कर्नाटक की राजनीति में बुधवार को एक नया अध्याय जुड़ गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और आठ बार विधायक रहे डी.के. शिवकुमार ने राज्य के 34वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। बेंगलुरु स्थित लोक भवन में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही पिछले कुछ दिनों से चल रही नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो गई और निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने सत्ता की कमान शिवकुमार को सौंप दी। कांग्रेस संगठन और सरकार दोनों में मजबूत पकड़ रखने वाले डी.के. शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। लंबे समय से कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकार रहे शिवकुमार को राज्य में पार्टी की मजबूती का प्रमुख चेहरा माना जाता है। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना किया और संगठन को मजबूत आधार प्रदान किया।
शपथ ग्रहण समारोह से पहले शिवकुमार ने भावुक क्षणों के बीच अपनी मां गौरम्मा का आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री बनने से पहले उन्होंने अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और पारिवारिक परंपराओं का प्रतीक बताया। लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, कांग्रेस शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री, केंद्रीय स्तर के वरिष्ठ नेता तथा हजारों कार्यकर्ता मौजूद रहे। समारोह को शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा गया, जिसमें कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। शिवकुमार की ताजपोशी केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का भी संकेत है। कांग्रेस नेतृत्व राज्य में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।
यही वजह है कि नई मंत्रिपरिषद के गठन में विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। कांग्रेस के भीतर लंबे समय से सिद्दरमैया और शिवकुमार दोनों को राज्य की राजनीति के दो सबसे प्रभावशाली नेताओं के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन को पार्टी के अंदर संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने इस बदलाव को सुचारू तरीके से अंजाम देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि कांग्रेस में सत्ता हस्तांतरण लोकतांत्रिक और सहमति आधारित प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के रूप में शिवकुमार के सामने विकास परियोजनाओं को गति देने, निवेश आकर्षित करने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आगामी चुनावों से पहले जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी। इसके साथ ही उन्हें संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
नई सरकार के गठन के दौरान कांग्रेस ने राज्य के प्रमुख सामाजिक समूहों को साधने की रणनीति अपनाई
नई सरकार के गठन के दौरान कांग्रेस ने राज्य के प्रमुख सामाजिक समूहों को साधने की रणनीति अपनाई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दलित, लिंगायत, वोक्कालिगा और अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) समुदायों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है। कांग्रेस नेतृत्व मानता है कि कर्नाटक की राजनीति में सामाजिक समीकरणों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में मंत्रिमंडल गठन और भविष्य के विस्तार में भी इन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद डी.के. शिवकुमार के सामने प्रशासनिक दक्षता साबित करने की चुनौती होगी। राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान करना तथा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय पर पूरा कराना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। इसके अलावा आगामी वर्षों में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और 2028 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार के प्रदर्शन पर भी सभी की नजरें रहेंगी। डी.के. शिवकुमार के शपथ ग्रहण के साथ कांग्रेस ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि पार्टी नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद एकजुट है। सिद्दरमैया से शिवकुमार तक सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब राज्य की जनता और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर इस बात पर रहेगी कि नई सरकार अपने वादों और अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरती है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ 13 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। कांग्रेस नेतृत्व ने क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल का प्रारंभिक स्वरूप तैयार किया है। नई सरकार में जी. परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। इसके अलावा यतींद्र सिद्दरमैया, यू.टी. खादर, एम.बी. पाटिल, के.जे. जॉर्ज, के.एच. मुनियप्पा, सतीश जारकीहोली, रामलिंगा रेड्डी, कृष्णा बायरेगौड़ा, प्रियंका खड़गे, ईश्वर खंड्रे, बायराथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

















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