्त है।
धरना स्थल पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी पहुंचे और प्रदर्शन में शामिल हुए।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके साथ पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका भी मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवाद केवल छात्रों का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा विषय है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए शाम पांच बजे तक अनुमति दी गई थी, लेकिन दोपहर बाद ही आंदोलन का मुख्य कार्यक्रम समाप्त हो गया। करीब तीन बजे अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक धरना स्थल से रवाना हो गए, जिसके बाद प्रदर्शन भी समाप्त हो गया।
हालांकि मंच से यह स्पष्ट कर दिया गया कि आंदोलन को समाप्त नहीं किया जा रहा है और आगे की रणनीति जल्द घोषित की जाएगी। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने बार-बार यह सवाल उठाया कि यदि परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं तो जिम्मेदारी तय किए बिना व्यवस्था में विश्वास कैसे बहाल होगा। उन्होंने कहा कि छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
पांच दिन का अल्टीमेटम, 13 जून को फिर आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के समापन के दौरान अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी अपनी मांग से पीछे हटने वाली नहीं है और जवाबदेही तय होना आवश्यक है। उन्होंने केंद्र सरकार को पांच दिन का समय देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जाएगा। अभिजीत ने घोषणा की कि 13 जून को जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि अगली बार आंदोलन का दायरा और बड़ा होगा तथा देश के विभिन्न हिस्सों से लोग इसमें शामिल होंगे। उनका कहना था कि यह केवल एक राजनीतिक या संगठनात्मक मुद्दा नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों की चिंता का विषय है जिन्होंने प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में अपना भविष्य दांव पर लगाया है।
प्रदर्शन के दौरान कई प्रतिभागियों ने भी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की। उनका कहना था कि छात्रों का विश्वास बनाए रखना किसी भी शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहेंगे तो इसका असर युवाओं के मनोबल पर पड़ेगा। हालांकि सरकार की ओर से प्रदर्शन को लेकर तत्काल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, लेकिन आंदोलनकारियों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे इस मुद्दे को लंबे समय तक उठाने की तैयारी में हैं।
जंतर-मंतर पर शनिवार को हुआ प्रदर्शन इसी रणनीति का पहला बड़ा चरण माना जा रहा है। अब निगाहें अगले पांच दिनों पर टिकी हैं। यदि मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती तो 13 जून को राजधानी में एक बार फिर आंदोलन की आवाजें तेज हो सकती हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि शिक्षा व्यवस्था और नीट विवाद को लेकर शुरू हुआ यह विरोध आने वाले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ता है।

















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