हवाई यात्रा करने की तैयारी कर रहे यात्रियों की जेब पर अब अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने 9 अक्टूबर की रात 12:01 बजे से अपनी उड़ानों पर ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) बढ़ा दिया है। इस फैसले का असर घरेलू के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के यात्रियों पर भी पड़ेगा। घरेलू मार्गों पर यात्रियों को 400 रुपये से लेकर 1,200 रुपये तक अतिरिक्त चुकाने होंगे, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यह बढ़ोतरी मार्ग और यात्रा की श्रेणी के अनुसार काफी अधिक हो सकती है। विमान ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को इस फैसले की प्रमुख वजह बताया गया है। पिछले सात महीनों में एअर इंडिया की ओर से ईंधन अधिभार में यह तीसरी बढ़ोतरी है। ऐसे में हवाई यात्रा का बजट बनाने वाले यात्रियों को टिकट की कुल कीमत पर विशेष ध्यान देना होगा।
विमानन क्षेत्र में ईंधन की लागत एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च का एक बड़ा हिस्सा होती है। जब विमान ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं, तो एयरलाइंस के लिए उड़ानों का संचालन महंगा हो जाता है। ऐसी स्थिति में कंपनियां अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए टिकट की मूल कीमत के अलावा ईंधन अधिभार लगाने या पहले से लागू शुल्क में बदलाव करने का फैसला लेती हैं। एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने भी इसी आधार पर अपने फ्यूल सरचार्ज में संशोधन किया है।
घरेलू यात्रियों के लिए इस बढ़ोतरी का सीधा असर टिकट के कुल खर्च पर दिखाई देगा। जिन यात्रियों ने पहले से टिकट बुक करा लिया है, उनके लिए नए शुल्क की प्रयोज्यता संबंधित टिकट की शर्तों पर निर्भर करेगी। वहीं, नई बुकिंग कराने वाले यात्रियों को टिकट खरीदते समय प्रदर्शित कुल किराये की जांच करनी चाहिए। केवल शुरुआती किराया देखकर टिकट बुक करने से बाद में लगने वाले शुल्कों का पूरा अंदाजा नहीं मिल सकता। इसलिए यात्रा की तारीख, उड़ान के मार्ग और टिकट की अंतिम कीमत की तुलना करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
एअर इंडिया समूह की दोनों विमानन कंपनियों पर यह बढ़ोतरी लागू होने से घरेलू नेटवर्क पर यात्रा करने वाले यात्रियों के साथ विदेश जाने वाले लोगों का खर्च भी बढ़ सकता है। छुट्टियों, त्योहारों, पारिवारिक कार्यक्रमों या व्यावसायिक यात्राओं के लिए टिकट बुक कराने वालों को अपने यात्रा बजट में अतिरिक्त रकम का प्रावधान रखना पड़ सकता है। खासकर उन यात्रियों पर इसका असर अधिक महसूस हो सकता है, जो परिवार के कई सदस्यों के लिए एक साथ टिकट खरीदते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर शुल्क में बढ़ोतरी डॉलर में बताए गए अलग-अलग स्तरों के अनुरूप भी हो सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगभग 55 डॉलर से 215 डॉलर तक बताया गया है। भारतीय मुद्रा में इसकी राशि विनिमय दर और संबंधित मार्ग पर लागू शुल्क के आधार पर अलग हो सकती है। इसलिए यात्रियों को यह समझना जरूरी है कि हर अंतरराष्ट्रीय टिकट पर एक समान राशि नहीं बढ़ेगी। वास्तविक अतिरिक्त भुगतान यात्रा के गंतव्य और संबंधित उड़ान पर लागू शुल्क के अनुसार तय होगा।
सात महीने में तीसरी बार बढ़ा शुल्क, इंडिगो भी कर चुकी है बढ़ोतरी
एअर इंडिया की ओर से पिछले सात महीनों में तीसरी बार फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया जाना इस बात का संकेत है कि विमानन कंपनियां ईंधन की बढ़ती लागत के दबाव से जूझ रही हैं। इससे पहले इंडिगो ने भी 6 अक्टूबर 2026 से अपनी उड़ानों पर ईंधन अधिभार बढ़ाने का फैसला किया था। लगातार दो बड़ी विमानन कंपनियों की ओर से शुल्क बढ़ाए जाने के बाद हवाई यात्रा के खर्च को लेकर यात्रियों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। विमानन कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईंधन की कीमतों और परिचालन खर्च के बीच संतुलन बनाए रखने की है। विमान को उड़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाला एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ, एयरलाइंस के खर्च को सीधे प्रभावित करता है। इसकी कीमतों में तेजी आने पर उड़ानों का संचालन महंगा हो जाता है। इसके अलावा विमानों का रखरखाव, कर्मचारियों का खर्च, हवाई अड्डों पर लगने वाले शुल्क और अन्य परिचालन लागत भी एयरलाइंस के वित्तीय गणित को प्रभावित करते हैं। ऐसे में ईंधन अधिभार बढ़ाना कंपनियों के लिए अतिरिक्त खर्च का कुछ हिस्सा यात्रियों से वसूलने का माध्यम बन जाता है।
हालांकि, फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर टिकट की कीमत एक निश्चित राशि से ही बढ़ेगी। घरेलू उड़ानों में 400 रुपये से 1,200 रुपये तक की अतिरिक्त राशि और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में अलग-अलग शुल्क लागू होने से अंतिम किराया मार्ग के अनुसार बदल सकता है। यात्रियों को टिकट बुक करते समय यह देखना चाहिए कि प्रदर्शित कीमत में सभी लागू शुल्क शामिल हैं या नहीं। यदि यात्रा में कई उड़ानें शामिल हैं, तो प्रत्येक उड़ान के किराये और अतिरिक्त शुल्क की जानकारी अलग-अलग जांचना भी उपयोगी होगा।
इस फैसले का असर पर्यटन, कारोबार और व्यक्तिगत यात्राओं पर भी पड़ सकता है। हवाई मार्ग से दूसरे शहरों या देशों में जाने वाले लोगों को अब यात्रा की योजना बनाते समय कुल खर्च का नए सिरे से आकलन करना होगा। वहीं, एयरलाइंस के बीच किराये की तुलना करते समय केवल मूल टिकट मूल्य को आधार बनाने के बजाय अंतिम भुगतान योग्य राशि देखना अधिक समझदारी होगी।
एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस की ओर से 9 अक्टूबर से लागू की गई यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब विमानन कंपनियां ईंधन की लागत में वृद्धि का सामना कर रही हैं। इंडिगो की ओर से भी कुछ दिन पहले शुल्क बढ़ाए जाने के बाद हवाई यात्रियों के लिए राहत की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई देती है। आने वाले समय में टिकटों की कुल कीमत पर कितना असर पड़ेगा, यह ईंधन की कीमतों, कंपनियों की शुल्क नीति और संबंधित मार्गों पर लागू दरों पर निर्भर करेगा। यात्रियों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि टिकट बुक करने से पहले सभी शुल्कों की जांच करें और यात्रा का बजट उसी हिसाब से तैयार करें।


















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