वेनेजुएला में भूकंप का महाविनाश, 10 हजार से अधिक मौतों की आशंका, इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढही, जापान भी 7.2 तीव्रता के झटकों से कांपा

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए दो भीषण भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। एक ही मिनट के अंतराल पर आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के शक्तिशाली झटकों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। शुरुआती आकलनों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में 10 हजार से अधिक लोगों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। कई शहरों में बहुमंजिला इमारतें ढह गई हैं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और हजारों लोग मलबे में फंसे होने की आशंका है। हालात की गंभीरता को देखते हुए पूरे देश में आपातकाल लागू कर दिया गया है। राजधानी कराकास सहित कई प्रमुख शहरों में भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग घबराकर घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में संचार और बिजली सेवाएं बाधित हो गई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ ही सेकंड में ऊंची-ऊंची इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। 

सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक राजधानी की 22 मंजिला इमारत का पूरी तरह ध्वस्त हो जाना है। बचाव दल मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं, लेकिन तबाही का दायरा इतना बड़ा है कि राहत कार्यों में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भूकंप के बाद सामने आए वीडियो और तस्वीरें भयावह मंजर बयां कर रही हैं। कई स्थानों पर लोग मलबे के बीच अपने परिजनों को खोजते दिखाई दिए। अस्पतालों में घायलों की भीड़ उमड़ पड़ी है और कई चिकित्सा केंद्रों की क्षमता जवाब देती नजर आ रही है। सरकार ने सेना और आपदा राहत एजेंसियों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर दिया है। 

अस्थायी राहत शिविर बनाए जा रहे हैं, जहां बेघर हुए लोगों को भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। यह आपदा ऐसे समय में आई है जब वेनेजुएला पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक संकटों से जूझ रहा है। देश में सत्ता परिवर्तन के बाद अंतरिम सरकार प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रही है। लंबे समय से आर्थिक बदहाली झेल रही जनता के लिए यह भूकंप नई मुसीबत बनकर सामने आया है। देश की बड़ी आबादी पहले ही गरीबी, बेरोजगारी और संसाधनों की कमी से प्रभावित है। ऐसे में पुनर्वास और राहत कार्य सरकार के लिए बड़ी परीक्षा साबित होने वाले हैं। 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त कर चुकीं वेनेजुएला की प्रमुख नेता मारिया कोरिना मचाडो ने देशवासियों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह समय एकजुट होकर संकट का सामना करने का है। उन्होंने सभी प्रभावित परिवारों के लिए प्रार्थना करते हुए लोगों से साहस बनाए रखने की अपील की।

कम गहराई वाले भूकंप क्यों बने भारी तबाही की वजह

वेनेजुएला में इतनी बड़ी तबाही की प्रमुख वजह भूकंपों की कम गहराई रही। पहला भूकंप पृथ्वी की सतह से लगभग 22 किलोमीटर नीचे और दूसरा केवल 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था। दोनों भूकंप उथले यानी कम गहराई वाले भूकंपों की श्रेणी में आते हैं।

भूकंप वैज्ञानिकों के अनुसार जब भूकंप का केंद्र धरती की सतह के करीब होता है तो उससे निकलने वाली भूकंपीय तरंगें बहुत कम दूरी तय करके सतह तक पहुंच जाती हैं। इसके कारण जमीन अधिक तीव्रता से हिलती है और इमारतों तथा अन्य ढांचों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। यही कारण है कि समान तीव्रता वाले गहरे भूकंपों की तुलना में उथले भूकंप अधिक विनाशकारी साबित होते हैं।

वेनेजुएला में आए दोनों झटकों को पिछले एक सदी से अधिक समय में आए सबसे शक्तिशाली भूकंपों में गिना जा रहा है। 

जैसे-जैसे राहत और बचाव कार्य आगे बढ़ेगा, जनहानि और नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। आशंका है कि मृतकों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसी बीच गुरुवार सुबह जापान भी 7.2 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से कांप उठा। यह भूकंप उत्तरी जापान के होन्शू द्वीप के इवाते प्रांत के समुद्री क्षेत्र में आया। इसके झटके राजधानी टोक्यो समेत सैकड़ों किलोमीटर दूर तक महसूस किए गए। कई घरों में अलमारियों से सामान गिर गया और सुरक्षा कैमरों में इमारतों के हिलने के दृश्य कैद हुए।

हालांकि जापान के लिए राहत की बात यह रही कि किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली। जापान मौसम एजेंसी ने सुनामी की चेतावनी भी जारी नहीं की। विशेषज्ञों का मानना है कि जापान की मजबूत भूकंपरोधी निर्माण व्यवस्था और उन्नत आपदा प्रबंधन प्रणाली ने संभावित नुकसान को काफी हद तक सीमित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों में आए इन शक्तिशाली भूकंपों ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं के खतरे की याद दिलाई है। जहां जापान ने अपनी तैयारी और तकनीकी क्षमता के बल पर संभावित संकट को नियंत्रित रखा, वहीं वेनेजुएला में भूकंप ने भारी तबाही मचाकर हजारों परिवारों को संकट में डाल दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें वेनेजुएला में चल रहे राहत और बचाव अभियानों पर टिकी हैं, जहां हर गुजरते घंटे के साथ मलबे में जिंदगी की तलाश जारी है।

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