इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, आईफोन बना नंबर-1 निर्यातक, दुनिया में बढ़ा दबदबा

भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक बड़ा मुकाम हासिल करते हुए वित्त वर्ष 2026 में आईफोन निर्यात को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है। देश से आईफोन का कुल निर्यात करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापार भू-राजनीतिक तनाव और शुल्क बाधाओं से जूझ रहा है। इसके बावजूद भारत ने अपनी उत्पादन क्षमता और नीति समर्थन के दम पर दुनिया के सामने एक मजबूत विकल्प के रूप में खुद को स्थापित किया है। इस ऐतिहासिक उछाल के पीछे सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना की अहम भूमिका रही है। योजना के अंतिम वर्ष में भारत ने जिस तरह से उत्पादन और निर्यात में तेजी दिखाई है, उसने देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में मजबूती से खड़ा कर दिया है। खास बात यह है कि यह वृद्धि लगभग शून्य से शुरू होकर महज पांच साल में इस ऊंचाई तक पहुंची है, जो किसी भी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। Apple Inc. के आईफोन अब भारत के सबसे बड़े ब्रांडेड निर्यात उत्पाद बन चुके हैं। 

हार्मनाइज्ड सिस्टम (HS) कोड के तहत वर्गीकृत 5,000 से अधिक उत्पाद श्रेणियों में आईफोन ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 के पहले 11 महीनों में यह बढ़त स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। भारत का कुल स्मार्टफोन निर्यात इस अवधि में करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें अकेले आईफोन का योगदान 75 प्रतिशत से अधिक रहा। यह न केवल भारत की उत्पादन क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि वैश्विक कंपनियां अब चीन के विकल्प के रूप में भारत को तेजी से अपना रही हैं। निर्यात के अन्य प्रमुख क्षेत्रों की तुलना करें तो आईफोन काफी आगे निकल चुका है। डीजल वाहनों का निर्यात 14.53 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि हीरे का निर्यात 11.23 अरब डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर रहा। दवाइयां और पेट्रोल क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर रहे। इस तुलना से साफ है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, खासकर स्मार्टफोन, अब भारत के निर्यात का सबसे मजबूत स्तंभ बनते जा रहे हैं। भारत में आईफोन निर्माण के लिए वैश्विक कंपनियों के साथ-साथ घरेलू साझेदारों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है। Foxconn और Tata Electronics जैसे प्रमुख निर्माता इस सफलता के केंद्र में हैं। 

इन कंपनियों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर उत्पादन इकाइयां स्थापित की हैं, जहां हजारों लोग काम कर रहे हैं। इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी उल्लेखनीय है। छोटी इकाइयों में जहां करीब 19,000 कर्मचारी कार्यरत हैं, वहीं बड़ी इकाइयों में यह संख्या 42,000 से अधिक है। खास बात यह है कि इस कार्यबल में 70 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं, जो सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से एक सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। आईफोन के उत्पादन और निर्यात में वृद्धि के साथ-साथ भारत में एक मजबूत सप्लाई चेन भी विकसित हुई है। 40 से अधिक घरेलू कंपनियों के साथ मिलकर एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया गया है। इसके अलावा जापान की TDK Corporation और कई ताइवानी संयुक्त उद्यम भी इसमें शामिल हैं। इस पूरी रणनीति में खास तौर पर चीनी कंपनियों को बाहर रखा गया है, जो वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव का संकेत देता है।

पीएलआई योजना से बदली तस्वीर, पांच साल में शून्य से शिखर तक पहुंचा आईफोन निर्यात

पीएलआई योजना के लागू होने के बाद से आईफोन निर्यात में जिस तरह की तेजी आई है, वह अपने आप में एक केस स्टडी बन चुकी है। वित्त वर्ष 2021-22 में जहां आईफोन निर्यात महज 9,351.6 करोड़ रुपये था, वहीं अगले ही साल यह बढ़कर 44,269.5 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद 2023-24 में यह आंकड़ा 85,013.5 करोड़ रुपये तक पहुंचा और 2024-25 में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2026 में यह आंकड़ा 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया, जो इस योजना की सफलता का स्पष्ट प्रमाण है। 

इस दौरान निर्यात में 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की मजबूती को दर्शाती है।इस सफलता का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि भारत ने न केवल उत्पादन बढ़ाया, बल्कि गुणवत्ता और वैश्विक मानकों को भी बनाए रखा। कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए आंतरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए, जिससे उत्पादकता और दक्षता दोनों में सुधार हुआ। आज भारत न केवल एक बड़ा बाजार है, बल्कि एक प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। 

आईफोन की यह सफलता ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लिए एक मजबूत उदाहरण बन चुकी है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में और बड़ी भूमिका निभा सकता है। आईफोन निर्यात का यह उछाल भारत की आर्थिक रणनीति, नीतिगत समर्थन और वैश्विक कंपनियों के विश्वास का संयुक्त परिणाम है। यदि यही गति बनी रहती है, तो भारत जल्द ही दुनिया के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातकों में शीर्ष स्थान हासिल कर सकता है।

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