भारत में स्वच्छ और सस्ते ईंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मारुति सुजुकी ने अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार वैगनआर पेश कर दी है। यह सिर्फ कंपनी की ही नहीं, बल्कि देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार है, जो E20 से लेकर E85 और यहां तक कि 100 प्रतिशत शुद्ध इथेनॉल (E100) पर भी चल सकती है। इस लॉन्च को भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब तक देश में अधिकांश वाहन पेट्रोल या सीमित इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलते रहे हैं, लेकिन नई वैगनआर अलग-अलग अनुपात वाले इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चलने में सक्षम होगी।
इससे पेट्रोल आयात पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ प्रदूषण घटाने और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद रहे। हाल ही में केंद्र सरकार ने E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों के लिए भी मानक जारी किए हैं, ऐसे में यह लॉन्च सरकार की इथेनॉल आधारित ऊर्जा नीति को और मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
यहां आपको बता दें कि फ्लेक्सिबल फ्यूल व्हीकल (FFV) ऐसे वाहन होते हैं जिनका इंजन पेट्रोल और इथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों पर आसानी से काम कर सकता है। वर्तमान में अधिकांश भारतीय वाहन E20 ईंधन के अनुरूप बनाए जा रहे हैं, लेकिन नई वैगनआर E85 और E100 तक के ईंधन पर भी चल सकेगी। इस तकनीक से पेट्रोल की खपत कम होगी और घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
लॉन्चिंग में पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताई बड़ी जरूरत
लॉन्च कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहन देश में वायु प्रदूषण कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्वच्छ ईंधन आधारित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। साथ ही वाहन स्क्रैपेज नीति को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाया जा सके। गडकरी ने ऑटोमोबाइल कंपनियों से यह भी अपील की कि वे ऐसी तकनीक विकसित करें जिससे पुरानी गाड़ियों को फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में बदला जा सके और उन्हें यूरो-6 उत्सर्जन मानकों के अनुरूप बनाया जा सके।
उनका कहना था कि ऐसा होने पर करोड़ों पुराने वाहनों से होने वाले प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
मारुति सुजुकी के वरिष्ठ अधिकारी पार्थो बनर्जी ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में देश में बिकने वाले कुल ग्रीन वाहनों में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी उनकी कंपनी की रही। उन्होंने कहा कि कंपनी वैकल्पिक ईंधन तकनीकों पर लगातार काम कर रही है और फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक भारत जैसे बड़े बाजार के लिए एक व्यवहारिक समाधान साबित हो सकती है। नितिन गडकरी ने भविष्य के ईंधनों को लेकर भी बड़े संकेत दिए। उन्होंने बताया कि सरकार डीजल में 15 प्रतिशत आइसोब्यूटानॉल मिश्रण की संभावना पर विचार कर रही है।
इसके अलावा सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे विमानन क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी। मारुति सुजुकी की फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर का लॉन्च केवल एक नई कार की शुरुआत नहीं है, बल्कि भारत के ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र में एक नई दिशा का संकेत भी है। अब तक हरित परिवहन की चर्चा मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित थी, लेकिन फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक ने एक ऐसा विकल्प पेश किया है जो मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भी तेजी से अपनाया जा सकता है। आने वाले समय में यह तकनीक भारत को स्वच्छ, किफायती और आत्मनिर्भर ईंधन व्यवस्था की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

















Leave a Reply