राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ रही गर्मी ने बिजली की खपत को नए स्तर पर पहुंचा दिया है। मई के अंतिम सप्ताह में तापमान लगातार ऊंचा बना हुआ है, जिसके चलते घरों, दफ्तरों, बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसका सीधा असर राजधानी की बिजली मांग पर दिखाई दे रहा है। पिछले एक सप्ताह से दिल्ली की अधिकतम बिजली मांग लगातार 8 हजार मेगावाट के ऊपर बनी हुई है और ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा 9 हजार मेगावाट के पार भी पहुंच सकता है।
बिजली की बढ़ती खपत और संभावित दबाव को देखते हुए दिल्ली सरकार ने अब ऊर्जा बचत को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने सभी विभागों, कार्यालयों और प्रशासनिक इकाइयों को बिजली के दुरुपयोग को रोकने तथा ऊर्जा-कुशल व्यवस्थाओं को अपनाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सरकारी दफ्तरों में अनावश्यक रूप से जलने वाली लाइटों को बंद करने, एसी का तापमान नियंत्रित रखने और बिजली की खपत पर निगरानी रखने को कहा गया है।
दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग यानी जीएडी की ओर से जारी सर्कुलर में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी कार्यालयों में एयर कंडीशनर 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच ही चलाए जाएं। इसके अलावा दिन के समय प्राकृतिक रोशनी का अधिक इस्तेमाल करने और खाली कमरों में पंखे, एसी व लाइट बंद रखने पर जोर दिया गया है। विभागों से कहा गया है कि ऊर्जा बचत को केवल औपचारिकता न माना जाए बल्कि इसे नियमित प्रशासनिक संस्कृति का हिस्सा बनाया जाए। सरकार का मानना है कि यदि सरकारी कार्यालयों में बिजली की अनावश्यक खपत पर नियंत्रण किया जाए तो बड़ी मात्रा में ऊर्जा बचाई जा सकती है। अधिकारियों के मुताबिक गर्मियों में राजधानी की कुल बिजली खपत का बड़ा हिस्सा एयर कंडीशनर और कूलिंग सिस्टम से जुड़ा होता है। ऐसे में एसी के तापमान में मामूली बदलाव भी बिजली बचत में अहम भूमिका निभा सकता है।
दिल्ली सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब देशभर में गर्मी का असर बढ़ रहा है और ऊर्जा मांग लगातार रिकॉर्ड स्तर छू रही है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान में और वृद्धि होती है तो बिजली की मांग में तेजी से उछाल आ सकता है। इसी आशंका को देखते हुए सरकार पहले से तैयारी में जुटी हुई है ताकि राजधानी में बिजली आपूर्ति बाधित न हो और पीक डिमांड के दौरान भी स्थिति नियंत्रण में बनी रहे। सरकार द्वारा जारी निर्देशों में केवल बिजली ही नहीं बल्कि ईंधन बचत पर भी विशेष जोर दिया गया है। वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समय-समय पर ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत की अपील की जाती रही है। इसी दिशा में दिल्ली सरकार ने भी कई स्तरों पर कदम उठाने शुरू किए हैं।
रेखा गुप्ता सरकार ने विभागों से ऊर्जा खर्च कम करने के लिए व्यवहारिक उपाय अपनाने को कहा है। इसमें सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था को बढ़ावा देना भी शामिल है ताकि दफ्तरों में बिजली की खपत और सड़कों पर ईंधन उपयोग दोनों को कम किया जा सके। इसके अलावा मंत्रियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकारी वाहनों के बजाय दिल्ली मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी सार्वजनिक परिवहन अपनाते हैं तो इससे पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी आएगी, साथ ही ट्रैफिक और प्रदूषण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। इसी सोच के तहत “मेट्रो मंडे” जैसी पहल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सप्ताह के पहले कार्य दिवस पर सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों को छोटा करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। सरकार का तर्क है कि प्रशासनिक स्तर पर यदि ऊर्जा बचत की शुरुआत की जाए तो आम जनता में भी इसके प्रति जागरूकता बढ़ेगी। यही वजह है कि अब विभागीय स्तर पर बिजली और ईंधन बचत को लेकर नियमित मॉनिटरिंग की तैयारी भी की जा रही है।
दिल्ली सरकार का बिजली बचत के साथ आपूर्ति व्यवस्था मजबूत रखने पर जोर
दिल्ली सरकार और बिजली वितरण कंपनियां इस समय बढ़ती मांग को संभालने के लिए लगातार समन्वय में काम कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार राजधानी में बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। पावर बैकअप, ट्रांसफॉर्मरों की निगरानी और तकनीकी टीमों की तैनाती बढ़ाई गई है ताकि किसी भी क्षेत्र में ओवरलोडिंग की स्थिति बनने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। ऊर्जा विभाग का कहना है कि दिल्ली में हर साल गर्मियों के दौरान बिजली की मांग नए रिकॉर्ड बनाती है। पिछले कुछ वर्षों में एयर कंडीशनर और घरेलू उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बिजली खपत का पैटर्न तेजी से बदला है।
इस बार भी शुरुआती गर्मी के साथ ही बिजली मांग तेजी से बढ़ी है और जून में इसके और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। यदि नागरिक भी बिजली बचत को लेकर सावधानी बरतें तो बड़े स्तर पर ऊर्जा संरक्षण संभव है। जरूरत न होने पर बिजली उपकरण बंद रखना, एलईडी लाइटों का उपयोग करना, एसी का तापमान बहुत कम न रखना और ऊर्जा दक्ष उपकरण अपनाना जैसे कदम बिजली खपत को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
सरकार ने विभागों से यह भी कहा है कि वे अपने कार्यालयों में नियमित ऊर्जा ऑडिट कराएं और यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी अनावश्यक बिजली खर्च न हो। पुराने और ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरणों को बदलने तथा ऊर्जा दक्ष तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया गया है। दिल्ली सरकार का मानना है कि बढ़ती गर्मी और ऊर्जा मांग के इस दौर में बिजली बचत केवल सरकारी आदेश का विषय नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि प्रशासन और आम लोग मिलकर ऊर्जा संरक्षण के प्रयास करें तो न केवल बिजली संकट से बचा जा सकता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

















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