चारधाम यात्रा में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, 20 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 40 लाख से ज्यादा कराया रजिस्ट्रेशन

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस बार नए रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही है। यात्रा शुरू होने के ठीक एक महीने के भीतर ही श्रद्धालुओं की संख्या 20 लाख के पार पहुंच चुकी है। बाबा केदार, बद्री विशाल, मां गंगा और मां यमुना के दर्शन के लिए देश-विदेश से उमड़ रही आस्था की इस भीड़ ने पिछले वर्षों के सभी आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। इस बार यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह इतना अधिक है कि अब तक 40 लाख से ज्यादा लोग चारधाम यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। पिछले साल 2025 में शुरुआती एक महीने में जहां करीब 28 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया था, वहीं इस बार यह आंकड़ा लगभग 43 प्रतिशत बढ़ गया है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष चारधाम यात्रा के पहले महीने में करीब 17.17 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे, जबकि इस बार यह संख्या बढ़कर 20 लाख से अधिक हो गई है। यानी बीते साल की तुलना में लगभग 10.62 प्रतिशत अधिक श्रद्धालु अब तक चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। 

पहाड़ों में लगातार बदलते मौसम, कठिन रास्तों और लंबी पैदल यात्राओं के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हो रहा। सुबह से देर रात तक धामों में भक्तों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। हर-हर महादेव और जय बद्री विशाल के जयघोष से पूरा हिमालयी क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। सबसे ज्यादा भीड़ इस बार बाबा केदार की नगरी केदारनाथ धाम में देखने को मिल रही है। रुद्रप्रयाग स्थित केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। कपाट खुलने के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं धाम पहुंचे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की पहली पूजा कराई गई थी। कपाट खुलने के बाद से बाबा केदार के दरबार में भक्तों का सैलाब लगातार उमड़ रहा है। प्रशासन के अनुसार, यात्रा के पहले ही महीने में 7.90 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। वहीं, केदारनाथ यात्रा के लिए 13.5 लाख से ज्यादा लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इसके अलावा 52 हजार से अधिक छोटे और बड़े वाहनों का पंजीकरण भी दर्ज किया गया है। 

बद्रीनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। भगवान बद्रीनाथ के कपाट 23 अप्रैल 2026 को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। कपाट खुलते ही बद्री विशाल के दर्शन के लिए भक्तों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम पहुंच चुके हैं। वहीं 12.15 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बद्रीनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण कराया है। चारधाम यात्रा के दूसरे पड़ाव यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर खोले गए थे। कपाट खुलने के साथ ही मां यमुना के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया। अब तक 3.26 लाख से अधिक श्रद्धालु यमुनोत्री धाम पहुंचकर पूजा-अर्चना कर चुके हैं, जबकि 6.90 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। 

गंगोत्री धाम में भी इस बार आस्था का अद्भुत उत्साह दिखाई दे रहा है। चारधाम यात्रा की शुरुआत गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही हुई थी। 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया के दिन दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर गंगोत्री और 12 बजकर 35 मिनट पर यमुनोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे। गंगोत्री धाम में पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न हुई थी, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 3.20 लाख से अधिक श्रद्धालु गंगोत्री धाम पहुंचकर मां गंगा के चरणों में शीश नवां चुके हैं। वहीं 7.12 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगोत्री यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं।

चारधाम यात्रा मार्ग में बदलते मौसम और स्वास्थ्य चुनौतियों ने बढ़ाई चिंता

चारधाम यात्रा जहां आस्था और श्रद्धा का विशाल केंद्र बनी हुई है, वहीं लगातार बदलते मौसम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। यात्रा मार्गों पर अचानक मौसम बदलने, ठंड, बारिश और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ रही है। यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से लेकर अब तक कुल 75 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई है। इनमें सबसे अधिक 38 मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं। इसके अलावा बद्रीनाथ में 19, यमुनोत्री में 10 और गंगोत्री धाम में 8 श्रद्धालुओं की जान गई है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार यात्रियों से स्वास्थ्य जांच कराने, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने और मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील कर रहे हैं। 

यात्रा मार्गों पर मेडिकल टीमों, एंबुलेंस और स्वास्थ्य शिविरों की संख्या भी बढ़ाई गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तुरंत सहायता मिल सके।

चारधाम यात्रा में उमड़ रही रिकॉर्ड भीड़ यह साबित कर रही है कि देवभूमि उत्तराखंड में आस्था का प्रवाह पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है। आने वाले दिनों में यात्रा और तेज होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि जून और जुलाई को यात्रा का पीक सीजन माना जाता है। प्रशासन के सामने जहां श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बनाए रखने की चुनौती है, वहीं श्रद्धालुओं के उत्साह ने इस बार की चारधाम यात्रा को ऐतिहासिक बना दिया है।

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