देशभर में ठेका व्यवस्था के तहत काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने नए श्रम नियमों के तहत ऐसा प्रावधान लागू किया है, जिससे अब नियमित रूप से ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को हर वर्ष वेतन वृद्धि देना अनिवार्य हो जाएगा। इस फैसले को लंबे समय से वेतन बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे श्रमिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब तक बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी थे जो वर्षों तक एक ही वेतन पर काम करने को मजबूर थे। कई निजी और सरकारी संस्थानों में ठेका व्यवस्था के तहत कार्यरत कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं। वेतन बढ़ोतरी भी पूरी तरह ठेकेदार या संस्थान की इच्छा पर निर्भर रहती थी। लेकिन अब नए नियम लागू होने के बाद स्थिति बदलने जा रही है। केंद्र सरकार के नए श्रम प्रावधान के तहत अब ठेका कर्मचारियों को हर साल कम से कम दो प्रतिशत वेतन वृद्धि देना आवश्यक होगा।
यानी कोई भी ठेकेदार या संस्था अपने नियमित ठेका कर्मचारियों को वार्षिक वेतन बढ़ोतरी देने से इनकार नहीं कर सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे श्रमिकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें कार्यस्थल पर अधिक सुरक्षा और सम्मान मिलेगा। यह नया प्रावधान व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों से जुड़े केंद्रीय नियमों के अंतर्गत लागू किया गया है। इसके तहत उन कर्मचारियों को लाभ मिलेगा जो किसी तीसरे पक्ष के माध्यम से नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं। यानी यदि कोई व्यक्ति किसी ठेकेदार के जरिए किसी संस्था में लगातार सेवा दे रहा है, तो वह इस अनिवार्य वेतन वृद्धि का हकदार माना जाएगा। यह कदम उन लाखों कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो लंबे समय से कम वेतन और अस्थिर नौकरी की समस्या से जूझ रहे थे। अक्सर देखा जाता था कि ठेका कर्मचारियों को वर्षों तक बिना वेतन बढ़ोतरी के काम करना पड़ता था, जबकि महंगाई लगातार बढ़ती रहती थी। ऐसे में यह नया नियम उनके लिए आर्थिक राहत लेकर आया है।
जानकारों के अनुसार, इस नियम का सबसे अधिक प्रभाव उन क्षेत्रों में देखने को मिलेगा जहां बड़ी संख्या में ठेका कर्मचारी कार्यरत हैं। रेलवे, सरकारी बैंक, खदानें, तेल क्षेत्र, बड़े बंदरगाह, हवाई सेवाएं, दूरसंचार सेवाएं, बीमा क्षेत्र और केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों में बड़ी संख्या में कर्मचारी ठेका व्यवस्था के तहत काम करते हैं। अब इन क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को हर वर्ष न्यूनतम वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे श्रमिकों का मनोबल बढ़ेगा और कार्यस्थलों पर स्थिरता आएगी। कई बार कम वेतन और बढ़ोतरी न मिलने के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता था, जिसका असर कामकाज पर भी पड़ता था। अब इस नियम के बाद कर्मचारियों को यह भरोसा रहेगा कि उनकी मेहनत के साथ उनके वेतन में भी नियमित बढ़ोतरी होगी।
यह सुविधा केवल उन कर्मचारियों को मिलेगी जो ठेकेदार के माध्यम से नियमित रूप से काम कर रहे हैं
नए नियम के अनुसार, यह सुविधा केवल उन कर्मचारियों को मिलेगी जो ठेकेदार के माध्यम से नियमित रूप से काम कर रहे हैं। सीधे किसी संस्था के वेतन ढांचे में शामिल कर्मचारियों पर यह नियम लागू नहीं होगा। इसके अलावा निश्चित अवधि के लिए नियुक्त किए गए कर्मचारियों को भी इस प्रावधान का लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि उन्हें ठेका श्रमिक की श्रेणी में नहीं रखा गया है।
यह नियम फिलहाल उन्हीं संस्थानों पर लागू होगा जहां केंद्र सरकार मुख्य प्राधिकरण के रूप में कार्य करती है। राज्यों के अधीन आने वाले संस्थानों में इस तरह का प्रावधान लागू करने के लिए संबंधित राज्य सरकारों को अपने नियम अधिसूचित करने होंगे। यानी आने वाले समय में अलग-अलग राज्य भी इस दिशा में कदम उठा सकते हैं।
इस नियम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब वेतन वृद्धि केवल दया या इच्छा का विषय नहीं रहेगी, बल्कि कर्मचारियों का कानूनी अधिकार बन जाएगी। यदि कोई ठेकेदार या संस्था निर्धारित वेतन वृद्धि देने से इनकार करती है, तो कर्मचारी इसके खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करा सकेंगे। श्रमिकों को इसके लिए कानूनी संरक्षण भी मिलेगा। श्रम मामलों के जानकारों का कहना है कि देश में ठेका श्रमिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में काम ठेका व्यवस्था के माध्यम से कराया जाता है। ऐसे में कर्मचारियों के अधिकारों को सुरक्षित करना बेहद जरूरी था। यह नया नियम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से ठेका कर्मचारियों को नियमित वेतन वृद्धि देने की मांग की जा रही थी।
महंगाई बढ़ने के बावजूद कई श्रमिक बेहद कम वेतन पर काम करने को मजबूर थे। अब यह नियम लागू होने के बाद लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि केवल न्यूनतम वेतन वृद्धि तय कर देना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि सभी संस्थान नियमों का पालन करें और कर्मचारियों को समय पर बढ़ा हुआ वेतन मिले। इसके लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था की भी आवश्यकता होगी। फिलहाल केंद्र सरकार के इस फैसले को श्रमिक हित में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यदि राज्य सरकारें भी इसी तरह के नियम लागू करती हैं, तो देशभर के करोड़ों ठेका कर्मचारियों को इसका लाभ मिल सकता है। इससे न केवल श्रमिकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि कार्यस्थलों पर उनके अधिकार भी पहले से अधिक सुरक्षित हो सकेंगे।

















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