दुनिया में जब भी किसी देश पर प्राकृतिक आपदा या मानवीय संकट आया है, भारत ने हमेशा सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाने की कोशिश की है। चाहे 2015 का नेपाल भूकंप हो, श्रीलंका में आर्थिक संकट, बांग्लादेश में बाढ़, तुर्किये में विनाशकारी भूकंप या फिर कोरोना महामारी के दौरान दर्जनों देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने का अभियान, भारत ने हर बार यह साबित किया कि उसकी विदेश नीति केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता और सहयोग उसके मूल सिद्धांत हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारत ने अब उत्तरी वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के बाद राहत एवं चिकित्सा सहायता के लिए ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ शुरू किया है। स्पेनिश भाषा में ‘अमिस्ताद’ का अर्थ ‘मित्रता’ होता है। इस अभियान के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि संकट की घड़ी में वह अपने मित्र देशों के साथ मजबूती से खड़ा है।भारतीय वायुसेना के दो सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों से राहत सामग्री, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और भारतीय सेना की विशेष मेडिकल टीम वेनेजुएला के लिए रवाना हुई है। भारतीय सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल से 41 सदस्यीय विशेषज्ञ दल इस मिशन का हिस्सा है। इसमें नौ अनुभवी सैन्य चिकित्सक, सर्जन, एनेस्थेटिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम प्रभावित क्षेत्रों में गंभीर रूप से घायल लोगों का इलाज, आपातकालीन सर्जरी, ट्रॉमा प्रबंधन, गहन चिकित्सा और जीवनरक्षक सेवाएं उपलब्ध कराएगी।
भारतीय सेना अपने साथ लगभग छह टन चिकित्सा सामग्री लेकर गई है। वहीं विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बताया कि भारतीय वायुसेना के दोनों विमानों के माध्यम से कुल 35 टन से अधिक राहत सामग्री, दवाइयां, चिकित्सा उपकरण और दो अत्याधुनिक ‘भीष्म क्यूब’ भी भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला की सरकार और वहां के लोगों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है और हरसंभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता ‘भीष्म क्यूब’ है, जिसे भारत की ‘आरोग्य मैत्री’ परियोजना के तहत विकसित किया गया है। यह एक मॉड्यूलर और तेजी से स्थापित होने वाला फील्ड अस्पताल है, जो कुछ ही समय में सक्रिय होकर लगभग 200 मरीजों को उपचार, ट्रॉमा केयर, आपातकालीन सर्जरी और आईसीयू जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा सकता है।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता को देखते हुए इसे भारत की मानवीय सहायता क्षमता का नया प्रतीक माना जा रहा है। भारत का यह मिशन केवल राहत सामग्री भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का भी विस्तार है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ‘ऑपरेशन दोस्त’, ‘वैक्सीन मैत्री’ और कई अंतरराष्ट्रीय राहत अभियानों के जरिए यह साबित किया है कि वैश्विक संकट के समय वह एक जिम्मेदार और भरोसेमंद साझेदार है। वेनेजुएला में शुरू किया गया ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ भी इसी मानवीय दृष्टिकोण का एक और उदाहरण है।
24 जून को आया था विनाशकारी भूकंप, मृतकों की संख्या 235 पहुंची
वेनेजुएला के उत्तरी तटीय क्षेत्र में बुधवार, 24 जून को कुछ ही सेकंड के अंतराल में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए। इन झटकों ने राजधानी कराकास सहित ला गुआइरा, काराबोबो, मिरांडा और आसपास के कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। सैकड़ों इमारतें ढह गईं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और हजारों लोग बेघर हो गए। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस भीषण आपदा में 235 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। भूकंप के बाद वेनेजुएला सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने राहत अभियान शुरू किया है और भारत, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, मेक्सिको तथा अन्य देशों ने सहायता भेजने की घोषणा की है। भारत की मेडिकल टीम और आधुनिक फील्ड हॉस्पिटल वहां के राहत अभियान को नई मजबूती देंगे।
भारत का यह कदम एक बार फिर साबित करता है कि वह केवल एक उभरती आर्थिक और सामरिक शक्ति ही नहीं, बल्कि मानवता के संकट में सबसे पहले मदद के लिए आगे आने वाला विश्वसनीय मित्र भी है। वेनेजुएला के लिए भेजी गई राहत सामग्री, चिकित्सा दल और भीष्म क्यूब हजारों प्रभावित लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकते हैं। साथ ही यह अभियान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की जिम्मेदार, संवेदनशील और मानवीय शक्ति की छवि को और अधिक मजबूत करेगा।

















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