राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया के बीच मतदाताओं को जारी किए गए नोटिस को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। चुनाव आयोग की ओर से जारी सूची में करीब 33.1 लाख मतदाताओं को अलग-अलग तरह की विसंगतियों या पुराने मतदाता रिकॉर्ड से विवरण का मिलान नहीं होने के कारण नोटिस दिया गया है। इस सूची में कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं, संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। इनमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं। चुनाव आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नोटिस मिलने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। नोटिस का उद्देश्य मतदाता से संबंधित जानकारी में सामने आई विसंगति को स्पष्ट कराना और आवश्यक दस्तावेज या स्पष्टीकरण हासिल करना है। अधिकारियों के मुताबिक, सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।
दिल्ली में एसआईआर के तहत तैयार प्रारूप मतदाता सूची में 97,53,577 मतदाताओं के नाम शामिल हैं। यह संख्या 30 जून को मौजूद करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं की तुलना में काफी कम है। प्रारूप सूची जारी होने के बाद करीब 33.1 लाख मतदाताओं को अलग-अलग कारणों से नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है, जिनका विवरण पिछली एसआईआर की मतदाता सूची से जोड़ा नहीं जा सका। चुनाव अधिकारियों के अनुसार करीब 13.8 लाख मतदाताओं का पिछली एसआईआर सूची से मिलान नहीं हो सका, जबकि लगभग 19.3 लाख मामलों में तार्किक विसंगतियां सामने आईं।
इन विसंगतियों में नाम की वर्तनी में अंतर, माता-पिता के नाम से जुड़ा बेमेल विवरण और मतदाता तथा उसके परिजनों की उम्र के बीच असामान्य अंतर जैसी स्थितियां शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक मामले ऐसे हैं, जिनमें वर्तमान मतदाता रिकॉर्ड को पिछली एसआईआर सूची से जोड़ा नहीं जा सका। इसके बाद नाम की वर्तनी या अन्य व्यक्तिगत विवरण में अंतर वाले मामले हैं। कुछ मामलों में मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र के बीच अंतर निर्धारित सीमा से कम या अधिक पाया गया है। भाई-बहनों की जन्मतिथि में बहुत कम अंतर जैसी विसंगतियां भी जांच के दायरे में आई हैं।
प्रमुख नेताओं और अधिकारियों के नाम आने से बढ़ी चर्चा
एसआईआर की सूची में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का नाम भी सामने आया है। उनके साथ उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी और बहू गीतिका का नाम भी उन मतदाताओं की सूची में बताया गया है, जिनका पिछली मतदाता सूची से मिलान नहीं हो सका। वहीं दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी नोटिस जारी किया गया है। उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी अलग-अलग विसंगतियों के आधार पर सूची में दर्ज किए गए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर का नाम भी एसआईआर के तहत नोटिस पाने वाले प्रमुख मतदाताओं में शामिल है। इसके अलावा दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई अन्य प्रमुख नेताओं के नाम भी नोटिस वाली सूची में सामने आए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इन मामलों में भी नोटिस का उद्देश्य रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को दूर करना और मतदाता की पात्रता की पुष्टि करना है।
चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू का मामला भी इस पूरी प्रक्रिया में खास चर्चा का विषय बना है। उनके और उनके बेटे के नाम को लेकर रिकॉर्ड में नाम से संबंधित बेमेल जानकारी सामने आने पर नोटिस जारी किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, संधू के मामले में “स्वयं के नाम में बेमेल” विवरण दर्ज किया गया था। हालांकि, नई दिल्ली जिला निर्वाचन अधिकारी ने बाद में स्पष्ट किया कि संधू की चुनावी प्रविष्टि का सत्यापन किया जा चुका है और उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाने के लिए मान्य पाया गया है। एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर अब पारदर्शिता का मुद्दा भी उठ रहा है। करीब 33 लाख मतदाताओं को नोटिस दिए जाने के बाद यह सवाल सामने आया है कि प्रत्येक मतदाता को किस आधार पर चिन्हित किया गया और “तार्किक विसंगति” की श्रेणी में रखने के लिए कौन से मानदंड अपनाए गए। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका पहुंची है। अदालत इस मामले पर 22 सितंबर को सुनवाई करने वाली है। याचिका में नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और उन्हें नोटिस दिए जाने के कारण सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
चुनाव आयोग और दिल्ली के निर्वाचन अधिकारियों की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और उसमें पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जा रहा है। दावा और आपत्ति की प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलेगी, जबकि नोटिसों के निस्तारण की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक पूरी किए जाने की योजना है। इसके बाद 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है।
इस तरह दिल्ली की मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अब केवल आंकड़ों और तकनीकी विसंगतियों की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है। करीब 33 लाख मतदाताओं को जारी नोटिस और इनमें पूर्व उप प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, चुनाव आयुक्त तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री जैसे प्रमुख नाम शामिल होने से इस पूरी कवायद पर सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता की पात्रता समाप्त होने या नाम हटाए जाने का फैसला नहीं है। अंतिम निर्णय संबंधित दस्तावेजों, स्पष्टीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।


















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