16 जून से हिमाचल प्रदेश में डिजिटल जनगणना की होगी शुरुआत, घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक

हिमाचल प्रदेश में 16 जून से देश की नई डिजिटल जनगणना प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। राज्य में पहली बार जनगणना का पूरा कार्य आधुनिक डिजिटल तकनीक के जरिए किया जाएगा। इसके तहत प्रगणक घर-घर जाकर मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से जानकारी जुटाएंगे, जबकि नागरिकों को स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी गणना करने का विकल्प भी दिया गया है। शिमला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डायरेक्टर ऑफ सेंसेस दीप शिखा शर्मा ने बताया कि राज्य में 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक डोर-टू-डोर सर्वेक्षण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान प्रत्येक परिवार से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। ये सवाल घर की स्थिति, परिवार के सदस्यों, मूलभूत सुविधाओं और आधुनिक संसाधनों से जुड़े होंगे । 

उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं होगी, बल्कि यह राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे की वास्तविक तस्वीर सामने लाने का काम करेगी। सरकार द्वारा पूरी प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। जनगणना अभियान के तहत प्रगणकों को अत्याधुनिक एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध कराया जाएगा। इसी एप के जरिए मौके पर ही डेटा दर्ज किया जाएगा, जिससे कागजी प्रक्रिया की जरूरत लगभग समाप्त हो जाएगी। 

इससे डेटा प्रोसेसिंग की गति कई गुना बढ़ेगी और मानवीय त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। दीप शिखा शर्मा ने कहा कि राज्य में जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में घरों की गणना और आवासीय सुविधाओं से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि दूसरे चरण में फरवरी 2027 के दौरान लोगों की गणना की जाएगी। 

उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सही और सटीक जानकारी देना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसी आधार पर भविष्य की सरकारी योजनाएं और नीतियां तैयार होती हैं।सरकार का कहना है कि इससे डेटा रियल टाइम में उपलब्ध होगा और रिपोर्ट तैयार करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। साथ ही आंकड़ों की सटीकता भी बढ़ेगी। डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से डेटा संग्रहण, निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी मानी जा रही है।

घर की स्थिति से लेकर परिवार तक पूछे जाएंगे सवाल

जनगणना के पहले चरण में परिवारों से घर की संरचना और रहने की स्थिति से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। पहले आठ प्रश्न घर की प्रकृति पर आधारित होंगे। इनमें मकान कच्चा है या पक्का, दीवार और छत में किस सामग्री का उपयोग हुआ है, फर्श किस प्रकार का है और घर की स्थिति कैसी है जैसी जानकारियां शामिल रहेंगी। इसके बाद 9 से 16 नंबर तक के प्रश्न परिवार की संरचना से जुड़े होंगे। इनमें परिवार के कुल सदस्यों की संख्या, परिवार का मुखिया कौन है, पुरुष और महिलाओं की संख्या कितनी है, घर स्वयं का है या किराए का, घर में कुल कमरे कितने हैं और विवाहित दंपतियों की संख्या जैसी जानकारियां ली जाएंगी। 

17 से 25 नंबर तक के प्रश्न घरों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं से संबंधित होंगे। इसमें बिजली, पीने के पानी, शौचालय, बाथरूम और अन्य आवश्यक सुविधाओं के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। वहीं 26 से 33 नंबर तक के सवाल आधुनिक संसाधनों और तकनीकी सुविधाओं से जुड़े होंगे। इनमें रेडियो, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप, मोबाइल, कार, जीप और अन्य वाहनों से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी। सरकार का मानना है कि इन आंकड़ों से प्रदेश में जीवन स्तर और डिजिटल पहुंच की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सकेगा। प्रदेश में पहली बार नागरिकों को स्वयं अपनी जनगणना करने की सुविधा भी दी गई है। 

इसके लिए 1 जून से ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा। नागरिक 1 जून से 15 जून 2026 तक सुरक्षित पोर्टल se.census.gov.in पर लॉगिन कर अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। ऑनलाइन स्व-गणना पूरी करने के बाद नागरिकों को 11 अंकों का विशेष स्व-गणना आईडी नंबर जारी किया जाएगा। जब 16 जून से 15 जुलाई के बीच प्रगणक घर-घर पहुंचेंगे, तब नागरिकों को यही आईडी नंबर बताना होगा। इसके बाद पोर्टल पर पहले से भरी गई जानकारी सीधे प्रगणक के मोबाइल एप में दिखाई दे जाएगी। इससे दोबारा जानकारी भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक सरल बन जाएगी। इस बार जनगणना कार्य में कागजी फॉर्म का उपयोग लगभग समाप्त कर दिया गया है। प्रगणकों को एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन दिया जाएगा, जिसके जरिए मौके पर ही जानकारी दर्ज की जाएगी।

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