केरल के बाद कर्नाटक और गोवा तक पहुंचा मानसून, जून के आखिरी सप्ताह तक उत्तर भारत को करेगा कवर

भीषण गर्मी, लू और उमस से जूझ रहे देश के करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर आखिरकार आ गई । दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में दस्तक दे दी है और इसके साथ ही देशभर में बारिश के मौसम की औपचारिक शुरुआत हो गई है। हर साल की तरह इस बार भी मानसून के आगमन को लेकर उत्सुकता बनी हुई थी, लेकिन मौसम की बदलती परिस्थितियों के कारण इसकी चाल कुछ अलग दिखाई दी। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि मानसून इस बार सामान्य समय से पहले 26 मई तक केरल पहुंच सकता है, लेकिन यह अनुमान सही साबित नहीं हुआ। मानसून न तो तय समय से पहले आया और न ही सामान्य तिथि एक जून को पहुंच पाया। आखिरकार चार जून को मानसून ने केरल तट पर दस्तक दी और इसके साथ ही दक्षिण भारत के कई राज्यों में झमाझम बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। हालांकि शुरुआत में थोड़ी देरी जरूर हुई, लेकिन केरल पहुंचने के बाद मानसून ने तेजी से आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के बड़े हिस्सों को कवर करने के बाद यह गोवा तक पहुंच चुका है। 

दक्षिण भारत के कई शहरों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है। बेंगलुरु, पणजी, पंबन और सलेम सहित कई क्षेत्रों में मानसूनी बादलों ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। अब पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि मानसून उत्तर भारत तक कब पहुंचेगा और गर्मी से राहत कब मिलेगी। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों में मानसून पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश राज्यों तक पहुंच सकता है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले तीन दिनों के भीतर मानसूनी गतिविधियां तेज होने की संभावना है। इसके बाद मानसून पूर्वी भारत की ओर बढ़ेगा और बिहार, झारखंड तथा ओडिशा तक पहुंचने की कोशिश करेगा। 

हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी में फिलहाल कोई मजबूत मौसमी प्रणाली सक्रिय नहीं है, जिसके कारण आगे बढ़ने की इसकी रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है। देश के अधिकांश हिस्सों में इस समय प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं। कहीं गरज-चमक के साथ बारिश हो रही है तो कहीं तेज हवाएं चल रही हैं। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। दोपहर की तेज गर्मी के बाद शाम के समय बादल छा रहे हैं और कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश भी दर्ज की जा रही है। मौसम विशेषज्ञ इसे मानसून से पहले की सामान्य प्रक्रिया मान रहे हैं। उत्तराखंड की बात करें तो मानसून की हर गतिविधि यहां विशेष महत्व रखती है। राज्य की कृषि, पेयजल व्यवस्था, नदियों का जलस्तर और चारधाम यात्रा तक मानसून से प्रभावित होती है। 

मौसम विभाग के अनुसार इस बार उत्तराखंड में मानसून 25 जून के आसपास पहुंच सकता है

मौसम विभाग के अनुसार इस बार उत्तराखंड में मानसून 25 जून के आसपास पहुंच सकता है। सामान्य तौर पर मानसून 20 जून के आसपास राज्य में प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी मानी जा रही है। हालांकि मानसून के आने से पहले ही प्रदेश के पर्वतीय जिलों में प्री-मानसून बारिश का दौर तेज हो गया है। देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल सहित कई जिलों में पिछले दिनों बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिली हैं। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है। दूसरी ओर प्रशासन भी मानसून को लेकर सतर्क हो गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़क बाधित होने और नदियों-नालों के उफान पर आने की आशंका को देखते हुए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 

उत्तराखंड के लिए मानसून केवल बारिश का मौसम नहीं होता बल्कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था, कृषि और पर्यटन से भी जुड़ा हुआ है। धान की खेती से लेकर पेयजल स्रोतों के पुनर्भरण तक मानसून की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है। यही वजह है कि किसान, पर्यटन व्यवसायी और आम लोग मानसून के आगमन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस बार भी अच्छी बारिश की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे जलस्रोतों को नया जीवन मिलेगा और खेती-किसानी को भी फायदा पहुंचेगा। उत्तर प्रदेश में मानसून के 20 से 25 जून के बीच पहुंचने की संभावना जताई गई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में मानसून पहले पहुंचेगा और इसके बाद पश्चिमी जिलों की ओर बढ़ेगा। फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में प्री-मानसून बारिश के कारण तापमान में कमी आई है। किसानों को उम्मीद है कि समय पर मानसून पहुंचने से खरीफ फसलों की बुआई सुचारू रूप से हो सकेगी। बिहार में मानसून के 15 जून के आसपास पहुंचने का अनुमान है। राज्य के किसानों की निगाहें भी आसमान पर टिकी हुई हैं क्योंकि कृषि का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर करता है। मौसम विभाग का मानना है कि पूर्वी भारत में मानसून की गतिविधियां अगले कुछ दिनों में और मजबूत हो सकती हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मानसून के 25 जून के आसपास पहुंचने की संभावना है। 

फिलहाल राजधानी में गर्मी और उमस का दौर जारी है, हालांकि बीच-बीच में होने वाली प्री-मानसून बारिश लोगों को राहत दे रही है। दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब में भी मानसून जून के अंतिम सप्ताह तक पहुंच सकता है। इन राज्यों में कृषि क्षेत्र मानसून पर काफी हद तक निर्भर करता है और अच्छी बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आती है। हिमाचल प्रदेश में भी मानसून के जून के तीसरे और चौथे सप्ताह के बीच पहुंचने की संभावना है। पर्वतीय राज्य होने के कारण हिमाचल में मानसून जहां जलस्रोतों और खेती के लिए वरदान साबित होता है, वहीं भूस्खलन और सड़क अवरोध जैसी चुनौतियां भी साथ लेकर आता है। यही स्थिति उत्तराखंड में भी देखने को मिलती है, जहां मानसून राहत और चुनौती दोनों का पर्याय बन जाता है।

फिलहाल देशभर में मानसून की यात्रा पर नजर बनी हुई है। केरल से शुरू हुआ यह सफर अब धीरे-धीरे पूरे देश को अपनी चपेट में लेगा। दक्षिण भारत में बारिश का दौर शुरू हो चुका है और अब उत्तराखंड समेत पूरे उत्तर भारत को मानसून की पहली तेज बौछारों का इंतजार है। यदि मौसम विभाग के अनुमान सही साबित होते हैं तो जून के अंतिम सप्ताह तक उत्तर भारत के अधिकांश हिस्से मानसूनी बारिश से सराबोर हो जाएंगे। तब तक प्री-मानसून की बारिश लोगों को राहत देती रहेगी और आसमान की ओर उठती निगाहें मानसून के अगले कदम का इंतजार करती रहेंगी।

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