उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दिया। राजधानी लखनऊ में उन्होंने औषधीय पौधों से समृद्ध ‘महर्षि चरक औषधि वन’ की स्थापना कर हर नागरिक से प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता इसके लिए आवश्यक है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपनी मां के नाम कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल भी करें। विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री ने सुबह 5, कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर पौधारोपण कर राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की।
इसके बाद वे लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र पहुंचे, जहां वन विभाग की ओर से विकसित किए गए ‘महर्षि चरक औषधि वन’ का उद्घाटन किया। इस औषधि वन में नीम, अर्जुन, अशोक, जामुन, बेल, आंवला, गिलोय सहित दो दर्जन से अधिक प्रजातियों के 200 से ज्यादा औषधीय पौधे लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद स्कूली बच्चों के साथ पौधारोपण किया और उन्हें मिठाई बांटकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज लगाए जाने वाले पौधे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण, शुद्ध वायु और बेहतर जीवन प्रदान करेंगे। इसलिए पौधारोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।
यह अभियान केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पौधों के संरक्षण और उनके विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस वर्ष के महाअभियान के लिए 50 करोड़ से अधिक पौधे नर्सरियों में तैयार किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिटी फॉरेस्ट, ग्राम वन और सामुदायिक वन क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हर नागरिक एक पौधा लगाकर उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित करे तो पर्यावरणीय चुनौतियों से काफी हद तक मुकाबला किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन और मौसम चक्र में हो रहे बदलावों पर चिंता जताते हुए कहा कि पूरी दुनिया आज खाद्यान्न संकट, जल संकट और प्राकृतिक आपदाओं जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। लगातार बदलता मौसम मानवता को चेतावनी दे रहा है कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में परिस्थितियां और अधिक गंभीर हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा हमेशा से प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना से जुड़ी रही है। वेदों और भारतीय संस्कृति में धरती को माता का दर्जा दिया गया है। भारतीय समाज सदियों से स्वयं को धरती माता का पुत्र मानता आया है। यही कारण है कि यहां वृक्षों, नदियों, पर्वतों और प्राकृतिक संसाधनों को पूजनीय माना गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि करीब 25 वर्ष पहले और आज के मौसम चक्र में लगभग एक से डेढ़ महीने का अंतर देखने को मिल रहा है। इसका सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। समय पर बारिश न होना, अत्यधिक वर्षा होना या लंबे समय तक सूखा पड़ना कृषि उत्पादन को प्रभावित करता है। उत्तर प्रदेश और भारत जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों में मौसम का असंतुलन सीधे किसानों की आय और खाद्यान्न उत्पादन पर असर डालता है। उन्होंने कहा कि यदि जलवायु परिवर्तन की गति इसी तरह बढ़ती रही तो भविष्य में अतिवृष्टि और अनावृष्टि जैसी स्थितियां और अधिक गंभीर हो सकती हैं। इससे खाद्यान्न संकट की आशंका भी पैदा हो सकती है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण केवल प्रकृति की रक्षा का विषय नहीं बल्कि मानव जीवन, कृषि और अर्थव्यवस्था की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में हुआ था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में हुआ था। उनका मूल नाम अजय सिंह बिष्ट है। प्रारंभिक शिक्षा उत्तराखंड में प्राप्त करने के बाद उन्होंने गणित विषय में स्नातक की पढ़ाई की। युवावस्था में ही वे गोरखनाथ मठ से जुड़े और बाद में महंत अवैद्यनाथ के शिष्य बने। सन 1994 में उन्होंने संन्यास ग्रहण किया और उन्हें योगी आदित्यनाथ नाम मिला। वर्ष 1998 में वे पहली बार गोरखपुर लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए। इसके बाद लगातार पांच बार लोकसभा पहुंचे और पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे।
मार्च 2017 में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया।
वर्ष 2022 में भाजपा ने उनके नेतृत्व में दोबारा विधानसभा चुनाव जीता और वे लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। योगी आदित्यनाथ को कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचा विकास, निवेश और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। अपने राजनीतिक जीवन के साथ-साथ वे पर्यावरण संरक्षण, गौसंवर्धन, जल संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे अभियानों को भी लगातार बढ़ावा देते रहे हैं।
उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाकर कई रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर अपने जन्मदिन के अवसर पर औषधि वन की स्थापना कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर यह संदेश देने का प्रयास किया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे केवल पौधे लगाएं ही नहीं, बल्कि उनकी देखभाल का भी संकल्प लें, क्योंकि हर पौधा आने वाले कल की सुरक्षा का आधार है।

















Leave a Reply