बंगाल में सत्ता परिवर्तन का भव्य समारोह, शुभेंदु अधिकारी ने संभाली कमान, प्रदेश में पहली बार भाजपा सरकार 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार, 9 मई 2026 का दिन ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया। जिस बंगाल को कभी वामपंथ का अभेद्य किला माना गया, फिर जहां तृणमूल कांग्रेस ने डेढ़ दशक तक अपना मजबूत राजनीतिक वर्चस्व कायम रखा, उसी बंगाल में अब भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता पर कब्जा कर लिया है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य में भाजपा सरकार की औपचारिक शुरुआत कर दी। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनी और लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक संघर्ष सत्ता परिवर्तन में बदल गया। यह जीत केवल एक चुनावी परिणाम नहीं मानी जा रही, बल्कि भाजपा के लिए वैचारिक और राजनीतिक रूप से सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई है। वर्ष 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से भाजपा लगातार बंगाल में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी हुई थी। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा संगठन ने गांव-गांव तक अपनी पहुंच बढ़ाई, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत लगाने के बावजूद पार्टी सत्ता तक नहीं पहुंच सकी थी। उस हार के बाद भाजपा ने संगठन, रणनीति और नेतृत्व तीनों स्तर पर बड़े बदलाव किए और आखिरकार इस बार बंगाल की सत्ता तक पहुंचने में सफल रही। ब्रिगेड परेड मैदान में हुए शपथ ग्रहण समारोह को भाजपा ने शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया। शनिवार सुबह से ही मैदान के आसपास हजारों कार्यकर्ता जुटने लगे थे। भगवा झंडों, नारों और विशाल एलईडी स्क्रीन के बीच माहौल पूरी तरह चुनावी जीत के उत्सव में बदल गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहुंचते ही “भारत माता की जय” और “बंगाल वॉन्ट्स बीजेपी” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रधानमंत्री मोदी ने मैदान तक पहुंचने के लिए विशेष रूप से तैयार रथ का इस्तेमाल किया। 

मंच पर पहुंचने के बाद उन्होंने सबसे पहले रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। शुभेंदु अधिकारी ने बांग्ला भाषा में ईश्वर के नाम पर शपथ ली। सादे भगवा कुर्ते में नजर आए शुभेंदु अधिकारी का अंदाज भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहा। शपथ लेने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास जाकर झुककर प्रणाम किया। प्रधानमंत्री ने उनकी पीठ थपथपाकर शुभकामनाएं दीं। समारोह के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से जनता का अभिवादन किया और घुटनों के बल बैठकर लोगों को प्रणाम किया। यह दृश्य पूरे कार्यक्रम का सबसे चर्चित क्षण बन गया। राज्यपाल आर. एन. रवि ने शुभेंदु अधिकारी के साथ पांच अन्य विधायकों को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और क्षुदीराम टुडू शामिल रहे। भाजपा नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल का और विस्तार किया जा सकता है। नई सरकार में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है। इस शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन शासित राज्यों के लगभग बीस मुख्यमंत्री मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, अश्विनी वैष्णव, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, सर्बानंद सोनोवाल, निशीथ प्रमाणिक, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग पश्चिम बंगाल में अधिकारी के शपथ समारोह में शामिल हुए। उद्योगपति, फिल्म जगत की हस्तियां और विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए। भाजपा ने इस आयोजन को “सोनार बांग्ला” के नए अध्याय की शुरुआत बताया।

तृणमूल का किला ढहा, भाजपा ने बदला बंगाल का पूरा राजनीतिक समीकरण

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया। 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों तक सिमट गई। यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले पंद्रह वर्षों से राज्य की राजनीति पूरी तरह तृणमूल कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमती रही थी। भाजपा ने इस बार केवल हिंदुत्व या राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि संगठनात्मक मजबूती, बूथ प्रबंधन और स्थानीय नेतृत्व को भी केंद्र में रखा। 

शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री चेहरा बनाए जाने के बाद भाजपा को ग्रामीण बंगाल और पूर्व मेदिनीपुर क्षेत्र में बड़ा लाभ मिला। कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे शुभेंदु ने तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक ढांचे को करीब से देखा था। भाजपा ने उसी अनुभव को चुनावी ताकत में बदल दिया। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने बंगाल में लगातार सभाएं कीं। भाजपा ने “डबल इंजन सरकार” का नारा देते हुए विकास, उद्योग, रोजगार और कानून व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाया। 

दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस भाजपा को बाहरी पार्टी बताकर बंगाली अस्मिता का मुद्दा उठाती रही, लेकिन इस बार वह रणनीति मतदाताओं को पूरी तरह प्रभावित नहीं कर सकी। भाजपा की जीत के पीछे महिलाओं, युवा मतदाताओं और पहली बार वोट करने वाले वर्ग की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। पार्टी ने ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी अपनी पकड़ बढ़ाई। राजनीतिक तौर पर यह परिणाम भाजपा के लिए केवल बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बड़ी सफलता माना जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी अब पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री बन गए हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में राजनीतिक तनाव को कम करने, प्रशासनिक संतुलन स्थापित करने और चुनाव के दौरान किए गए वादों को जमीन पर उतारने की होगी। 

भाजपा नेतृत्व यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उसकी सरकार केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि प्रशासनिक और आर्थिक परिवर्तन भी लेकर आएगी।

नई सरकार के गठन के साथ ही अब पूरे देश की नजर बंगाल पर टिक गई है। भाजपा के लिए यह केवल एक राज्य की जीत नहीं, बल्कि उस लंबे राजनीतिक अभियान की सफलता है, जिसकी शुरुआत एक दशक पहले हुई थी। वहीं तृणमूल कांग्रेस के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का बड़ा अवसर माना जा रहा है। बंगाल की राजनीति में अब एक नए दौर की शुरुआत हो चुकी है, जहां सत्ता परिवर्तन के साथ राज्य का राजनीतिक चरित्र भी तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है।

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