ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी सैन्य तनाव के बीच कूटनीति की एक नई संभावना सामने आई है। ईरान ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाता है, तो वह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सात दिनों के भीतर फिर से खोलने के लिए तैयार है। रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान की ओर से यह प्रस्ताव अमेरिका तक मध्यस्थों के जरिए पहुंचाया जा चुका है। तेहरान का कहना है कि इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू की जा सकती है और संघर्ष को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचा ईरानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ रुकी हुई कूटनीतिक बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह अधिकृत है। ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले यह स्पष्ट करे कि वह सैन्य रास्ते के बजाय कूटनीतिक समाधान चाहता है। इसके बाद बातचीत की समयसीमा और आगे की प्रक्रिया तय की जा सकती है। ईरानी अधिकारी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मध्यस्थ देशों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की जा सकती है।
ईरान की ओर से सामने आई इस पहल को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रॉयटर्स के अनुसार, सितंबर के मध्य में भी इस रास्ते से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की संख्या सामान्य औसत से काफी कम रही। 18 सितंबर को उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, एक दिन में केवल चार मालवाहक जहाज इस जलमार्ग से गुजरे, जबकि पिछले 10 दिनों का औसत करीब 16 जहाज प्रतिदिन था।
ईरान का प्रस्ताव केवल समुद्री रास्ता खोलने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे व्यापक कूटनीतिक समझौते की कोशिश भी दिखाई दे रही है। ईरानी अधिकारी के मुताबिक, 16 सितंबर को मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका को संघर्ष समाप्त करने का प्रस्ताव भेजा गया था। तेहरान अब चाहता है कि वाशिंगटन अपनी ओर से ऐसे ठोस कदम उठाए, जिनसे बातचीत के लिए भरोसे का माहौल बने। ईरान का कहना है कि अमेरिका के शुरुआती कदमों के बाद वह होर्मुज को सात दिनों के भीतर खोल सकता है और फिर बातचीत की मेज पर लौट सकता है।
होर्मुज बंद रहने से दुनिया पर बढ़ा ऊर्जा संकट का खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और समुद्री मार्गों में शामिल है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। रॉयटर्स के अनुसार, संघर्ष से पहले इस मार्ग से दुनिया के तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता था। इसलिए यहां लंबे समय तक यातायात बाधित रहने का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। होर्मुज में यातायात प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बाजार में लगातार चिंता बनी हुई है। हालांकि ईरान की ओर से सात दिनों में जलडमरूमध्य खोलने की संभावना सामने आने के बाद मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। रॉयटर्स के अनुसार, ब्रेंट कच्चे तेल का नवंबर वायदा करीब 2 प्रतिशत गिरकर 98.33 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बाजार की प्रतिक्रिया इस बात का संकेत देती है कि होर्मुज से जुड़ा कोई भी घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा कीमतों को तेजी से प्रभावित कर सकता है।
ईरान का कहना है कि होर्मुज को खोलने की प्रक्रिया अमेरिका के सैन्य रुख में बदलाव से जुड़ी होगी। तेहरान चाहता है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी समाप्त करे और जलडमरूमध्य से जुड़े सैन्य अभियानों को रोकने की दिशा में कदम उठाए। इसके बदले ईरान समुद्री मार्ग खोलने और बातचीत फिर शुरू करने के लिए तैयार है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मध्यस्थ देशों के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा करने का अधिकार दिया गया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी अलग से बैठक की योजना नहीं बताई गई है, लेकिन ईरानी अधिकारियों के अनुसार न्यूयॉर्क में मध्यस्थ देशों के जरिए बातचीत आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है। तेहरान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका कूटनीतिक समाधान के प्रति गंभीरता दिखाता है तो दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुल सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। ईरान ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है कि पहले अमेरिका की ओर से सैन्य दबाव कम करने और बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने जैसे कदम उठने चाहिए। इसके बाद ही होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और व्यापक बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। फिलहाल ईरान का प्रस्ताव मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक पहुंच चुका है और संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक संपर्क की संभावनाओं पर नजर बनी हुई है।
होर्मुज के भविष्य को लेकर होने वाली किसी भी प्रगति का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इस मार्ग से तेल और गैस की बड़ी मात्रा का अंतरराष्ट्रीय परिवहन होता है, इसलिए जलडमरूमध्य के खुलने या बंद रहने से एशिया, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों में ऊर्जा आपूर्ति, कच्चे तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में ईरान की सात दिनों में रास्ता खोलने की पेशकश अब संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों के केंद्र में आ गई है।


















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